
Nepal Flood 2026: नेपाल और तिब्बत की सीमा पर स्थिति उस वक्त बेकाबू हो गई जब एक विशाल ग्लेशियर टूट गया। इसके तुरंत बाद बर्फ और चट्टानों के भयावह हिमस्खलन (एवलांच) ने जन्म लिया। देखते ही देखते लेंडे नदी का प्राकृतिक बहाव रुक गया और फिर जब पानी का दबाव बढ़ा, तो मलबे और कीचड़ का एक ऐसा सैलाब नीचे की ओर भागा जिसने रास्ते में आने वाली हर चीज़ को निगल लिया। भोटे कोशी और त्रिशूली नदी प्रणाली के आसपास की बस्तियां चंद मिनटों में ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। इस तबाही में अब तक 469 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सीमा के दोनों तरफ 1,468 से अधिक लोग लापता हैं। नेपाल और तिब्बत के दूर-दराज़ इलाकों में फैली पूरी की पूरी बस्तियां कीचड़ की कई फीट मोटी परत के नीचे दफन हो चुकी हैं।
नेपाल पुलिस के मुताबिक प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टर और जमीन के रास्ते बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। अब तक सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन टूटी सड़कें, बह चुके पुल और जगह-जगह जमा मलबा राहत और तलाशी अभियान के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं। चितवन में सबसे अधिक शव बरामद किए गए हैं। रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, तनहुन और नवलपरासी जैसे इलाकों में भी मौतों की पुष्टि हुई है। कई गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया है और परिवार अस्पतालों तथा राहत केंद्रों में अपनों की तलाश कर रहे हैं।
लापता लोगों में सुरक्षा बलों के जवानों के अलावा जलविद्युत परियोजनाओं और कस्टम कार्यालयों में काम करने वाले लोग भी शामिल हैं। कई लोग ऐसे इलाकों में फंसे थे जहां बाढ़ के बाद सड़क और संचार व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। नेपाल के कई हिस्सों में बचाव दल ड्रोन, हेलीकॉप्टर और जमीनी टीमों की मदद से नदी किनारों, मलबे और अलग-थलग बस्तियों में तलाशी अभियान चला रहे हैं। लेकिन हर गुजरता घंटा लापता लोगों के परिवारों की चिंता बढ़ा रहा है।
इस आपदा की आंच भारत तक पहुंची है। विदेश मंत्रालय के अनुसार नेपाल के विभिन्न हिस्सों और परियोजनाओं में कार्यरत लगभग 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क टूट चुका है। इनमें जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी और पर्यटक शामिल हैं। भारत अब तक 84 नागरिकों को सुरक्षित निकाल चुका है। इनमें त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना के 63 कर्मचारी और तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं। तिब्बत की ओर फंसे करीब 200 भारतीय नागरिकों ने भी सुरक्षित निकलने में मदद मांगी है। भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री भी भेजी है। भारत सरकार ने 24 घंटे चलने वाला कंट्रोल रूम स्थापित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल सरकार को हरसंभव मानवीय सहायता का आश्वासन दिया है। अब तक 47.5 टन राहत सामग्री-जिसमें दवाएं, भोजन, सोलर लैंप और अस्थायी आश्रय शामिल हैं-नेपाल भेजी जा चुकी है।
नेपाल बाढ़: 472 लोगों की मौत, 1500 अभी भी लापता
290 भारतीयों की तलाश जारी, नेपाल ने विदेशी रेस्क्यू टीमों की मदद ठुकराई
सरकार ने भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों की रेस्क्यू मदद ठुकराई, नेपाल सेना व पुलिस की सलाह पर फैसला#Nepal #NepalTragedy #नेपालबाढ़ #tibetRescue pic.twitter.com/MF6XAUIGnS— Shailendra Singh (@Shailendra97S) August 28, 2026
रसुवा में फंसे 27 विदेशी पर्यटकों को भी बचाया गया है। इनमें 11 भारतीय, चार दक्षिण कोरियाई, दो इतालवी और दो अमेरिकी नागरिक शामिल थे। नेपाल सेना ने उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए काठमांडू पहुंचाया। कई भारतीय पर्यटक कैलाश मानसरोवर या नेपाल के धार्मिक और पर्यटन स्थलों की यात्रा पर थे। बाढ़ के कारण सड़क और परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसके चलते दिल्ली-काठमांडू बस सेवा भी अस्थायी रूप से प्रभावित हुई।
Nepal Flash Floods Update (1/2)
Nepalese Min of IT Bikram Timlisha:
Focus on rescuing the people alive.
Yesterday 1000+ people were rescued, including Indians.
Villages are swept away, so its difficult to determine how many people are missing right now.
On lake overflow… https://t.co/KOakXgiEqS pic.twitter.com/GQ5zmfK7Gk— India Strikes YT 🇮🇳 (@IndiaStrikes_) August 28, 2026
आपदा का पैमाना इतना व्यापक है कि सड़कों और कंक्रीट के दर्जनों पुलों के बह जाने से राहत टीमें प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रही हैं। सबसे भयावह स्थिति त्रिशूली जलविद्युत परियोजना के पास बनी, जहाँ लगभग 350 कर्मचारी एक सुरंग के भीतर फंस गए। नेपाली सेना के जवानों ने हेलिकॉप्टर से लटककर कीचड़ से ढकी ढलानों के रास्ते बेहद कठिन परिस्थिति में 63 भारतीय नागरिकों समेत कई सौ लोगों को बाहर निकाला। फिर भी, 100 से ज्यादा लोग अब भी सुरंग के अंधेरे में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
शुरुआत में इस घटना को भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन बाद के विश्लेषण में तस्वीर बदल गई। नेपाली अधिकारियों और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के विश्लेषण के मुताबिक तबाही की शुरुआत ग्लेशियर के ढहने और बर्फ-चट्टानों के मलबे के बहाव से हुई। मलबे ने नदी का रास्ता कुछ समय के लिए रोक दिया। इसके बाद जब प्राकृतिक रुकावट टूटी, तो पानी और मलबे का जबरदस्त बहाव भोटे कोशी और त्रिशूली नदी प्रणाली में नीचे की ओर फैल गया।
💔🇳🇵Terrifying footage shows a flash flood sweeping through the Nepal–Tibet border, trapping people on rooftops and balconies. At least 469 have been killed, with hundreds still missing.#nepal #viral #flood pic.twitter.com/MnMKqn84iK
— pradhyumn sharma (@pradhyu78651514) August 28, 2026
बाढ़ ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। दर्जनों मोटर योग्य पुल और सस्पेंशन ब्रिज क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि कई किलोमीटर सड़कें बह गई हैं। जलविद्युत परियोजनाएं भी बाढ़ की चपेट में आई हैं। त्रिशूली और देवीघाट सहित कई बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। इससे राहत और बचाव के साथ-साथ बिजली व्यवस्था को भी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
काठमांडू से लेकर चितवन तक अस्पतालों में परिवार अपने लापता रिश्तेदारों की तस्वीरें लेकर पहुंच रहे हैं। कुछ जगहों पर शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है। बचे हुए लोगों ने बताया कि कई इलाकों में कुछ ही मिनटों के भीतर घर, बाजार, खेत और सरकारी इमारतें पानी और मलबे में गायब हो गईं। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को अपनी आंखों के सामने बाढ़ में खो दिया।
खोज और बचाव अभियानों के बीच एक नया और अत्यंत गंभीर खतरा पैदा हो गया है। भोटे कोशी नदी प्रणाली के स्रोत के पास, तिब्बत के क्षेत्र में एक अस्थाई 'बैरियर झील' बन गई है। अनुमान है कि इसमें 20 लाख क्यूबिक मीटर से ज्यादा पानी जमा हो चुका है और आने वाले दिनों में यह आंकड़ा 50 लाख क्यूबिक मीटर तक पहुंच सकता है। यदि यह प्राकृतिक बांध टूटता है, तो निचले इलाकों में विनाश की दूसरी लहर आ सकती है। मौसम विभाग ने नदी किनारे रहने वाले समुदायों को तुरंत सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने की सख्त चेतावनी दी है।
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