क्या पाकिस्तान के हाथ से निकलने वाला है POK? मुज़फ़्फ़राबाद मार्च की चेतावनी से कांपा इस्लामाबाद!

Published : Jul 03, 2026, 09:11 AM IST
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सार

PoK में 24वें दिन भी प्रदर्शन जारी। JAAC नेता अमन खान ने पाक सेना पर कश्मीरियों को हथियार देने और आतंकवादी कहने का आरोप लगाया। आर्थिक मुद्दों पर आंदोलन तेज, मार्च की चेतावनी।

PoK Protests 2026: इस्लामाबाद के पैरों तले खिसकी जमीन-अपनों के ही बयानों से खुला पाक सेना का सबसे खौफनाक राज! पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले 24 दिनों से सुलग रही विद्रोह की आग ने अब एक ऐसा भयानक रूप ले लिया है, जिसने पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना की रातों की नींद उड़ा दी है। रावलकोट की ऐतिहासिक ईदगाह में गूंजी एक आवाज ने पूरे मुल्क में भूचाल ला दिया है। इस ऐतिहासिक आंदोलन, पाकिस्तान के दोहरे चरित्र के भंडाफोड़ और आने वाले बड़े खतरे की पूरी इनसाइड स्टोरी नीचे दी गई है:

'बंदूकें तुम्हारी, फिर हम आतंकवादी कैसे?' 80 हजार की भीड़ में फूटा महाबम

पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों के खिलाफ चल रहे इस महाआंदोलन का नेतृत्व कर रहे जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) के फायरब्रांड नेता सरदार अमन खान ने इस्लामाबाद के हुक्मरानों पर अब तक का सबसे तीखा और सीधा हमला बोला है। रावलकोट ईदगाह में उमड़े 80,000 से ज्यादा लोगों के विशाल जनसैलाब को संबोधित करते हुए खान ने पाक सेना के उस खौफनाक चेहरे को बेनकाब किया जिसे वह सालों से दुनिया से छिपाता आया है।

 

 

अमन खान ने गरजते हुए कहा, "आज वे (पाकिस्तान सरकार) हमें आतंकवादी कहते हैं! लेकिन सच तो यह है कि खुद पाक सेना ने अतीत में कश्मीरियों के हाथों में बंदूकें थमाई थीं और उन्हें हथियार सप्लाई किए थे। कश्मीरियों के पास हथियार इसलिए थे क्योंकि पूरी पाक सेना ने उन्हें वे हथियार दिए थे। आज उनमें हमें आतंकवादी कहने की हिम्मत कैसे हो रही है?" इस सनसनीखेज खुलासे पर पूरी ईदगाह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी, जिसने यह साफ कर दिया कि अब वहां की आवाम पाक सेना के किसी भी प्रोपेगैंडा को मानने के लिए तैयार नहीं है।

आतंकियों को सरकारी सुरक्षा? डिप्टी कमिश्नर की सांठगांठ का सनसनीखेज खुलासा

बात सिर्फ अतीत के हथियारों तक ही सीमित नहीं रही; सरदार अमन खान ने स्थानीय प्रशासन और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के बीच चल रहे अपवित्र गठजोड़ की परतों को भी उघाड़ कर रख दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी साल की शुरुआत में रावलकोट में भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले प्रतिबंधित आतंकी संगठन 'जैश-ए-मोहम्मद' के एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम को खुद स्थानीय अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाई थी।

 

 

कथित गठजोड़ का सच: खान के दावों के मुताबिक, रावलकोट के डिप्टी कमिश्नर ने न सिर्फ इस आतंकी कार्यक्रम को खुली अनुमति दी थी, बल्कि आतंकियों को वीआईपी सुरक्षा भी मुहैया कराई थी। उस दौरान जैश के हथियारबंद कैडर खुलेआम असॉल्ट राइफलें और नंगी तलवारें लेकर शहर की सड़कों पर मार्च कर रहे थे और प्रशासन तमाशबीन बना हुआ था। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है, लेकिन इसने पाकिस्तान के 'आतंकवाद विरोधी' दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।

मुज़फ़्फ़राबाद मार्च की अंतिम चेतावनी: 'पीछे हटो पाकिस्तान, वरना...'

सड़कों पर उतरी इस आक्रोशित जनता ने अब इस्लामाबाद को पूरी तरह घुटनों पर लाने की तैयारी कर ली है। JAAC के शीर्ष नेतृत्व ने सरकार को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए अल्टीमेटम जारी किया है। उन्होंने मांग की है कि सरकार तुरंत बातचीत की मेज पर आए और आंदोलन के 38-सूत्रीय चार्टर (मांग पत्र) को बिना किसी शर्त के स्वीकार कर लागू करे।

आंदोलन का चरणवर्तमान स्थिति और आगे का कड़ा प्लान
वर्तमान स्थिति (24वां दिन)बिजली के भारी बिलों, गेहूं पर सब्सिडी खत्म होने और महंगाई के खिलाफ चक्का जाम।
अगला कदम (अल्टीमेटम)मांगें न पूरी होने पर PoK की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद की ओर एक ऐतिहासिक महामार्च।
सबसे बड़ा खतरा (एजेंडा बदलाव)यदि मार्च हुआ, तो एजेंडा बदलकर 'पाकिस्तान पूरी तरह PoK खाली करो' में तब्दील हो जाएगा।

नेताओं ने दो टूक कहा है कि अगर उन्हें मुज़फ़्फ़राबाद की तरफ कदम बढ़ाने के लिए मजबूर किया गया, तो यह आंदोलन आर्थिक मांगों से ऊपर उठकर पाकिस्तान से पूरी तरह आजादी की मांग में बदल जाएगा।

महंगाई से शुरू हुआ आंदोलन अब शासन के सवाल पर

POK में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत बिजली के बढ़ते बिल, सब्सिडी वाले गेहूं की कमी और महंगाई जैसे आर्थिक मुद्दों से हुई थी। लेकिन समय के साथ यह आंदोलन व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक सुधारों की मांग में बदल गया। प्रदर्शनकारी स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, वित्तीय अधिकारों, पारदर्शी प्रशासन और स्थानीय जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। आंदोलन में छात्रों, व्यापारियों और आम परिवारों की बढ़ती भागीदारी ने इसे और व्यापक बना दिया है।

 

 

सड़कों पर बहता खून: क्या स्वतंत्र होने की राह पर है PoK?

यह अशांति अब सिर्फ साधारण आर्थिक शिकायतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हाल के दशकों में पाकिस्तान के अस्तित्व के लिए इस इलाके में सबसे बड़ी ढांचागत चुनौती बनकर उभरी है। हताश और बौखलाए पाकिस्तानी प्रशासन ने इस आंदोलन को कुचलने के लिए बेहद क्रूर और सख्त रवैया अपनाया है। रावलकोट और मुज़फ़्फ़राबाद जैसे प्रमुख शहरों में भारी संख्या में आधुनिक हथियारों से लैस पुलिस बलों को तैनात किया गया है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों, महिलाओं और बुजुर्गों पर पुलिसिया दमन के कारण हालात बेहद जानलेवा हो चुके हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक कई लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं। पाकिस्तान की इस बर्बरता ने PoK को एक ऐसे बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है, जिसका धमाका पूरी पाकिस्तानी हुकूमत को नेस्तनाबूद कर सकता है!

आगे क्या होगा?

अमन खान के ताज़ा आरोपों ने POK की राजनीतिक स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। यदि JAAC अपने प्रस्तावित बड़े मार्च और 38-सूत्रीय चार्टर पर अड़ा रहता है, तो आने वाले दिनों में पाकिस्तान के लिए इस क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें टिकी हुई हैं।

 

 

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