
दिल्ली में बेटियों की पढ़ाई अक्सर आर्थिक तंगी की वजह से बीच में छूट जाती है। कई परिवारों के लिए स्कूल से कॉलेज तक की फीस, किताबें और अन्य खर्च बड़ा बोझ बन जाते हैं। इसी पृष्ठभूमि में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘लखपति बिटिया योजना 2026’ की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य साफ है, पैसों की कमी के कारण किसी भी बेटी की शिक्षा ग्रेजुएशन से पहले न रुके।
इस योजना के तहत दिल्ली सरकार बेटी के जन्म से लेकर उसकी डिग्री पूरी होने तक कुल 56,000 रुपये विभिन्न चरणों में उसके बैंक खाते में जमा करेगी। यह राशि आधार-लिंक्ड खाते में सुरक्षित रहेगी और उस पर ब्याज भी जुड़ता रहेगा। जब बेटी 21 वर्ष की आयु पूरी कर लेगी और ग्रेजुएशन या डिप्लोमा कर लेगी, तब उसे ब्याज सहित 1 लाख रुपये से अधिक की मैच्योरिटी राशि प्राप्त होगी। इसका मकसद केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करना है।
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हर बच्ची इस योजना के लिए पात्र नहीं है। सरकार ने कुछ स्पष्ट शर्तें तय की हैं:
इन शर्तों का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों तक योजना का लाभ पहुंचाना है।
सरकार यह राशि अलग-अलग शैक्षणिक चरणों पर देगी:
इन सभी किस्तों का कुल निवेश 56,000 रुपये होता है, जो ब्याज के साथ आगे चलकर एक बड़ी राशि में बदल जाता है।
ऑनलाइन आवेदन के लिए निम्न दस्तावेज जरूरी होंगे:
सरकार ने इस योजना को पूरी तरह डिजिटल बनाने का दावा किया है। 1 अप्रैल 2026 से दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD Delhi) के आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। इससे अभिभावकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहेगी।
शिक्षा केवल डिग्री नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की पहली सीढ़ी है। कम आय वाले परिवारों में अक्सर बेटियों की पढ़ाई सबसे पहले प्रभावित होती है। लखपति बिटिया योजना दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा के साथ यह संदेश भी देती है कि सरकार बेटियों की शिक्षा को निवेश मानती है, खर्च नहीं।
हालांकि, योजना की वास्तविक सफलता उसके क्रियान्वयन, पारदर्शिता और समय पर भुगतान पर निर्भर करेगी। आने वाले समय में यह देखना होगा कि कितनी बेटियां इससे लाभान्वित होती हैं और क्या यह पहल वास्तव में ड्रॉपआउट दर कम कर पाती है। फिलहाल, दिल्ली में बेटियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण नीति कदम माना जा रहा है।
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