
Nepal Rescue Operation: नेपाल में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के बाद अब भी राहत और बचाव काम युद्ध स्तर पर जारी है। रसुवा और नुवाकोट के बाढ़ प्रभावित इलाकों में चारों तरफ तबाही का मंज़र है। संपर्क मार्ग पूरी तरह से कट चुके हैं, सड़कें बह गई हैं और पुल ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं। ऐसे में काठमांडू पहुंचने या सुरक्षित स्थानों पर जाने का एकमात्र जरिया सेना के हेलिकॉप्टर ही बचे हैं। धुंचे आर्मी हेलीपैड से सामने आई ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि किस तरह लोग अपनी जान बचाकर सुरक्षित ठिकाने पाने के लिए 24 से 48 घंटे तक कड़कड़ाती धूप और ठंड में लाइनों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। नेपाली सेना के हेलिकॉप्टर बिना रुके लगातार उड़ानें भर रहे हैं। हेलीपैड पर उतरते ही बचाए गए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जाता है और प्राथमिकता के आधार पर घायलों व फंसे हुए नागरिकों को काठमांडू भेजने की कवायद की जाती है।
पत्रकारों की टीम ने धुंचे आर्मी हेलीपैड से बचाव अभियान को करीब से देखा। यहां स्थानीय लोगों के साथ उन नागरिकों की भी लंबी कतारें लगी थीं, जिन्हें बाढ़ प्रभावित इलाकों से निकालकर धुंचे लाया गया था। बाढ़ के कारण इलाके की कई सड़कें या तो पूरी तरह बह गई हैं या पानी में डूब चुकी हैं। ऐसे में प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकलने के लिए सेना के हेलिकॉप्टर ही लोगों के पास सबसे बड़ा विकल्प बचे हैं। बड़ी संख्या में लोग धुंचे से काठमांडू जाना चाहते हैं।
Rescuers launched a daring helicopter operation at the Chilime Hydropower tunnel in Nepal’s Rasuwa district, where around 30 people are feared trapped. 🚨🇳🇵🏔️
Arriving in the early hours of Tuesday, September 1, emergency response teams faced enormous walls of mud and debris… pic.twitter.com/ruqO1Dj8XG— SG News (@SGNews123) September 1, 2026
नेपाली सेना की प्राथमिकता फिलहाल उन लोगों को सुरक्षित निकालना है, जो ऊंचाई वाले इलाकों में फंसे हुए हैं। बचाव के बाद लोगों को धुंचे लाया जाता है, जहां से काठमांडू जाने वाले हेलिकॉप्टर में जगह पाने के लिए उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। हेलीपैड पर लगी कतारें छोटी नहीं हैं। लोग लंबी और लगातार बढ़ती लाइन में बैठकर इंतजार कर रहे हैं। कई लोगों को हेलिकॉप्टर की सीट मिलने में 24 से 48 घंटे तक लग रहे हैं। आर्मी कैंप में पहले लोगों का रजिस्ट्रेशन किया जाता है। इसके बाद काठमांडू जाने वाली उड़ान के लिए नाम पुकारे जाते हैं और बारी आने पर यात्रियों को हेलिकॉप्टर में बैठाया जाता है।
नेपाल में सिर्फ गांवों और कस्बों तक ही संकट सीमित नहीं है। रसुवा और नुवाकोट में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी कॉरिडोर के आसपास मौजूद पनबिजली परियोजनाओं में भी लोगों के फंसे होने की आशंका है। नेपाल में निजी क्षेत्र की बिजली कंपनियों की प्रतिनिधि संस्था इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, नेपाल (IPPAN) के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित रसुवा और नुवाकोट की 11 हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कुल 897 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इन लोगों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए नेपाल में खोज एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
नेपाल सरकार के अनुरोध पर भारत और चीन से टनल टेक्नीशियन भी नेपाल पहुंचे हैं। इन विशेषज्ञों को पनबिजली परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को बाहर निकालने के अभियान में लगाया गया है। बाढ़ के पानी और मलबे से प्रभावित हाइड्रोपावर परियोजनाओं में बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। सुरंगों के भीतर फंसे लोगों तक पहुंचना इस पूरे अभियान की बड़ी चुनौती है।
बताया जा रहा है कि नेपाल-तिब्बत सीमा के करीब बर्फ और चट्टानों के गिरने या हिमस्खलन के कारण अचानक भीषण बाढ़ आई। 26 अगस्त को आई इस आपदा ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को बुरी तरह प्रभावित किया। बाढ़ का पानी हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी के रास्ते नीचे आया। अपने साथ पानी और भारी मलबा लेकर आई इस बाढ़ ने रास्ते में घरों, वाहनों, सड़कों और पुलों को तबाह कर दिया। पनबिजली परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इस आपदा में एक हजार से ज्यादा लोगों के मारे जाने और हजारों लोगों के अब भी लापता होने की बात सामने आई है।
ऐसे में नेपाली सेना का हेलिकॉप्टर अभियान उन लोगों के लिए जीवनरेखा बना हुआ है, जो सड़क संपर्क टूट जाने के कारण प्रभावित इलाकों में फंस गए हैं। धुंचे हेलीपैड पर 24 से 48 घंटे तक इंतजार करती भीड़ इस आपदा के बाद की मुश्किलों की एक अलग तस्वीर दिखाती है।
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