BIG REVEAL: धर्म बदलने का दबाव, यौन उत्पीड़न...नासिक में MNC ऑफिस का काला सच उजागर

Published : Apr 10, 2026, 04:33 PM IST
BIG REVEAL: धर्म बदलने का दबाव, यौन उत्पीड़न...नासिक में MNC ऑफिस का काला सच उजागर

सार

नाशिक की एक MNC में कई महिला कर्मचारियों ने सहकर्मियों पर यौन, मानसिक और धार्मिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पुलिस ने 9 FIR दर्ज कर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले का खुलासा एक अंडरकवर पुलिस ऑपरेशन से हुआ।

महाराष्ट्र के नासिक से ऑफिस में शोषण का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाली कई महिलाओं ने अपने सहकर्मियों और सीनियर स्टाफ पर यौन, मानसिक और धार्मिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और जांच अभी भी जारी है। इस मामले ने सबको चौंका दिया है क्योंकि आरोप बहुत बड़े पैमाने पर और लंबे समय से चल रहे थे।

 

 

कैसे हुआ मामले का खुलासा?

इस केस में एक नाटकीय मोड़ तब आया जब सात महिला पुलिस अधिकारी भेष बदलकर कंपनी में दाखिल हुईं। उन्होंने ऑफिस के अंदर एक मीटिंग में हिस्सा लिया और कथित तौर पर एक आरोपी को महिला कर्मचारियों के साथ गलत व्यवहार करते हुए देखा। अधिकारियों ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान आरोपी को 'रंगे हाथों' पकड़ा गया। इस अंडरकवर कार्रवाई से शिकायतों की पुष्टि करने में मदद मिली और कई गिरफ्तारियां हुईं। पुलिस अब पुख्ता सबूत जुटाने के लिए ऑफिस के अंदर के 40 से ज्यादा CCTV फुटेज क्लिप्स की जांच कर रही है।

 

कई शिकायतें और FIR दर्ज

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में कम से कम नौ FIR दर्ज की गई हैं। इनमें से आठ मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में और एक देवलाली पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई है। शिकायत करने वालों में ज्यादातर 18 से 25 साल की युवतियां हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह उत्पीड़न दो से तीन साल तक चलता रहा। इन मामलों में रेप, छेड़छाड़, गरिमा को ठेस पहुंचाने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

 

 

कौन हैं आरोपी?

मामले में जिन आरोपियों के नाम सामने आए हैं उनमें आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन और तौसीफ अत्तर शामिल हैं। इनमें से कुछ कंपनी में टीम लीडर या इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे थे। कंपनी के पुणे ऑफिस से जुड़ी एक महिला एचआर अधिकारी पर भी शिकायतों पर कार्रवाई न करने का मामला दर्ज किया गया है। अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर 10 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। एक आरोपी न्यायिक हिरासत में है।

आरोपों में क्या कहा गया है?

शिकायतों में गंभीर दुर्व्यवहार की एक पूरी कहानी सामने आई है। महिला कर्मचारियों ने पुरुषों पर उनके शरीर और कपड़ों को लेकर अश्लील कमेंट करने, उन्हें गलत तरीके से छूने और मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया है। सबसे गंभीर आरोपों में से एक रेप का है, जिसमें कहा गया है कि आरोपी ने शादी का वादा करके जबरन संबंध बनाए। कुछ पीड़ितों ने यह भी दावा किया है कि उनका पीछा किया गया, मीटिंग्स के दौरान उनका अपमान किया गया और उन्हें बार-बार ऑफिस में निशाना बनाया गया।

पीड़ितों द्वारा बताई गई घटनाएं

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने FIR में कई घटनाओं का जिक्र किया है। ये घटनाएं 2022 से 2026 के बीच की हैं। एक मामले में, एक महिला ने कहा कि उसके धर्म को लेकर उस पर टिप्पणी की गई और एक आरोपी ने शादी के झूठे वादे पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। एक अन्य मामले में, दो आरोपियों ने कथित तौर पर एक महिला की निजी जिंदगी को लेकर शर्मनाक कमेंट किए और शिकायत करने के बाद भी उसे गलत तरीके से छुआ। यह भी दावा किया गया है कि महिलाओं को अश्लील तरीके से घूरा जाता था, मीटिंग्स में उनका मज़ाक उड़ाया जाता था और शारीरिक निकटता के लिए दबाव डाला जाता था। कई मामलों में, आरोपियों पर दूसरों के सामने धार्मिक मान्यताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने का भी आरोप है।

धार्मिक दबाव के आरोप

कुछ सबसे परेशान करने वाले दावों में धार्मिक दबाव शामिल है। पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि उन्हें नमाज़ जैसे धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए मजबूर किया गया और उन पर अपना धर्म बदलने का दबाव डाला गया। यह भी दावा है कि कुछ महिलाओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध नॉन-वेज खाना खाने के लिए मजबूर किया गया। इसी से जुड़े एक दावे में, एक पुरुष कर्मचारी ने भी कहा है कि उस पर धर्म बदलने और कुछ धार्मिक प्रथाओं का पालन करने का दबाव डाला गया था। इन आरोपों ने मामले को और भी गंभीर बना दिया है।

अनदेखी की गई शिकायतों के दावे

कई कर्मचारियों ने पुलिस को बताया है कि उन्होंने पहले कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट में शिकायतें की थीं। हालांकि, उनका दावा है कि कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस ने एक बयान में कहा कि एक सीनियर अधिकारी ने शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों का ही साथ दिया। इसने ऑफिस की शिकायतों से निपटने के लिए कंपनी के आंतरिक सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेष जांच दल का गठन

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस टीम का नेतृत्व असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) संदीप मिटके कर रहे हैं और इसमें लगभग 12 अधिकारी शामिल हैं। SIT कॉल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और गवाहों के बयानों की जांच कर रही है। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या यह किसी बड़े संगठित पैटर्न का हिस्सा हो सकता है। पुलिस कमिश्नर संदीप कार्णिक ने विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। जांच अभी भी जारी है और और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना है। पुलिस आगे के सबूतों और सभी FIR की विस्तृत जांच का इंतजार कर रही है। अधिकारियों ने कहा है कि पीड़ितों की पहचान उनकी सुरक्षा के लिए गोपनीय रखी जा रही है। पुलिस ने अन्य पीड़ितों से भी आगे आने की अपील की है, अगर उन्हें इसी तरह के उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। उन्होंने ऐसे मामलों की रिपोर्ट करने के लिए एक व्हाट्सएप नंबर भी साझा किया है। आरोपियों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील बाबा सैयद ने कहा है कि ये आरोप एक साझा ऑफिस के माहौल में गलतफहमी के कारण हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि FIR की पूरी समीक्षा के बाद सच्चाई सामने आएगी।

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