
कोल्हापुर: महाराष्ट्र के सतारा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई है। यहां एक फौजी अपनी गर्भवती पत्नी की देखभाल और डिलीवरी के वक्त साथ रहने के लिए छुट्टी पर आया था, लेकिन एक सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई। बच्चे के जन्म से कुछ ही पल पहले फौजी की मौत से पूरे गांव में मातम पसर गया है। शुक्रवार रात को भारतीय सेना के हवलदार प्रमोद जाधव की सतारा शहर में एक सड़क हादसे में मौत हो गई, और उसके कुछ ही देर बाद उनकी पत्नी ने एक निजी नर्सिंग होम में एक बेटी को जन्म दिया।
फौजी प्रमोद जाधव लद्दाख के लेह में भारतीय सेना में तैनात थे। कुछ हफ्ते पहले ही वह अपनी गर्भवती पत्नी ऋतुजा की देखभाल के लिए सतारा जिले के अपने गांव डेरे टर्फ आरे लौटे थे। शुक्रवार को ऋतुजा को डिलीवरी के लिए सतारा के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। शाम को जब प्रमोद जाधव घर से उनका सामान लेने जा रहे थे, तभी उनकी बाइक को बाजार से सब्जियां ले जा रहे एक मिनी ट्रक ने टक्कर मार दी। पुलिस ने बताया कि हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
शाहूपुरी पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर सचिन मेत्रे ने कहा, "सैनिक प्रमोद जाधव सतारा के नर्सिंग होम में अकेले बाइक पर लौट रहे थे। इस दौरान, वाडेगांव फाटा में बाजारों में सब्जियां ले जा रहे एक मिनी ट्रक ने अचानक उनके सामने आकर टक्कर मार दी। वहां मौजूद लोगों ने तुरंत प्रमोद को अस्पताल पहुंचाया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हमने मिनी ट्रक के ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है और वाहन को जब्त कर लिया है। हादसा शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे हुआ। शायद जवान और मिनी ट्रक का ड्राइवर दोनों जल्दी में थे, और यही हादसे का कारण बना होगा।"
इधर, जाधव के रिश्तेदारों और दोस्तों ने इस हादसे के बारे में तुरंत ऋतुजा को नहीं बताने का फैसला किया। लेकिन जाधव ने वापस आने का वादा किया था, इसलिए वह बार-बार अपने पति के बारे में पूछती रहीं। पूरी रात चिंता में गुजारने के बाद उन्होंने शनिवार तड़के एक बेटी को जन्म दिया। इसके बाद ही रिश्तेदारों ने उन्हें हादसे की जानकारी दी। इस सदमे के बावजूद, वह अपनी नवजात बेटी के साथ स्ट्रेचर पर ही अपने गांव के मैदान में पहुंचीं और पति के अंतिम दर्शन किए। साथ ही, बच्ची को पहली और आखिरी बार उसके निर्जीव पड़े पिता का चेहरा दिखाया गया। यह पल इतना भावुक था कि हर किसी की आंखें नम हो गईं। वहां मौजूद सभी लोग किस्मत को कोसते हुए रो पड़े। प्रमोद जाधव का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया।
प्रमोद जाधव अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और उनकी मां का एक साल पहले ही निधन हो गया था। प्रमोद 2014 में सेना में शामिल हुए थे और उन्होंने अपनी तीनों बहनों की शादी कराने के बाद खुद शादी की थी। लेकिन एक खूबसूरत जिंदगी का सपना देखने वाले प्रमोद जाधव की जिंदगी में किस्मत ने कुछ और ही लिख रखा था।
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