
Lucknow Gomti Riverfront Forest: लखनऊ की पहचान अब सिर्फ नवाबी विरासत और आधुनिक विकास तक सीमित नहीं रहने वाली। राजधानी में जल्द ही गोमती नदी के किनारे एक विशाल “रिवर फॉरेस्ट” विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। यह परियोजना पिपराघाट से लेकर शहीद पथ से पहले सरसवां क्षेत्र तक लगभग 300 एकड़ में फैलेगी और इसे राजधानी के सबसे बड़े पर्यावरणीय और पर्यटन प्रोजेक्ट्स में माना जा रहा है।
करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह रिवर फॉरेस्ट शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन का एक अनोखा मॉडल बनने की ओर बढ़ रहा है। खास बात यह है कि पूरे प्रोजेक्ट में प्राकृतिक पारिस्थितिकी को बिना नुकसान पहुंचाए विकास कार्य किए जाएंगे।
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इस परियोजना का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों को शहर के बीच प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। गोमती नदी के किनारे बनने वाला यह रिवर फॉरेस्ट लोगों के लिए घूमने, सैर करने और परिवार के साथ समय बिताने का नया केंद्र बन सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार परियोजना को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि नदी, जलजीवों और पक्षियों के प्राकृतिक आवास पर न्यूनतम असर पड़े।
रिवर फॉरेस्ट की सबसे खास बात इसका पर्यावरण अनुकूल डिजाइन है। पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जमीन पर निर्माण नहीं किया जाएगा। इसके बजाय करीब छह फीट ऊंचाई पर एलिवेटेड वॉक-वे और ट्रैक बनाए जाएंगे। इससे जंगल और नदी का प्राकृतिक संतुलन बना रहेगा और वन्य जीवों के आवागमन में बाधा नहीं आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भविष्य के शहरी जंगलों के लिए एक आधुनिक उदाहरण बन सकता है।
परियोजना में नदी किनारे किसी तरह की कंक्रीट बाउंड्री वॉल नहीं बनाई जाएगी। सुरक्षा के लिए केवल चेन लिंक फेंसिंग लगाने की योजना है, ताकि नदी का प्राकृतिक प्रवाह बना रहे और जलीय जीवों का संरक्षण हो सके। यहां मछलियों, कछुओं और अन्य जलजीवों के संरक्षण के लिए विशेष व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही नदी और आसपास के जल क्षेत्र को साफ रखने के लिए भी अलग सिस्टम तैयार किया जाएगा।
रिवर फॉरेस्ट को केवल हरित क्षेत्र नहीं, बल्कि फैमिली एंटरटेनमेंट और इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां कई आधुनिक सुविधाएं प्रस्तावित हैं, जिनमें:
जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा 3500 मीटर लंबी स्टील रेलिंग, कंट्रोल रूम, ट्रांसफॉर्मर और सुरक्षा व्यवस्थाएं भी विकसित की जाएंगी।
परियोजना के तहत बड़ी संख्या में फलदार और छायादार पेड़ लगाए जाएंगे। इनमें:
इसके अलावा अमलतास, गुलमोहर, अर्जुन, जारुल और विभिन्न मौसमों में खिलने वाले फूलों के पौधे भी लगाए जाएंगे। पक्षियों के भोजन और घोंसले के लिए उपयुक्त पौधों को प्राथमिकता देने की योजना है।
जानकारी के अनुसार गोमती रिवर रिवर फॉरेस्ट परियोजना का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। रक्षा मंत्रालय और छावनी परिषद से जुड़ी जमीन और बजट को लेकर भी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह परियोजना लखनऊ के सबसे बड़े पर्यटन और पर्यावरणीय आकर्षणों में शामिल हो सकती है। इससे न केवल शहर की हरियाली बढ़ेगी, बल्कि लोगों को स्वच्छ और प्राकृतिक सार्वजनिक स्थान भी मिल सकेंगे।
तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच ऐसे प्रोजेक्ट्स को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिवर फॉरेस्ट जैसी योजनाएं शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को प्रकृति से जोड़ने का काम भी करती हैं। यदि यह परियोजना तय समय और योजना के अनुसार पूरी होती है, तो गोमती किनारा आने वाले समय में लखनऊ का नया “ग्रीन लैंडमार्क” बन सकता है।
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