Success Story: कभी घर तक सीमित थीं, अब हर महीने 1 लाख कमा रहीं ये महिलाएं

Published : Feb 16, 2026, 04:58 PM IST

Lakhpati Didi Yojana: उत्तर प्रदेश में लखपति दीदी योजना से महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के जरिए लाखों महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर हर महीने एक लाख रुपये तक कमा रही हैं और गांवों की तस्वीर बदल रही हैं।

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लखपति दीदी योजना: उत्तर प्रदेश की महिलाएं लिख रहीं आत्मनिर्भरता की नई कहानी

कभी घर की चारदीवारी तक सीमित समझी जाने वाली ग्रामीण महिलाएं आज उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूत धुरी बन चुकी हैं। स्वयं सहायता समूहों के जरिए वे न केवल अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि गांव की तस्वीर भी बदल रही हैं। ‘लखपति दीदी’ योजना ने इस बदलाव को नई रफ्तार दी है। अब प्रदेश में हजारों महिलाएं हर महीने एक लाख रुपये तक की कमाई कर आर्थिक स्वावलंबन की मिसाल बन रही हैं।

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33 लाख महिलाएं लखपति बनने की राह पर

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रदेश में 33 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। बीते नौ वर्षों में महिला सशक्तीकरण को लेकर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने यह संभव किया है। यह केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि गांव-गांव में उभरती नई सामाजिक ऊर्जा का संकेत है।

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आजमगढ़ की हुस्नआरा: दो साल में 12 गुना बढ़ा कारोबार

आजमगढ़ जिले की हुस्नआरा खातून तैबा स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। उन्होंने रेशमी साड़ी निर्माण का काम शुरू किया। लखपति दीदी योजना के तहत उन्हें 1 लाख 15 हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिली। यह पूंजी उनके लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। दो वर्षों में उनका कारोबार बारह गुना तक बढ़ गया और आज वे प्रतिमाह करीब एक लाख रुपये तक कमा रही हैं। उनके शब्दों में, “अब हमारा परिवार सम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीवन जी रहा है।”

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फास्ट फूड स्टॉल से रोज 2000 रुपये की कमाई

आजमगढ़ की ही शशिकला राजभर ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ऋण लिया और ‘अदिति फास्ट फूड’ नाम से स्टॉल शुरू किया। जो महिला पहले रोजगार की तलाश में थी, आज वह प्रतिदिन लगभग 2000 रुपये का कारोबार कर रही हैं। यह कहानी बताती है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया प्रयास भी बड़ा परिणाम दे सकता है।

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बीसी सखी मॉडल: गांव तक पहुंची बैंकिंग

सरोज मौर्या, जो पढ़ाई के साथ बीसी सखी के रूप में कार्य कर रही हैं, गांवों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचा रही हैं। पहले ग्रामीण महिलाएं बैंक जाने में संकोच करती थीं। अब उनके गांव में ही जमा-निकासी, पेंशन वितरण और डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है। बीसी सखियों ने प्रदेश में अब तक लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय लेनदेन किया है और 107 करोड़ रुपये से अधिक का लाभांश अर्जित किया है। यह दर्शाता है कि महिलाएं अब वित्तीय तंत्र का अहम हिस्सा बन चुकी हैं।

9 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय

प्रदेश में 9 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह गठित किए जा चुके हैं। 63,519 ग्राम संगठन और 3272 संकुल स्तरीय संघ सक्रिय हैं, जिनसे 99 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। लखपति महिला योजना के अंतर्गत 18 लाख से अधिक महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। यह परिवर्तन केवल सरकारी योजना का परिणाम नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास और सामाजिक बदलाव का प्रमाण है।

लखपति दीदी योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को लघु उद्योग और स्वरोजगार के लिए चरणबद्ध, ब्याज मुक्त और आसान ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इससे महिलाएं बिना बड़े जोखिम के अपना कारोबार शुरू कर सकती हैं। यही वजह है कि प्रदेश में आत्मनिर्भर महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश की ये कहानियां बताती हैं कि जब अवसर, प्रशिक्षण और भरोसा मिलता है, तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता का नया मानक स्थापित कर सकती हैं। ‘लखपति दीदी’ अब केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव की सशक्त पहचान बन चुकी है।

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