
लखनऊ। 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी, जवाबदेह, पारदर्शी और जन-आकांक्षाओं के अनुरूप बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन सम्मेलनों के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता की अपेक्षाओं से जोड़ने पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ है और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि नवाचार, संवाद और प्रौद्योगिकी के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता के और अधिक निकट लाया जाए।
अपने संबोधन की शुरुआत में लोकसभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देशभर से आए सभी सम्मानित प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक मूल्य मजबूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने सुशासन, सामाजिक कल्याण, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है।
ओम बिरला ने कहा कि सम्मेलन के दौरान सभी पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने लोकतंत्र को मजबूत बनाने, तथा विधायी संस्थाओं को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह चर्चा केवल संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ठोस और सकारात्मक परिणाम सुनिश्चित करना और विधायी संस्थाओं में नवाचार को अपनाना है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सम्मेलन में यह संकल्प लिया गया है कि सभी विधायी संस्थाएं “विकसित भारत” की संकल्पना के अनुरूप अपने-अपने राज्यों को विकसित बनाने की दिशा में निरंतर संवाद और चर्चा करें। उन्होंने कहा कि विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक सोच के साथ लगातार संवाद आवश्यक है।
ओम बिरला ने उत्तर प्रदेश विधानसभा का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यहां विजन–2047 सहित कई अहम विषयों पर 36 घंटे तक लगातार चर्चा हुई। उन्होंने इसे एक अनुकरणीय पहल बताया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सार्थक बहस और संवाद के माध्यम से दीर्घकालिक विकास की दिशा तय की जा सकती है।
लोकसभा अध्यक्ष ने विधायी संस्थाओं में बैठकों की संख्या घटने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में लिए गए कई निर्णयों के सकारात्मक परिणाम मिले हैं, लेकिन अब और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य विधानमंडलों में न्यूनतम 30 दिन सदन की बैठकें हों, सकारात्मक और सार्थक चर्चा हो, राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विकास का वातावरण बने।
ओम बिरला ने कहा कि विधानसभाएं वह मंच हैं जहां अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज सरकार तक पहुंचती है। मतदाता यह अपेक्षा करता है कि उसका प्रतिनिधि सदन में उसकी समस्याएं उठाए और समाधान की दिशा में पहल करे।
न्यायपालिका का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे लोगों को न्यायालय पर विश्वास होता है, वैसे ही यदि विधायक सकारात्मक दृष्टिकोण से कार्य करें तो विधानसभाओं से भी सार्थक परिणाम सामने आएंगे।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग आवश्यक है। उन्होंने बताया-
ओम बिरला ने कहा कि डिजिटलीकरण से कानून निर्माण के दौरान आवश्यक संदर्भ आसानी से उपलब्ध होंगे। संसद और राज्य विधानसभाएं मिलकर कार्य करेंगी तो जनप्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ेगी और विधायिकाएं अधिक जवाबदेह बनेंगी। इससे शासन-प्रशासन पर निगरानी भी मजबूत होगी।
सदनों में बार-बार होने वाले गतिरोध पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि सदन का प्रत्येक क्षण बहुमूल्य होता है। सदन चर्चा, संवाद और समिति कार्यों के लिए होते हैं, न कि अवरोध के लिए। उन्होंने कहा कि विरोध हो सकता है, लेकिन शब्दों और तर्कों के माध्यम से, ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
लोकसभा अध्यक्ष ने लेजिसलेटिव इंडेक्स की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि इससे विधानसभाओं की उत्पादकता, कार्यप्रणाली, उपयोगिता का आकलन किया जा सकेगा। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से नई प्रक्रियाएं और नवाचार सामने आएंगे।
अपने संबोधन के अंत में ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारी संविधान के अंतर्गत कार्य करते हैं और उन पर बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्हें निष्पक्ष रहते हुए संस्थाओं को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन में लिए गए संकल्पों को सभी प्रतिनिधि अपने-अपने राज्यों में आगे बढ़ाएंगे।
लोकसभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन के लिए आभार जताया और कहा कि यह सम्मेलन नई दिशा, नए संकल्प और नई ऊर्जा देता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और सभी अतिथियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सामाजिक, आध्यात्मिक और परिवर्तन की धरती है, जहां से मिली ऊर्जा को सभी प्रतिनिधि अपने-अपने राज्यों में लेकर जाएंगे।
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