रात 3:35 बजे के बाद आसमान पर रखें नजर, चांद के पास दिखाई देगा सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह

Published : Sep 08, 2026, 04:43 PM IST
Moon Jupiter Conjunction on September 9 2026 Timing and How to Watch in India

सार

9 सितंबर की भोर में चंद्रमा और बृहस्पति आसमान में बेहद करीब नजर आएंगे। दोनों के बीच दूरी एक डिग्री से भी कम होगी। जानिए 3:35 बजे के बाद इस खूबसूरत खगोलीय नजारे को भारत में कब और कैसे देख सकेंगे।

अगर आप रात के आसमान को निहारना पसंद करते हैं तो 9 सितंबर की भोर आपके लिए खास हो सकती है। 8 सितंबर की मध्यरात्रि के बाद चंद्रमा और सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति आसमान में एक-दूसरे के बेहद करीब नजर आएंगे। खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, दोनों के बीच दिखाई देने वाली आकाशीय दूरी एक डिग्री से भी कम होगी। खास बात यह है कि इस नजारे के लिए किसी महंगे उपकरण की जरूरत नहीं होगी।

रात 3:35 बजे के बाद पूर्वी आसमान पर रखें नजर

खगोलविद के मुताबिक, 8 सितंबर की रात करीब 3:35 बजे के बाद पूर्वी क्षितिज के ऊपर चंद्रमा और बृहस्पति दिखाई देने लगेंगे। भोर के समय पतले हंसिए जैसे चंद्रमा के पास चमकता बृहस्पति बेहद आकर्षक नजर आएगा। चंद्रमा करीब 8 से 10 प्रतिशत प्रकाशित होगा। साफ मौसम में दोनों को सामान्य आंखों से देखा जा सकेगा।

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असल में करोड़ों किलोमीटर दूर, फिर इतने पास क्यों दिखेंगे?

आसमान में पास-पास दिखने का मतलब यह नहीं है कि चंद्रमा और बृहस्पति वास्तव में करीब आ गए हैं। दोनों के बीच वास्तविक दूरी करोड़ों किलोमीटर है। पृथ्वी से देखने पर उनकी स्थिति एक खास कोण में आने के कारण वे बेहद नजदीक दिखाई देंगे। खगोल विज्ञान में ऐसी आकाशीय स्थिति को कंजंक्शन यानी युति कहा जाता है।

कुछ देशों में चंद्रमा बृहस्पति को ढकता भी दिखेगा

इस घटना का एक और दिलचस्प पहलू है। दुनिया के कुछ हिस्सों में चंद्रमा कुछ समय के लिए बृहस्पति को अपनी ओट में लेता हुआ दिखाई देगा। इसे लूनर ऑक्ल्टेशन कहा जाता है। हालांकि भारत से यह दृश्य दिखाई नहीं देगा। कनाडा, ग्रीनलैंड, अमेरिका, पूर्वी रूस और उत्तरी प्रशांत के कुछ इलाकों में इसे देखा जा सकेगा। इसे चंद्र ग्रहण समझना सही नहीं होगा।

भारत में नजारा देखने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

भारत में इस युति को देखने में बादल और शहरों की तेज रोशनी बाधा बन सकती है। इसलिए खुले और अपेक्षाकृत अंधेरे स्थान से पूर्वी दिशा में नजर रखना बेहतर रहेगा। दूरबीन या टेलीस्कोप हो तो दृश्य और स्पष्ट दिख सकता है, लेकिन इसकी जरूरत नहीं है। खगोलविद ने यह भी चेताया है कि किसी भी ऑप्टिकल उपकरण से सूर्य को बिना प्रमाणित सोलर फिल्टर के बिल्कुल न देखें, क्योंकि इससे आंखों को स्थायी नुकसान हो सकता है।

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