सरोज मौर्या, जो पढ़ाई के साथ बीसी सखी के रूप में कार्य कर रही हैं, गांवों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचा रही हैं। पहले ग्रामीण महिलाएं बैंक जाने में संकोच करती थीं। अब उनके गांव में ही जमा-निकासी, पेंशन वितरण और डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है। बीसी सखियों ने प्रदेश में अब तक लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय लेनदेन किया है और 107 करोड़ रुपये से अधिक का लाभांश अर्जित किया है। यह दर्शाता है कि महिलाएं अब वित्तीय तंत्र का अहम हिस्सा बन चुकी हैं।
9 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय
प्रदेश में 9 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह गठित किए जा चुके हैं। 63,519 ग्राम संगठन और 3272 संकुल स्तरीय संघ सक्रिय हैं, जिनसे 99 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। लखपति महिला योजना के अंतर्गत 18 लाख से अधिक महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। यह परिवर्तन केवल सरकारी योजना का परिणाम नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास और सामाजिक बदलाव का प्रमाण है।
लखपति दीदी योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को लघु उद्योग और स्वरोजगार के लिए चरणबद्ध, ब्याज मुक्त और आसान ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इससे महिलाएं बिना बड़े जोखिम के अपना कारोबार शुरू कर सकती हैं। यही वजह है कि प्रदेश में आत्मनिर्भर महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश की ये कहानियां बताती हैं कि जब अवसर, प्रशिक्षण और भरोसा मिलता है, तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता का नया मानक स्थापित कर सकती हैं। ‘लखपति दीदी’ अब केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव की सशक्त पहचान बन चुकी है।