
ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। इस बीच सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि मौजूदा सुप्रीम लीडर और उनके बेटे मुज्तबा खामेनेई इस समारोह में शामिल नहीं होंगे। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, यह फैसला सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर लिया गया है। माना जा रहा है कि क्षेत्र में जारी तनाव और संभावित सुरक्षा खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
ईरानी सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अयातुल्लाह हकीम इलाही के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, मुज्तबा खामेनेई को अंतिम संस्कार में शामिल न होने की सलाह दी गई है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरानी सुरक्षा एजेंसियों को संभावित हमले की आशंका है। इसलिए सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया गया।
प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ शांति समझौते के बावजूद दोनों देशों के बीच भरोसे का संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। वहीं, इजरायल के साथ तनाव भी जारी है। ऐसे में अंतिम संस्कार समारोह के दौरान किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जाएगा।
ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने बताया कि अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। देश की सीमाओं पर अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की गई है, जबकि एयर डिफेंस सिस्टम पूरे हवाई क्षेत्र पर लगातार नजर रखेगा। विदेशी उड़ानों की भी विशेष निगरानी की जाएगी ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
सरकार का कहना है कि अंतिम संस्कार में ईरान के साथ-साथ दुनिया के कई देशों से प्रतिनिधियों के पहुंचने की संभावना है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत किया गया है।
अयातुल्ला अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद शहर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा, जबकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया 4 जुलाई से शुरू होगी। भारत सरकार की ओर से विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन इस समारोह में शामिल होंगे।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को हुए मिसाइल हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। उसी हमले में मुज्तबा खामेनेई भी गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके बाद से वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। हालांकि उनकी गैरमौजूदगी को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब ईरानी पक्ष ने स्पष्ट किया है कि अंतिम संस्कार से दूर रहने का फैसला केवल सुरक्षा कारणों से लिया गया है।
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