Mecca Pact: पहली बार सऊदी में सैनिकों की तैनाती, पाकिस्तान ने भी मौजूदगी मानी, तुर्की भी साथ

Published : Oct 08, 2026, 11:45 AM IST
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सार

Mecca Pact: मक्का रक्षा समझौते की पहली बड़ी परीक्षा के बीच पाकिस्तान ने पुष्टि की है कि उसके सैनिक पहले से सऊदी अरब में मौजूद हैं। हूती हमलों के बीच तुर्की भी रियाद को एयर डिफेंस, ड्रोन, खुफिया और लॉजिस्टिक मदद दे रहा है। जानें पूरा मामला।

Mecca Defence Pact: मध्य पूर्व में लगातार गहराते भू-राजनीतिक संकट के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की पहली बड़ी परीक्षा शुरू हो गई है। हाल ही में हुए इस अहम समझौते के तहत पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से पुष्टि कर दी है कि उसके सैनिक पहले से ही सऊदी अरब की धरती पर तैनात हैं। वहीं दूसरी ओर, तुर्की भी यमन के ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों के लगातार बढ़ते हमलों के बीच सऊदी अरब को महत्वपूर्ण रक्षात्मक और तकनीकी सहायता मुहैया करा रहा है।

Mecca Pact: तीन देशों ने क्या समझौता किया?

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने अगस्त में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला बाकी दोनों पर हमला माना जाएगा। 5 अक्टूबर को रियाद में हुई आपात बैठक के बाद तीनों देशों ने समझौते को जमीन पर लागू करने और सऊदी अरब में सैन्य क्षमताओं की तेजी से तैनाती की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई।

मक्का रक्षा समझौते की पहली बड़ी परीक्षा

बीते 7 अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने मिलकर ऐतिहासिक 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के नियमों के मुताबिक, यदि किसी एक सदस्य देश पर भी कोई सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। हाल ही में रियाद में हुई आपातकालीन बैठक में तीनों देशों ने इस सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धता को तुरंत जमीन पर उतारने और सऊदी अरब में सैन्य बलों की तेजी से तैनाती सुनिश्चित करने पर सहमति जताई थी।

Pakistan Army in Saudi Arabia: पहले से तैनात हैं सैनिक

पाकिस्तानी सेना के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने CNN को बताया कि पाकिस्तानी सैन्यकर्मी पहले से ही सऊदी अरब में मौजूद हैं। उन्होंने साफ किया कि यह तैनाती नए गठबंधन से पहले की है और इसमें अलग-अलग क्षमताएं व क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि पाकिस्तान ने अभी यह नहीं बताया है कि सऊदी अरब में कितने सैनिक हैं और उनकी सटीक जिम्मेदारियां क्या हैं। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सैन्य सहयोग कई दशकों पुराना है। पाकिस्तानी कर्मी पहले भी प्रशिक्षण, सलाह और दूसरे रक्षा सहयोग के लिए वहां तैनात रहे हैं।

Houthi Attack Saudi Arabia: तुर्की की डिफेंस हेल्प और हूथी विद्रोहियों का बढ़ता दबाव

दूसरी तरफ, रॉयटर्स के मुताबिक तुर्की भी सऊदी अरब को कूटनीतिक और रक्षात्मक मोर्चे पर मजबूत कर रहा है। रियाद को लगातार मिल रही ड्रोन और मिसाइल हमलों की धमकियों के बीच तुर्की अपनी वायु रक्षा प्रणालियां, ड्रोन ऑपरेटर और लॉजिस्टिकल सपोर्ट सऊदी सरकार को दे रहा है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में तेज हुआ है जब यमन के हूथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर और तेल प्रतिष्ठानों पर हमले बढ़ा दिए हैं। सितंबर में हूथियों द्वारा नए हमले किए जाने के बाद सऊदी समर्थित यमनी बलों ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। ऐसे में नाटो की दूसरी सबसे बड़ी सेना वाले देश तुर्की, परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान और सऊदी अरब का यह नया रक्षा गठबंधन मध्य पूर्व के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।

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