‘मम्मी-पापा, खुश रहना…’ NEET छात्र ने मौत से पहले लिखा ऐसा संदेश, पढ़कर टूट गया परिवार

Published : Aug 20, 2026, 10:32 PM IST
Maharashtra NEET Aspirant Death 19 Year Old Student Leaves Emotional Note for Parents

सार

Maharashtra NEET Student Death: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में 19 वर्षीय NEET अभ्यर्थी सूरज सुबाष शिंदे की मौत से परिवार सदमे में है। वह मेडिकल कॉलेज में दाखिले की तैयारी कर रहा था। परिवार को एक भावुक नोट मिला, जिसमें डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रहने की बात कही गई।

मेडिकल कॉलेज में दाखिले का सपना लिए 19 साल का सूरज सुबाष शिंदे पढ़ाई में जुटा था। परिवार के मुताबिक, वह NEET जैसी बेहद प्रतिस्पर्धी परीक्षा की तैयारी कर रहा था। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में उसके घर से उसका शव मिलने के बाद परिवार में मातम पसर गया। शुरुआती जानकारी में पढ़ाई और भविष्य को लेकर तनाव की आशंका जताई जा रही है। घटना वैजापुर तहसील के खंडाला गांव की बताई जा रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और मौत के पीछे की परिस्थितियों को समझने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों और परिजनों से मिली जानकारी को देखा जा रहा है।

पढ़ाई के लिए ऊपर के कमरे में गया था सूरज

बताया गया है कि सूरज आम दिनों की तरह घर के ऊपरी हिस्से में बने कमरे में NEET की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान कथित तौर पर उसने अपनी जान ले ली। घटना के बाद परिवार को एक भावुक दो लाइन का नोट भी मिला। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोट में माता-पिता से माफी मांगते हुए सूरज ने लिखा कि वह अगले जन्म में उनके लिए डॉक्टर जरूर बनेगा। उसने माता-पिता से अपना ख्याल रखने और खुश रहने की अपील भी की थी। इस नोट के सामने आने के बाद परिवार के लिए यह समझना और भी मुश्किल हो गया कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा उनका बेटा किस मानसिक दबाव से गुजर रहा था।

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NEET जैसी परीक्षा का दबाव कितना गंभीर?

NEET-UG देश की सबसे प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की तैयारी करने वाले लाखों विद्यार्थी लंबे समय तक पढ़ाई, टेस्ट सीरीज और परीक्षा परिणाम को लेकर दबाव में रहते हैं। हालांकि, सूरज की मौत का वास्तविक कारण क्या था, इसे केवल शुरुआती जानकारी के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। पढ़ाई और भविष्य को लेकर तनाव की बात सामने आई है, लेकिन पुलिस जांच से ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। ऐसी घटनाएं यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर बेहतर शैक्षणिक सहयोग के साथ मानसिक और भावनात्मक सहारे की जरूरत कितनी महत्वपूर्ण है।

NEET को लेकर पहले भी उठे हैं गंभीर सवाल

NEET-UG परीक्षा को लेकर पिछले वर्षों में पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विवाद सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन आरोपों की जांच और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार ने विभिन्न स्तरों पर कदम उठाए हैं।

शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा प्रक्रिया में सुधार, डेटा सुरक्षा और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली से जुड़े सुझावों के लिए राधाकृष्णन समिति का गठन किया था। इसके अलावा प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में संरचनात्मक सुधारों को लेकर एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स भी बनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी NTA को जरूरी बुनियादी ढांचे, कर्मचारियों और तकनीकी क्षमता से मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। पेपर लीक से जुड़े आरोपों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई है।

सिर्फ परीक्षा नहीं, बच्चों के सपने भी महत्वपूर्ण

सूरज के मामले में जांच का नतीजा आने में अभी समय लग सकता है, लेकिन उसकी कहानी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों परिवारों के सामने एक बड़ा सवाल छोड़ती है। डॉक्टर बनने की चाह रखने वाले विद्यार्थियों के लिए परीक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी भी परीक्षा का परिणाम जीवन से बड़ा नहीं हो सकता।

परिवार, शिक्षक और कोचिंग संस्थानों की भूमिका सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रह सकती। लगातार दबाव में रहने वाले विद्यार्थियों से खुलकर बातचीत करना और जरूरत पड़ने पर योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेना भी उतना ही जरूरी है। सूरज के मामले में पुलिस की जांच और अन्य आधिकारिक जानकारी से ही मौत की परिस्थितियों पर अंतिम निष्कर्ष निकलेगा। फिलहाल परिवार ने एक बेटे को खोया है, जो डॉक्टर बनने का सपना लेकर पढ़ रहा था।

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