Kota Kidney Case: कोटा के अस्पताल में किडनी की बीमारी से जूझ रहीं 5 महिलाओं की मौत के बाद हड़कंप मचा हुआ है। उनका कहना है कि किडनी की डायलिसिस मशीन में उनकी जान जा रही है। इसलिए वह अब डायलिसिस नहीं कराएंगी।
कोटा (राजस्थान): कोटा के डिस्ट्रिक्ट मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी विंग में किडनी फेलियर का इलाज करा रहीं महिला मरीज़ों ने अब डायलिसिस करवाने से इनकार कर दिया है। इस मामले में 5 महिलाओं की मौत के बाद इन मरीज़ों ने प्रशासन से किडनी ट्रांसप्लांट कराने की मांग की है।अपनी तकलीफ बताते हुए एक मरीज़ ने कहा कि हर डायलिसिस सेशन के बाद उनकी हालत और खराब हो जाती है। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द उनके किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था करने की अपील की।
"मैं डायलिसिस के सहारे ज़िंदगी नहीं जीना चाहती
महिलाओं ने रिपोर्टर्स से कहा, "मैं डायलिसिस के सहारे ज़िंदगी नहीं जीना चाहती... मेरे पास सिर्फ छह महीने या उससे कुछ ज़्यादा वक्त है... प्लीज़ मेरा किडनी ट्रांसप्लांट जल्द से जल्द करवा दीजिए। मैं सरकार से अपील करती हूं कि वो मुझे ठीक होने में मदद करे। दो महीने हो गए हैं। मैंने अपना परिवार और सब कुछ पीछे छोड़ दिया है। मेरे घर पर दो छोटे बच्चे हैं। डायलिसिस के बाद मुझे बहुत बेचैनी होती है- मेरे हाथ-पैर ठंडे पड़ जाते हैं और मैं कांपने लगती हूं।"
सरकार से लिखित में मांगा वादा
एक दूसरी मरीज़ ने रिपोर्टर्स से बात करते हुए आरोप लगाया कि नेताओं और अधिकारियों से बार-बार भरोसे के बावजूद उनके इलाज को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने मांग की कि सरकार उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट कराने का लिखित वादा दे।
उन्होंने कहा, "कलेक्टर ने भी कोई पक्का जवाब नहीं दिया है। सारे नेता आए और भरोसा देकर चले गए, लेकिन अब तक किसी ने भी किडनी ट्रांसप्लांट कराने की असल ज़िम्मेदारी नहीं ली है। सरकार को आधिकारिक तौर पर ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए और हमें लिखकर देना चाहिए कि वो इसे कराएगी, चाहे अभी या बाद में। तभी हमें तसल्ली होगी।"
कोई डिप्रेशन में गया तो किसी के पति की छूटी नौकरी
लंबे इलाज के कारण हो रही मानसिक और आर्थिक परेशानियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि मरीज़ और उनके परिवार वाले अपने लोगों से दूर रहकर बहुत मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा, "हम यहां बंद रहकर गहरे डिप्रेशन में जा रहे हैं। इस तनाव के कारण हमारी सेहत लगातार बिगड़ रही है। हम अपने परिवारों से पूरी तरह कट गए हैं; हमारे बच्चे घर पर रो रहे हैं और हम यहां अस्पताल में पड़े हैं। ऊपर से, इस लंबे संकट के कारण मेरे पति की नौकरी जाने की नौबत आ गई है। यह एक बहुत ही भयानक स्थिति है, और हम बस डायलिसिस के सहारे जीना नहीं चाहते।"
कोटा के मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल क्या बोले…
मरीज़ों की चिंताओं पर कोटा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन ने कहा कि डायलिसिस एक जीवन बचाने वाली प्रक्रिया है और एक डेडिकेटेड मेडिकल टीम लगातार प्रभावित मरीज़ों की निगरानी कर रही है।
डॉ. जैन ने ANI को बताया, "डायलिसिस एक जीवन रक्षक प्रक्रिया है, और इस सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल का नेफ्रोलॉजी विभाग हर 24 घंटे में लगभग 80 मरीज़ों का डायलिसिस करता है। मैं यह नहीं कह सकता कि दूसरों को दिक्कत हो रही है या नहीं, लेकिन ऐसा लगता है कि सिर्फ इन पांच लोगों को ही परेशानी हो रही है। किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर उन्हें संभालने के लिए एक पूरी मेडिकल टीम तैनात की गई है और वह लगातार मरीज़ों की निगरानी कर रही है।" जैन ने मरीज़ों से अपील की कि वे अपने इलाज को लेकर किसी भी गलतफहमी में पड़ने के बजाय अपने डॉक्टर से बात करें।
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