
NASA Telescope Reentry: अंतरिक्ष से धरती की ओर तेजी से बढ़ रही एक बड़ी चीज ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA का 22 साल पुराना टेलिस्कोप अब धरती के वायुमंडल में प्रवेश करने वाला है। करीब 1500 किलो वजनी इस टेलिस्कोप के वायुमंडल में पहुंचते ही तेज गर्मी के कारण जलकर नष्ट होने की संभावना है। हालांकि, इसके कुछ हिस्से धरती तक पहुंच सकते हैं। संभावित जगहों में भारत के बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई जैसे शहर भी शामिल हैं।
NASA ने साल 2004 में नील गेरेल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी (Neil Gehrels Swift Observatory) को अंतरिक्ष में लॉन्च किया था। इसे गामा-रे बर्स्ट, ब्लैक होल और ब्रह्मांड में होने वाली दूसरी शक्तिशाली घटनाओं का अध्ययन करने के लिए भेजा गया था। करीब 22 साल तक अंतरिक्ष में काम करने के बाद अब यह टेलिस्कोप धरती के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करने जा रहा है।
NASA के अनुमान के मुताबिक, यह टेलिस्कोप बुधवार सुबह 3:30 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच धरती के वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है। वायुमंडल में दाखिल होते ही हवा के साथ घर्षण से पैदा होने वाली तेज गर्मी के कारण इसका ज्यादातर हिस्सा जलकर नष्ट हो जाएगा। हालांकि, इसके कुछ मजबूत हिस्सों के बचकर धरती तक पहुंचने की आशंका है।
टेलिस्कोप के मलबे के संभावित क्षेत्रों में भारत के कई बड़े शहरों के नाम शामिल हैं। इनमें बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई प्रमुख हैं। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि मलबा किस जगह गिरेगा। इसका रास्ता इस बात पर निर्भर करेगा कि टेलिस्कोप धरती के वायुमंडल में किस स्थान से प्रवेश करता है। भारत के अलावा अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य व दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्से भी संभावित क्षेत्रों में हैं।
कुछ अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मानना है कि टेलिस्कोप का मलबा आबादी वाले इलाकों के बजाय समुद्र में गिर सकता है। हालांकि, इसकी पुष्टि तभी हो पाएगी जब टेलिस्कोप वायुमंडल में प्रवेश करेगा और उसका अंतिम रास्ता स्पष्ट होगा। ऐसे में फिलहाल किसी एक जगह को मलबा गिरने का निश्चित स्थान बताना सही नहीं होगा।
अंतरिक्ष में भेजे गए पुराने रॉकेट और सैटेलाइट का धरती पर वापस आना एक सामान्य प्रक्रिया है। भारत के पास भी ऐसी वस्तुओं पर नजर रखने के लिए निगरानी तंत्र मौजूद है। श्रीहरिकोटा में स्थापित मल्टी-ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग रडार (MOTR) अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं और उनके अंतिम कक्षीय चक्करों को ट्रैक करने में मदद करता है।
हालांकि, NASA के इस टेलिस्कोप को लेकर इसरो की ओर से अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यह स्पष्ट नहीं है कि इसरो इसकी गतिविधियों को ट्रैक कर रहा है या नहीं। इसी वजह से निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल विशेषज्ञों की नजर टेलिस्कोप की धरती पर वापसी और इसके मलबे के संभावित रास्ते पर बनी हुई है।
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