
Nepal Floods Latest News: नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद कई देशों ने खोज और बचाव अभियान में मदद की पेशकश की है। हालांकि, नेपाल सरकार ने फिलहाल विदेशी रेस्क्यू टीमों की मदद लेने से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि देश की अपनी सुरक्षा एजेंसियां राहत और बचाव अभियान चला रही हैं और इस समय बाहरी सहायता की जरूरत नहीं है।
नेपाल-चीन सीमा के पास स्थित रसुवा जिले समेत कई इलाकों में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में पूरे के पूरे कस्बे प्रभावित हुए हैं। कई पनबिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है और अब तक करीब 587 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, दक्षिण कोरिया समेत कई देशों के सैकड़ों विदेशी नागरिक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने शुक्रवार को कहा कि कई देशों की ओर से मदद की पेशकश मिलना स्वाभाविक है, लेकिन फिलहाल इसकी आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, "मदद की पेशकश स्वाभाविक है। हमारी सुरक्षा एजेंसियां खोज और बचाव अभियान चला रही हैं। फिलहाल हमें ऐसी मदद की जरूरत नहीं है।" हालांकि, उन्होंने इस फैसले के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी।
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल ने संकेत दिया है कि वह फिलहाल विदेशी बचाव टीमों की मदद नहीं चाह रहा है। मंत्रालय ने कहा कि दक्षिण कोरिया इस मुद्दे पर नेपाल सरकार के साथ बातचीत जारी रखेगा। इसके साथ ही दक्षिण कोरिया ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों के माध्यम से 10 लाख अमेरिकी डॉलर (1 मिलियन डॉलर) की मानवीय सहायता देने की घोषणा की है। यह जानकारी दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की।
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे 9 दक्षिण कोरियाई नागरिक अभी भी लापता हैं, जबकि 10 अन्य लोग फंसे हुए हैं। इन लोगों की तलाश के लिए दक्षिण कोरिया ने पहले ही एक रिस्पॉन्स टीम नेपाल भेज दी है और जरूरत पड़ने पर आपदा राहत टीम भेजने की भी तैयारी की है।
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ने नेपाल सरकार से अनुरोध किया था कि उन्हें खोज और बचाव अभियान में अपनी टीमों को शामिल करने की अनुमति दी जाए। इन देशों के कई नागरिक भी इस आपदा के बाद लापता बताए जा रहे हैं।
जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में नेपाल के पूर्व राजदूत दिनेश भट्टराई का मानना है कि विदेशी बचाव टीमों को अनुमति न देने का फैसला रसुवा जिले की भौगोलिक और रणनीतिक संवेदनशीलता से जुड़ा हो सकता है। रसुवा जिला चीन के तिब्बत क्षेत्र से सटा हुआ है। भट्टराई के मुताबिक, "संभव है कि सरकार ने इस क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए विदेशी टीमों को अनुमति न देने का फैसला किया हो।"
हालांकि, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने इस दावे को खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी बचाव टीमों को अनुमति न देने का फैसला चीन सीमा की संवेदनशीलता से जुड़ा नहीं है। उनके अनुसार, नेपाल की अपनी बचाव एजेंसियां राहत और खोज अभियान को प्रभावी ढंग से संभाल रही हैं, इसलिए फिलहाल बाहरी रेस्क्यू टीमों की जरूरत नहीं है।
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