
भोपाल। CM मोहन यादव ने वर्तमान में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान मंगलवार को सदन में किसान कल्याण वर्ष को लेकर सरकार की स्पष्ट मंशा और अब तक की गई कार्यवाहियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आज ही मध्यप्रदेश सरकार की मंत्रि-परिषद् की बैठक आयोजित की गई, जिसे पूरी तरह प्रदेश के किसानों को समर्पित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और राज्य सरकार उनके विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मंत्रि-परिषद् ने लगभग 10,500 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच प्रमुख किसान हितैषी योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक, यानी 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों और कृषि से जुड़े क्षेत्रों को मजबूत बनाना है, जिससे प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। इन योजनाओं से किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और कृषि उत्पादन, सिंचाई, प्राकृतिक खेती तथा तिलहन उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने दलहन फसल उड़द और तिलहन फसल सरसों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि राज्य में इस वर्ष सरसों का उत्पादन लगभग 28 प्रतिशत बढ़ा है और करीब 3.38 मीट्रिक टन उत्पादन होने की संभावना है। सरसों की फसल को भावांतर योजना के दायरे में भी शामिल किया जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके।
इस योजना के तहत 2008.683 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इससे कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के विकास के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। राज्य सरकार के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इस योजना के लिए 2393.97 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इसके तहत किसानों को स्प्रिंकलर और ड्रिप इरीगेशन सिस्टम लगाने के लिए शासकीय अनुदान 31 मार्च 2031 तक मिलता रहेगा। इससे माइक्रो इरीगेशन सुविधाओं का विस्तार होगा और जल संरक्षण के साथ उत्पादन में वृद्धि होगी।
3285.49 करोड़ रुपये की इस योजना से धान, गेहूं, दलहन, मोटा अनाज और नगदी फसलों की पैदावार करने वाले किसानों को निरंतर सहयोग मिलता रहेगा। इस योजना का उद्देश्य क्षेत्र विस्तार, उत्पादन वृद्धि और मिट्टी की उर्वरता में सुधार करना है।
इस योजना के लिए 1011.59 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है और इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी, उत्पादन बढ़ेगा तथा रसायन मुक्त खाद्य उपलब्ध होगा।
1793.87 करोड़ रुपये की इस योजना से तिलहन फसलों का उत्पादन करने वाले किसानों को लाभ मिलेगा। इससे प्रदेश में तेल उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में सुधार होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 10,500 करोड़ रुपये की इन पांच योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने से प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा सुधार होगा। साथ ही रसायन युक्त खेती से मुक्ति और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में भी ये योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने दोहराया कि किसान कल्याण वर्ष के तहत सरकार किसानों को अधिकतम लाभ दिलाने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है।
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