
भोपाल। मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में राज्य सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं और विभिन्न विभागों की परियोजनाओं को आगामी पाँच वर्षों तक जारी रखने के लिए लगभग 33,240 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। इसके साथ ही कई नई योजनाओं और पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई।
मंत्रि-परिषद ने "मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम" को भी मंजूरी प्रदान की। इस योजना को अगले 3 वर्षों तक लागू करने के लिए लगभग 190 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। लोक सेवा प्रबंधन विभाग को इस योजना के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं तय करने, नियम बनाने और दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार दिया गया है।
मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश वृत्तिकर अधिनियम 1995 के अंतर्गत निःशक्तजनों को मिलने वाली वृत्तिकर छूट को 31 मार्च 2030 तक जारी रखने की स्वीकृति दी है। इससे दिव्यांगजनों को आर्थिक राहत मिलती रहेगी।
राज्य सरकार ने एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) परियोजना के तहत चयनित 7 जिलों में पारंपरिक और विशिष्ट उत्पादों के संरक्षण, विकास और विपणन के लिए अगले पाँच वर्षों में 37.50 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इस योजना में शामिल प्रमुख उत्पाद इस प्रकार हैं-
इस परियोजना के माध्यम से स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और बुनकरों को प्रशिक्षण, डिजिटलीकरण, ब्रांडिंग, विपणन और बाजार उपलब्धता जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। इससे स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
मंत्रि-परिषद ने चितरंगी (जिला सिंगरौली) में व्यवहार न्यायालय की स्थापना के लिए एक कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश का नया पद सृजित करने की मंजूरी दी है। इसके साथ ही न्यायालय के कार्यालयीन कार्यों के लिए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के 6 पद भी बनाए जाएंगे। इस तरह कुल 7 नए पदों के सृजन को स्वीकृति मिली है।
मंत्रि-परिषद ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के अंतर्गत मैहर (जिला मैहर), कैमोर (जिला कटनी), निमरानी (जिला खरगोन) में 3 नए औषधालय खोलने और चिकित्सक तथा पैरामेडिकल स्टाफ के 51 पदों के सृजन को मंजूरी दी है। इन औषधालयों से 15,686 पंजीकृत श्रमिकों और उनके लगभग 62,744 आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।
मंत्रि-परिषद ने रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के अंतर्गत वितरण अधोसंरचना को मजबूत करने और बिजली हानियों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत केंद्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि वितरण कंपनियों को अनुदान के बजाय अंशपूंजी के रूप में दी जाएगी। नवंबर 2024 तक इस योजना के अंतर्गत 887 करोड़ 91 लाख रुपये की राशि को राज्य सरकार द्वारा वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में देने की मंजूरी दी गई है।
मंत्रि-परिषद ने वित्त विभाग के अंतर्गत चल रहे लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों और परियोजनाओं को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 63 करोड़ 76 लाख रुपये की स्वीकृति दी है।
मंत्रि-परिषद ने खनिज अधिभार रक्षित निधि योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 6090 करोड़ 12 लाख रुपये मंजूर किए हैं। इस राशि का उपयोग इन कार्यों के लिए किया जायेगा-
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 7,127 करोड़ 38 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके अंतर्गत-
मंत्रि-परिषद ने योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय की 10 प्रमुख योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 2,064 करोड़ 62 लाख रुपये की मंजूरी दी है। इन योजनाओं में राज्य नीति आयोग, योजनाओं की मॉनिटरिंग, नवाचार, सांसद एवं विधायक स्वेच्छानुदान निधि, बुंदेलखंड, महाकौशल और विंध्य विकास प्राधिकरण सहित अन्य विकास कार्यक्रम शामिल हैं।
जनजातीय कार्य विभाग की योजनाओं को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 1,645 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसमें शामिल हैं-
महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 3,773 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसमें इन गतिविधियों के संचालन के लिए राशि दी जाएगी
मंत्रि-परिषद ने एमएसएमई विभाग की योजनाओं को जारी रखने के लिए 11,361 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इसके अंतर्गत इन कार्यों के लिए 10,041 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं-
साथ ही मध्यप्रदेश स्टार्टअप नीति 2022 के तहत स्टार्टअप को निवेश, ऋण, पेटेंट, लीज रेंट और आयोजनों में भागीदारी के लिए 589 करोड़ रुपये और उद्योग संचालनालय व जिला उद्योग केंद्रों के विकास के लिए 742 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
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