पाकिस्तान में 100 साल पुराना हिंदू मंदिर ढहने पर जम्मू में बवाल, सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी

Bimla Kumari   | ANI
Published : Sep 02, 2026, 07:48 AM IST
Pakistan Temple

सार

Pakistan Hindu Temple: पाकिस्तान में 100 साल पुराने एक हिंदू मंदिर को गिराए जाने को लेकर राष्ट्रीय बजरंग दल ने जम्मू में विरोध प्रदर्शन किया। संगठन ने भारत सरकार से दखल की मांग की है। वहीं, पाकिस्तानी अधिकारियों और एक अल्पसंख्यक अधिकार समूह ने मंदिर ढहाए जाने पर अलग-अलग वजहें बताई हैं।

Rashtriya Bajrang Dal protest, जम्मू: पाकिस्तान में 100 साल से ज्यादा पुराने एक हिंदू मंदिर के ढहाए जाने को लेकर विवाद बढ़ गया है। इस घटना के विरोध में मंगलवार को जम्मू में राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी की और एक पुतला भी फूंका। पुतले पर पाकिस्तान का झंडा और हाफिज सईद व पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की तस्वीरें लगाई गई थीं।

मंदिर गिराने को लेकर आमने-सामने दावे

राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रदेश अध्यक्ष राकेश बजरंगी ने दावा किया कि पाकिस्तान के सिराज गांव में स्थित करीब 100 से 130 साल पुराने हिंदू मंदिर को जानबूझकर गिराया गया। उनका आरोप है कि मंदिर के पास मौजूद मदरसे के विस्तार के लिए मंदिर की जमीन को उसमें मिलाने की कोशिश की गई।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में हिंदू महिलाओं के अपहरण, हिंदुओं पर हमले और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से पाकिस्तान पर दबाव बनाने और मंदिर के पुनर्निर्माण की दिशा में कदम उठाने की मांग की।

मंदिर को लेकर पाकिस्तान में भी विवाद

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह मंदिर 21 अगस्त को गिरा था। हालांकि, मंदिर को गिराए जाने की वजह को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

एक अल्पसंख्यक अधिकार संगठन ने आरोप लगाया है कि मंदिर को जानबूझकर गिराया गया ताकि पास स्थित मदरसे का विस्तार किया जा सके। वहीं, इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) के अधिकारी का कहना है कि मंदिर का ढांचा भारी बारिश के कारण खुद ढह गया।

अल्पसंख्यक संगठन ने लगाया साजिश का आरोप

पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी (PMMP) ने दावा किया है कि कुछ लोगों के एक समूह ने मंदिर के ढांचे को गिराया और वहां से ईंटें, गुंबद की धातु की फिटिंग तथा अन्य सामान हटा लिया।

PMMP के चेयरमैन असलम परवेज सहोत्रा के मुताबिक, उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव से मुलाकात कर मामले में लिखित शिकायत दी है। संगठन ने मंदिर गिराने के लिए जिम्मेदार लोगों और धार्मिक स्थल की सुरक्षा में कथित लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

सहोत्रा ने यह भी दावा किया कि मंदिर से सटी जमीन पहले ETPB ने एक मदरसे को लीज पर दी थी। कथित तौर पर किराया नहीं चुकाने और तय उद्देश्य के मुताबिक जमीन का इस्तेमाल नहीं होने के बाद लीज रद्द कर दी गई थी। इसके बावजूद संपत्ति के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया गया है।

ETPB अधिकारी ने बारिश को बताया वजह

दूसरी ओर, ETPB अधिकारी इफ्तिखार राणा ने मंदिर को जानबूझकर गिराए जाने के दावे को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि भारी बारिश के बाद मंदिर का पुराना ढांचा ढह गया।

अधिकारी के मुताबिक, रिकॉर्ड में मंदिर का अलग नाम दर्ज नहीं है, लेकिन यह ढांचा 100 से 125 साल से भी ज्यादा पुराना बताया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर से लगी जमीन मदरसे को लीज पर दी गई थी, लेकिन मंदिर की जमीन लीज पर नहीं दी गई थी।

ETPB की ओर से मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर आगे फैसला किए जाने की बात कही गई है।

मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग

राष्ट्रीय बजरंग दल ने केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और पाकिस्तान सरकार पर दबाव बनाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि मंदिर को उसके मूल स्वरूप में दोबारा बनाया जाना चाहिए।

वहीं, PMMP ने भी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हिंदू मंदिरों, सिख गुरुद्वारों और ईसाई चर्चों समेत अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा मजबूत करने की मांग की है।

फिलहाल, मंदिर के ढहने की वास्तविक वजह को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। एक तरफ इसे जानबूझकर गिराए जाने का आरोप है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तानी अधिकारी इसे भारी बारिश के कारण हुआ हादसा बता रहे हैं। ऐसे में यह मामला धार्मिक स्थल की सुरक्षा और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर रहा है।

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