
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बड़वानी जिले के भीलट बाबा देवस्थल, नागलवाड़ी में सोमवार को किसान कल्याण वर्ष की पहली कृषि कैबिनेट आयोजित हुई। इस बैठक में कृषि, सिंचाई, पशुपालन, मत्स्य, उद्यानिकी और सहकारिता से जुड़ी कुल 27,500 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें से 25,678 करोड़ रुपये की योजनाएं सीधे किसानों और उत्पादक गतिविधियों से जुड़े लोगों के हित में हैं। स्वीकृत राशि अगले पांच वर्षों में खर्च की जाएगी।
कृषि कैबिनेट के साथ नर्मदा नियंत्रण मंडल की बैठक भी हुई। इसमें बड़वानी जिले की दो बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को 2,067.97 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई।
इस योजना के तहत नर्मदा नदी से 51.42 एमसीएम पानी उठाकर वरला तहसील के 33 गांवों की 15,500 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की जाएगी। परियोजना की लागत 860.53 करोड़ रुपये है।
इस परियोजना में नर्मदा नदी से 74.65 एमसीएम पानी उठाकर पानसेमल तहसील के 53 गांवों की 22,500 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इसकी लागत 1,207.44 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं से अल्प वर्षा वाले क्षेत्रों में भूजल स्तर बढ़ेगा और किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी।
मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 को स्वीकृति दी। इस नीति के तहत अगले तीन वर्षों में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा और लगभग 20,000 रोजगार (10,000 प्रत्यक्ष और 10,000 अप्रत्यक्ष) सृजित होंगे। इस नीति के लिए 18 करोड़ 50 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसमें केज कल्चर को आधुनिक रूप में बढ़ावा देकर लगभग एक लाख केज स्थापित किए जाएंगे। साथ ही मत्स्य पालन के साथ ईको-टूरिज्म और ग्रीन एनर्जी को जोड़कर बहुउद्देशीय आजीविका मॉडल विकसित किया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सालयों और भवनों के विकास के साथ पशुओं के स्वास्थ्य देखभाल के लिए 610 करोड़ 51 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। यह कार्य वर्ष 2026 से 2031 तक लगातार जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना को वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए जारी रखने हेतु 200 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। योजना के तहत मत्स्य बीज संवर्धन, प्रशिक्षण, ब्याज अनुदान और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।
राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए 1,150 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। इससे कृषि क्षेत्र में दक्षता बढ़ेगी, उत्पादन क्षमता मजबूत होगी और योजनाओं के दोहराव से बचाव होगा।
सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 1,375 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। केंद्र और राज्य सरकार की भागीदारी से मौजूदा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का उन्नयन और नई इकाइयों की स्थापना की जाएगी।
उच्च गुणवत्ता की पौध और बीज रियायती दरों पर उपलब्ध कराने के लिए पौधशाला उद्यान योजना को 2031 तक जारी रखते हुए 1,739 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
500 करोड़ से कम लागत वाली 20 परियोजनाओं को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 3,502 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
सहकारिता विभाग की इस योजना को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 1,975 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। जिला बैंकों के माध्यम से किसानों को फसल ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
किसानों को 3 लाख रुपये तक शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन फसल ऋण देने की योजना को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 3,909 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
सहकारी संस्थाओं को अंशपूंजी, ऋण और अनुदान उपलब्ध कराने के लिए 12 योजनाओं को 2031 तक जारी रखते हुए 1,073 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
कृषि क्षेत्र में सहकारिता विभाग की विभिन्न योजनाओं के संचालन और मॉनिटरिंग के लिए 1,229 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत सॉर्टेड सेक्स्ड सीमेन उत्पादन परियोजना को 2031 तक जारी रखने के लिए 656 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे बेहतर नस्ल के पशुधन को बढ़ावा मिलेगा।
पशु स्वास्थ्य रक्षा और पशु संवर्धन की 14 योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए 1,723 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
पशु प्रजनन, टीकाकरण, मुर्गी पालन, भेड़-बकरी विकास और रोग उन्मूलन जैसी 11 योजनाओं को 2031 तक जारी रखने के लिए 6,518 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। किसान कल्याण वर्ष की यह पहली कृषि कैबिनेट थी। आगे प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कृषि कैबिनेट आयोजित कर किसान हित में और निर्णय लिए जाएंगे। बैठक के दौरान मंत्रि-परिषद के सदस्यों ने जनजातीय परंपरागत वेशभूषा पहनकर जनजातीय समाज के सम्मान और कल्याण का संदेश भी दिया।
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