
पश्चिम बंगाल के 2026 विधानसभा चुनाव ने राज्य की राजनीति में एक बड़ा मोड़ लाते हुए लंबे समय से कायम सत्ता संतुलन को बदल दिया। 15 साल के शासन के बाद स्वाभाविक बदलाव की चाह, RG Kar कांड और भर्ती घोटाले जैसे मुद्दों ने जनता के भरोसे को गहरा झटका दिया। संदेशखाली की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, वहीं ‘भतीजा मॉडल’ की आलोचना ने नेतृत्व की छवि को प्रभावित किया। इसके साथ ही अल्पसंख्यक वोट बैंक में दरार, मतुआ समुदाय का रुझान और कोलकाता के मिडिल क्लास का साइलेंट लेकिन निर्णायक रुख चुनावी समीकरण बदल गया। चुनावी प्रक्रिया पर कड़े नियंत्रण और कुछ विवादित घटनाओं ने माहौल को और जटिल बनाया, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिला और ममता बनर्जी को करारी हार का सामना करना पड़ा।