
धार (मध्य प्रदेश): बुधवार रात मध्य प्रदेश के धार जिले के लिए किसी काले साये की तरह आई। इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर चिकलिया फाटा के पास उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब मजदूरों से खचाखच भरी एक पिकअप गाड़ी मौत का तांडव करते हुए डिवाइडर फांदकर दूसरी ओर जा गिरी। यह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं था, बल्कि उन 16 परिवारों की उम्मीदों का अंत था जो मजदूरी कर अपने बच्चों का पेट पालने का सपना देख रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पिकअप वाहन (MP-11-G-7183) धार से मांगूद की ओर जा रहा था। गाड़ी की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक थी। चिकलिया फाटा पर स्थित जियो पेट्रोल पंप के पास अचानक पिकअप का अगला टायर जोरदार धमाके के साथ फट गया। चश्मदीद शुभम सिसोदिया बताते हैं, "धमाका इतना तेज था कि लगा जैसे कोई बम फटा हो। पिकअप अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ी और 3-4 बार हवा में गुलाटियां मारते हुए सड़क के दूसरी ओर से आ रही स्कॉर्पियो से जा टकराई।"
इस हादसे ने सबसे ज्यादा मासूमों को अपना निशाना बनाया। मृतकों में 6 बच्चे शामिल हैं। जब अस्पताल में 'ब्रॉट डेड' (मृत अवस्था में लाए गए) की सूची तैयार हो रही थी, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। 9 साल की तनु (पुत्री उमेश, निवासी नयापुरा) और किरण (पुत्री दिनेश, निवासी सेमलीपुरा) की मासूमियत को काल के क्रूर पंजों ने छीन लिया। 14-15 साल के सुमित (पिता नानूराम), आयुष (पिता राजेंद्र) और गोकुल (पिता कैलाश), जो शायद छुट्टियों में अपनों के साथ काम पर निकले थे, अब कभी घर नहीं लौटेंगे।
मृतकों में अधिकांश महिलाएं और युवा शामिल हैं, जो नयापुरा और सेमलीपुरा जैसे छोटे गांवों से ताल्लुक रखते थे। उनकी पहचान इस प्रकार हुई है:
ये महिलाएं और युवा अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ थे। आज इन गांवों में मातम पसरा है और हर घर से बस रोने की आवाजें आ रही हैं।
इंदौर संभाग के कमिश्नर डॉ. सुदाम खाड़े और केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने तत्काल जिला भोज अस्पताल का दौरा किया। कमिश्नर ने पुष्टि की कि गाड़ी में करीब 46 से 50 लोग सवार थे, जो क्षमता से कहीं अधिक है। गंभीर रूप से घायल 7 लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद इंदौर रेफर किया गया है, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम तैनात की गई है। जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञों और फ्रैक्चर सुविधाओं को अलर्ट पर रखा गया है।
हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने PMNRF से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भावुक संदेश जारी करते हुए मृतकों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये, गंभीर घायलों को 1 लाख और सामान्य घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों ने शुरुआती जांच में पाया है कि पिकअप में 35 की जगह करीब 50 मजदूर भरे हुए थे। ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार का जानलेवा कॉम्बिनेशन इस त्रासदी की मुख्य वजह बना। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर हाईवे पर गश्त और चेकिंग सख्त होती, तो शायद इन मासूमों की जान बच सकती थी। आज धार की सड़कों पर फैला खून साफ हो जाएगा, लेकिन उन मांओं की कोख और उन पिताओं का कंधा हमेशा के लिए सूना हो गया, जिनके कलेजे के टुकड़े इस हादसे की भेंट चढ़ गए।
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