
मुंबई/पुणे: पुणे के ऐतिहासिक लोहागढ़ किले में हुए 25 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर केतन अग्रवाल मर्डर केस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस सनसनीखेज हत्याकांड की जांच कर रही पुणे ग्रामीण पुलिस की टेक्निकल सर्विलांस टीम के हाथ अब तक का सबसे बड़ा और खौफनाक डिजिटल सबूत लगा है। फोरेंसिक जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी 20 वर्षीय सिया गोयल ने अपने मंगेतर केतन को पहाड़ी से नीचे धकेलने से ठीक 34 मिनट पहले अपने प्रेमी और सह-आरोपी चेतन चौधरी (22) को एक 'सीक्रेट कॉल' की थी। कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) के मुताबिक, यही वह कॉल थी जिसे मर्डर की खौफनाक साजिश के लिए 'आखिरी हरी झंडी' माना जा रहा है। पुलिस का मानना है कि इस कॉल के दौरान सिया ने चेतन को किले के व्यू-पॉइंट की सटीक लोकेशन दी और यह पक्का किया कि आसपास कोई दूसरा टूरिस्ट मौजूद न हो। इसके तुरंत बाद दोनों ने अपने WhatsApp और Instagram चैट व वॉयस नोट डिलीट कर दिए ताकि कोई सबूत न बचे।
पुणे ग्रामीण पुलिस की टेक्निकल सर्विलांस टीम ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच शुरू की है। जांचकर्ताओं को शक है कि हत्या से पहले सिया और चेतन के बीच हुई बातचीत में घटना की योजना से जुड़े अहम सुराग हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, दोनों के बीच हुई कॉल के दौरान कथित तौर पर लोहागढ़ किले में सिया की लोकेशन और आसपास की स्थिति को लेकर बातचीत हुई थी। पुलिस का मानना है कि यह बातचीत घटना से पहले की तैयारियों का हिस्सा हो सकती है। जांच एजेंसियां अब डिलीट किए गए व्हाट्सऐप मैसेज, वॉयस नोट और सोशल मीडिया चैट को रिकवर करने की कोशिश कर रही हैं। इसके अलावा मोबाइल लोकेशन डेटा, इंटरनेट आईपी एड्रेस और कॉल रिकॉर्ड को भी आपस में मिलाया जा रहा है।
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Pune, Maharashtra: Ketan Agarwal Murder Case | Video of Lohagad Fort, where police took accused Siya Goyal for crime scene recreation. pic.twitter.com/GyDELhG9GC— NEWS WALA (@NEWSWALApy) June 28, 2026
इस बीच, पुणे के बाहरी इलाके में स्थित बेलमोंडो सोसाइटी में मारे गए केतन अग्रवाल की आत्मा की शांति और न्याय के लिए एक विशाल कैंडललाइट मार्च निकाला गया। इस दौरान पूरा माहौल गम और गुस्से में डूबा हुआ था। केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने रोते हुए चश्मदीदों से एक बेहद भावुक अपील की। उन्होंने कहा, "कुछ लोग हमें छिपकर मैसेज कर रहे हैं कि वे 18 जून को लोहागढ़ किले में मौजूद थे और उन्होंने घटना के पहले या बाद के पलों को देखा है, लेकिन वे डर के मारे पुलिस के पास नहीं जा रहे हैं। मैं हाथ जोड़कर उन सभी से आग्रह करता हूं कि वे आगे आएं और केतन को न्याय दिलाएं। मैं भरोसा दिलाता हूं कि उन्हें किसी कानूनी झंझट या समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।"
कैंडललाइट मार्च में शामिल केतन के दादा देवीचंद अग्रवाल का दर्द भी छलक पड़ा। उन्होंने रोते हुए कहा, "हमारे अपने ही लोगों ने हमें धोखा दिया, जिन्हें हम कई सालों से जानते थे। अगर सिया को शादी नहीं करनी थी, तो शुरू में ही मना कर देती, मेरे बच्चे की जान क्यों ली? हम चाहते हैं कि इस शादी के रिश्ते में शामिल हर शख्स की जांच हो और सिया व चेतन दोनों को सिर्फ और सिर्फ मौत की सज़ा मिले।" उधर पुलिस ने सिया के माता-पिता प्रवीण और पूजा गोयल से कई घंटों तक कड़ी पूछताछ की है। हालांकि, सिया की मां ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है कि उन्होंने बेटी पर शादी के लिए कोई दबाव बनाया था।
पुलिस ने सिया गोयल के माता-पिता और भाई से भी पूछताछ की है। जांचकर्ताओं का कहना है कि वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या परिवार के किसी सदस्य को कथित साजिश की जानकारी थी। सिया की मां ने कथित तौर पर उन आरोपों से इनकार किया है कि परिवार ने केतन से शादी के लिए दबाव बनाया था। उनका कहना है कि उन्होंने बेटी पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला।
पुलिस अब मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों के आधार पर मामले की कड़ी जोड़ने में जुटी है। जांचकर्ताओं का प्रयास है कि अदालत में ऐसे सबूत पेश किए जाएं, जिससे कथित साजिश और हत्या की पूरी योजना साबित हो सके। केतन अग्रवाल की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर फोरेंसिक जांच और उन डिजिटल सबूतों पर है, जो इस हाई-प्रोफाइल केस की अनसुलझी गुत्थी को सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस गजानन टोम्पे ने बताया कि पुलिस का साइबर विंग फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद से आरोपियों के डिलीटेड डेटा, लोकेशन लॉग और इंटरनेट IP एड्रेस का मिलान कर रहा है। पुलिस इसे कोर्ट में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (पहले से सोची-समझी साजिश के तहत हत्या) के तहत पक्का सबूत बनाकर पेश करेगी। अधिकारियों ने उन अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि केतन का हेयर पैच पहनना इस मर्डर की वजह था। न्याय की इस लड़ाई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए मामले की फास्ट-ट्रैक सुनवाई का भरोसा दिया है। इस हाई-प्रोफाइल केस के लिए देश के सबसे सीनियर और जाने-माने वकील उज्ज्वल निकम को स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (सरकारी वकील) नियुक्त किया गया है, जिससे आरोपियों का बच निकलना अब नामुमकिन नजर आ रहा है।
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