
नई दिल्ली। देश भर के कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ग्राहकों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने नॉन-डोमेस्टिक पैक्ड LPG की सप्लाई को संकट से पहले के स्तर पर बहाल कर दिया है और इस पर लगी सभी सेक्टर-वाइज पाबंदियां हटा दी हैं। इस फैसले के बाद होटल, रेस्तरां, छोटे-बड़े उद्योगों और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सामान्य रूप से LPG उपलब्ध हो सकेगी।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद पैदा हुई आपूर्ति संबंधी चुनौतियों में अब सुधार हुआ है। मंत्रालय के अनुसार, क्षेत्रीय तनाव कम होने और सप्लाई चेन की स्थिति बेहतर होने के बाद LPG वितरण को सामान्य करने का फैसला लिया गया है।
सरकार के फैसले के बाद ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) अब युद्ध से पहले की तरह नॉन-डोमेस्टिक पैक्ड LPG की सामान्य सप्लाई करेंगी। इससे देशभर के कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं को ईंधन की उपलब्धता में सुधार देखने को मिलेगा और उनकी परिचालन संबंधी दिक्कतें कम होंगी।
सरकार ने बल्क LPG सप्लाई से जुड़ी पाबंदियों में भी ढील दी है। अब कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं को उनकी संकट-पूर्व खपत के स्तर का 50 प्रतिशत तक LPG उपलब्ध कराने की अनुमति दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इससे उद्योगों को अपना उत्पादन और व्यावसायिक गतिविधियां सामान्य रूप से शुरू करने में मदद मिलेगी।
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़े तनाव के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने की आशंका से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इसी स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत LPG की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई अस्थायी पाबंदियां लागू की थीं। सरकार का उद्देश्य घरेलू और आवश्यक जरूरतों के लिए LPG की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना था।
संकट के दौरान सरकार ने C3 और C4 जैसी गैसों का उपयोग मुख्य रूप से LPG उत्पादन तक सीमित कर दिया था ताकि बाजार में किसी प्रकार की कमी न आए। अब सप्लाई स्थिति बेहतर होने के बाद इन गैसों के उपयोग को अन्य उद्योगों के लिए भी अनुमति दी जा रही है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू जरूरतों और आवश्यक सेवाओं के लिए LPG उत्पादन प्रभावित नहीं होगा और इसकी उपलब्धता स्थिर बनी रहेगी।
सरकार ने कहा है कि एक तकनीकी संस्था यह तय करेगी कि C3 और C4 गैसों का कितना हिस्सा विभिन्न उद्योगों को दिया जाए। यह संस्था नियमित रूप से पेट्रोलियम मंत्रालय को रिपोर्ट भी सौंपेगी ताकि ईंधन आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बना रहे।
आपूर्ति व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सरकार सभी कमर्शियल और इंडस्ट्रियल LPG उपभोक्ताओं का एक सिंगल डेटाबेस तैयार करेगी। इससे भविष्य में सप्लाई प्लानिंग, निगरानी और वितरण को अधिक प्रभावी तरीके से संचालित किया जा सकेगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे ईंधन प्रबंधन में पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ेंगी।
सरकार अभी भी पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के उपयोग को बढ़ावा देने की अपनी नीति पर कायम है। मंत्रालय का मानना है कि PNG एक अधिक स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल ईंधन है। जो उपभोक्ता पहले से PNG का उपयोग कर रहे हैं, वे इसका इस्तेमाल जारी रखेंगे। इसके अलावा, जिन क्षेत्रों में PNG उपलब्ध है, वहां कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे LPG से PNG की ओर स्थानांतरित करने की योजना भी जारी रहेगी।
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