
Nepal Flood Update: नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के चौथे दिन भी हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। नेपाल पुलिस के ताजा अपडेट के मुताबिक, इस आपदा में अब तक कम से कम 579 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन अब सबसे बड़ी चिंता एक और संभावित बाढ़ को लेकर पैदा हो गई है। बाढ़ प्रभावित इलाके में फिर से पानी और कीचड़ का स्तर बढ़ने की खबरों के बाद प्रशासन ने लोगों और रेस्क्यू टीमों को अलर्ट रहने को कहा है। इस बीच भारत-चीन सीमा के पास बनी एक नई झील और पानी के बहाव को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने रासुवा और मध्य नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। शुरुआत में मृतकों की संख्या कम बताई जा रही थी, लेकिन जैसे-जैसे दूरदराज के इलाकों से जानकारी मिली और रेस्क्यू टीमों को शव मिले, आंकड़ा तेजी से बढ़ता गया। प्रभावित इलाकों में सड़कें, पुल, घर और बिजली से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। राहत और बचाव अभियान को पहाड़ी इलाकों में टूटी सड़कों और संचार व्यवस्था में आई दिक्कतों के कारण बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। रेड क्रॉस के अनुसार, इस आपदा से 90,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।
आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि भोटेकोशी नदी क्षेत्र में पानी और कीचड़ का स्तर फिर बढ़ता दिखाई दिया है। इससे नीचे की ओर एक और तेज जलप्रवाह आने की आशंका पैदा हो गई है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास रहने वाले लोगों और वहां काम कर रही रेस्क्यू टीमों को अलर्ट रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को कहा गया है। हालात इसलिए भी चिंताजनक हैं क्योंकि सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन अभी जारी है और बड़ी संख्या में लोग लापता हैं।
सैटेलाइट तस्वीरों में सीमा क्षेत्र के पास एक नई प्राकृतिक झील (बैरियर झील) या पानी का अवरोध बनता दिखाई दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस झील का आकार बढ़ रहा है और पानी के निकलने का कोई साफ रास्ता नजर नहीं आ रहा। चीनी अधिकारियों के मुताबिक, वहां करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका है। अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में इसमें और करीब 30 लाख क्यूबिक मीटर पानी पहुंच सकता है। अगर प्राकृतिक अवरोध टूटता है या पानी अचानक बाहर निकलता है, तो निचले इलाकों में तेज जलप्रवाह और मलबा पहुंचने का खतरा पैदा हो सकता है। इसी वजह से दूसरी बाढ़ की आशंका को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है।
नेपाल और चीन के विशेषज्ञों के शुरुआती आकलन के अनुसार, इस आपदा के पीछे ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर का हिस्सा टूटना एक बड़ी वजह हो सकता है। वैज्ञानिक इस आशंका की जांच कर रहे हैं कि बर्फ और चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा ल्हेंडे नदी में गिरा और कुछ समय के लिए नदी के प्रवाह को रोक दिया। इसके बाद प्राकृतिक अवरोध टूटने पर पानी और मलबे का तेज सैलाब नीचे की ओर पहुंच गया। इसी तेज बहाव ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र से जुड़े इलाकों में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया।
नेपाल की यह आपदा सीमाओं तक सीमित नहीं रही। चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में भी नेपाल सीमा के पास फ्लैश फ्लड की घटनाएं हुईं। ग्यिरोंग काउंटी में बाढ़ के बाद कई लोगों के लापता होने की खबर है। इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। यह इलाका काठमांडू-ल्हासा रूट के आसपास है, जहां ट्रेकर्स और तीर्थयात्रियों की आवाजाही रहती है। रिपोर्ट के अनुसार, लापता लोगों में कई भारतीय हिंदू तीर्थयात्री भी शामिल हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े इलाकों में थे।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में बाढ़ के बाद 320 भारतीय और 100 भारतीय मूल के लोगों से संपर्क नहीं हो पाया था। हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने तिब्बत की ओर मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क स्थापित किया, जिन्हें सुरक्षित बताया गया। वहीं, नेपाल सीमा के पास फंसे 96 भारतीयों के नेपाल पहुंचने की भी जानकारी सामने आई है। भारत ने नेपाल को राहत सामग्री की दो खेप भेजी हैं और प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने की कोशिश जारी है।
बाढ़ ने नेपाल के हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। रिपोर्ट के अनुसार, 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े करीब 933 कर्मचारी लापता बताए गए थे। इनमें से कुछ लोगों को बचा लिया गया है, जबकि कई अन्य से संपर्क नहीं हो पाया है। आशंका है कि कुछ कर्मचारी सुरंगों या क्षतिग्रस्त परियोजना क्षेत्रों में फंसे हो सकते हैं। अपर त्रिशूली-1 परियोजना में भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की तलाश जारी है। खराब सड़कें, संचार व्यवस्था में बाधा और हेलिकॉप्टर ऑपरेशन में मुश्किलों ने बचाव अभियान को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
फ्लैश फ्लड में तीन दर्जन से ज्यादा पुल बहने की खबर है। इससे कई इलाकों का संपर्क टूट गया है और राहत सामग्री पहुंचाने में दिक्कत हो रही है। नेपाल ने भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज के निर्माण में मदद मांगी है। ये ऐसे पुल होते हैं जिन्हें अपेक्षाकृत कम समय में और सीमित भारी मशीनरी के साथ तैयार किया जा सकता है। बाढ़ से सड़कें, पुल, बिजली परियोजनाएं और संचार नेटवर्क प्रभावित होने के कारण अब चुनौती सिर्फ लोगों को बचाने की नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर पुनर्निर्माण की भी बन गई है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए 7,451 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। इनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान भी शामिल हैं। नेपाल पुलिस और आर्म्ड पुलिस फोर्स भी बड़े स्तर पर राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं। लेकिन पहाड़ी भूभाग, टूटी सड़कें और लगातार बदलते मौसम ने ऑपरेशन को बेहद मुश्किल बना दिया है।
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