
Modi Governance 25 Years: 7 अक्टूबर 2026, बुधवार को नरेंद्र मोदी किसी निर्वाचित सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे कर रहे हैं। इनमें करीब साढ़े 12 साल गुजरात और इतने ही समय केंद्र की सत्ता में बीते। इस दौरान उन्होंने जो भी चुनाव लड़ा, उसमें हार नहीं देखी। लेकिन असली सवाल सिर्फ इतने लंबे समय तक सत्ता में रहने का नहीं है। सवाल यह है कि उन्होंने भारत में ऐसे कौन से बदलाव किए हैं, जो उनके बाद भी कायम रहेंगे? इतिहास गवाह है कि बड़े नेता रिकॉर्ड नहीं, बल्कि ऐसे सिद्धांत छोड़ते हैं जिन्हें भविष्य में विरोधी भी मानने को मजबूर हो जाते हैं। आइए जानते हैं उनके इन 25 सालों के सफर और बड़े बदलावों के मायने:
मोदी मॉडल की पहली खासियत काम को पूरा करने का दावा है। पारंपरिक राजनीति में योजनाओं को अधूरा छोड़ने की आदत रही है, लेकिन मोदी की शैली इसके उलट है। चाहे गुजरात में पानी की किल्लत दूर करना हो, देश भर में 59 करोड़ से ज़्यादा जन धन खाते खोलना हो, 2019 में आर्टिकल 370 को हमेशा के लिए हटाना हो या मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को लगभग खत्म करना हो-हर काम को सौ फीसदी मुकाम तक पहुंचाया गया है। राम मंदिर निर्माण इसका एक बड़ा उदाहरण है,जो राजनीतिक और सांस्कृतिक बदलाव का हिस्सा माना जाता है।
दूसरा बदलाव भारत के आत्मविश्वास में दिखाई देता है। निजी अंतरिक्ष क्षेत्र, डिजिटल पेमेंट और परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी जैसे कदम बताते हैं कि भारत अब पश्चिम की तकनीक और नीतियों का सिर्फ अनुसरण करने के बजाय अपनी क्षमता पर जोर दे रहा है। पहलगाम के बाद पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को भी इसी बदले हुए आत्मविश्वास के उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है।
“To me, the highest expression of democracy is when the person at the very bottom can make their voice reach the government.” - Narendra Modi
In 2001 @narendramodi took oath as the Chief Minister of Gujarat, and with him he brought a blueprint born not in administrative corridors, but at the grassroots.
Long before they became sweeping national movements, the defining ideas of India's growth story were seed policies planted in the soil of Gujarat.
On 7th October 2026, Prime Minister Narendra Modi completes 25 unbroken years in governance...Jan Seva Se Desh Seva... the journey continues…
#25YearsOfSeva
— Modi Archive (@modiarchive) October 7, 2026
दशकों तक भारत रक्षा, अंतरिक्ष और तकनीक के मामले में पश्चिमी देशों के भरोसे रहता था। लेकिन अब श्रीहरिकोटा से निजी रॉकेट लॉन्च होते हैं, परमाणु ऊर्जा को निजी पूंजी के लिए खोला गया है और डिजिटल भुगतान के लिए यूपीआई क्रांति पूरी दुनिया देख रही है। इसके अलावा, राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में कड़े फैसले लेने से भी सरकार पीछे नहीं हटी है।
कोरोना महामारी के दौरान भारत ने वैक्सीन निर्माण और टीकाकरण में बड़े पैमाने पर काम किया। जनवरी 2021 से शुरू हुए टीकाकरण अभियान में बाद में 220 करोड़ से ज्यादा डोज दी गईं। आज देश की एक पूरी पीढ़ी विश्व-स्तरीय पैमाने को ही मानक मानती है। यही सोच अब रेलवे, एयरपोर्ट, स्मार्टफोन और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी दिखाई देती है-भारत को वैश्विक मानकों से कम कुछ स्वीकार नहीं करना चाहिए।
मोदी युग का एक और असर चुनावी राजनीति पर दिखता है। अब चुनाव सिर्फ पहचान या जाति के नाम पर नहीं जीते जा सकते, हर पार्टी को 'गारंटी' और काम करके दिखाना पड़ता है। इसके साथ ही, देश की सनातन विरासत और संस्कृति पर गर्व करने की जो शुरुआत हुई है, उसने राष्ट्रीय आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। गरीबों और महिलाओं के सशक्तिकरण ने शासन के पुराने तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है।
घर, शौचालय, गैस, बिना गारंटी के ऋण और स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाओं के जरिए गरीबों तक सीधे लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया। सरकार के अनुसार करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले। महिलाओं के लिए 'लखपति दीदी' जैसे अभियानों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की कोशिशों ने भी नया विमर्श बनाया। आखिर में सवाल यही है-क्या ये बदलाव मोदी के बाद भी भारत के राजनीतिक और सामाजिक मानक बने रहेंगे? अगर आने वाली सरकारें भी इन्हीं लक्ष्यों को आगे बढ़ाती हैं, तो मोदी के 25 साल सिर्फ सत्ता का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति की दिशा बदलने वाला दौर माने जाएंगे।
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