
नई दिल्ली में गुरुवार को कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने चुनाव आयोग और SIR विवाद को फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया। लोकसभा में नेता विपक्ष ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी से लेकर वोटर लिस्ट में बदलाव तक कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर बीजेपी के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी बार-बार क्यों नहीं दिखती।
राहुल गांधी ने दावा किया कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में हेरफेर हुई और वोट खत्म किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास इन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत हैं और CEC को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, जिनका अंतिम सत्यापन संबंधित जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही होगा।
Rahul Gandhi displays a poster featuring several individuals, alleging that they have “destroyed democracy.” The slide includes industrialists, BJP politicians and Media figures.#RahulGandhi pic.twitter.com/WGoVBuUCY1
— Hemant Rajaura (@hemantrajora_) September 24, 2026
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राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों ने भी उनके फैसलों पर सवाल उठाए हैं। दरअसल, Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कई मुद्दों पर रिकॉर्डेड आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने इसे आंतरिक समीक्षा की सामान्य प्रक्रिया बताया है।
राहुल गांधी ने कहा कि वोट खत्म होने पर कानून और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भी असर पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाली सूचनाएं सामने आ रही हैं और हरियाणा चुनाव में भी अनियमितताएं हुईं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने एंटी-इनकंबेंसी को लेकर बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारत में सरकारों के खिलाफ समय-समय पर विरोध की लहर देखने को मिली है, लेकिन उनके अनुसार नरेंद्र मोदी, अमित शाह और बीजेपी के मामले में यह प्रभाव दिखाई नहीं देता। उन्होंने महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों का उदाहरण दिया।
राहुल गांधी के आरोपों और सवालों को मोटे तौर पर इन बिंदुओं में समझा जा सकता है—चुनावों में कथित हेरफेर, वोटर लिस्ट में नाम हटना, SIR की प्रक्रिया, CEC की भूमिका, दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां, चुनाव आयोग की जवाबदेही, हरियाणा चुनाव की कथित अनियमितताएं, चुनावी कानून और संस्थाओं पर असर, बीजेपी की लगातार चुनावी सफलता और एंटी-इनकंबेंसी का सवाल।
हालांकि, इन आरोपों को स्थापित तथ्य मानने से पहले आधिकारिक रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष देखना जरूरी है। चुनाव आयोग का कहना है कि SIR समेत उसके फैसलों को कानूनी आधार प्राप्त है और आयोग के भीतर लिखित टिप्पणियां व तकनीकी समीक्षा नियमित प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
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