
नई दिल्ली: नालसार (NALSAR) यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों के खिलाफ बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा जारी किए गए एक विवादित निर्देश पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने BCI की कार्रवाई पर गहरी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध करने का पूरा अधिकार है और इस मामले में BCI का हस्तक्षेप पूरी तरह गैर-जरूरी था।
रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ छात्रों ने यूनिवर्सिटी के उस कथित प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी, जिसमें CJI सूर्य कांत को आगामी दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाने की बात थी। छात्रों का अभियान जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े सुप्रीम कोर्ट मामले में CJI की कथित टिप्पणियों से भी जुड़ा था।
VIDEO | Supreme Court Bar Association (SCBA) President Vikas Singh on NALSAR controversy, says, "BCI chairman is behaving like the BCI is his personal property. Whenever he issues an order, letter or direction, he does not even refer to under which provision of the Act or… pic.twitter.com/9UlcUVR762
— Press Trust of India (@PTI_News) August 14, 2026
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचते ही CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने BCI की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए:
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि BCI या कोई भी राज्य बार काउंसिल किसी लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों या फैकल्टी के खिलाफ इस मामले में दंडात्मक कार्रवाई न करे। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने भी BCI की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या ऐसा प्रस्ताव पारित करने के लिए बाकायदा बैठक बुलाई गई थी।
हालांकि BCI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट जारी कर इस आदेश को वापस लेने और कार्यवाही बंद करने की घोषणा कर दी थी, लेकिन कोर्ट ने भविष्य की सुरक्षा के लिए मामले पर संज्ञान लिया। CJI सूर्य कांत ने नालसार के छात्रों के पेशेवर भविष्य को लेकर उन्हें पूरी तरह आश्वस्त किया। उन्होंने छात्रों को नामांकन प्रक्रिया आगे बढ़ाने और सुप्रीम कोर्ट बार में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही, उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे इन युवा वकीलों को कानूनी सहायता कार्यक्रमों के पैनल में शामिल करेंगे।
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