
सुबह की सामान्य ड्यूटी, मशीनों की आवाज और रोज की तरह काम पर जुटे मजदूर। लेकिन सोमवार सुबह भिवाड़ी के खुशखेड़ा करौली इंडस्ट्रियल एरिया में सब कुछ कुछ ही मिनटों में बदल गया। एक केमिकल फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने कम से कम सात मजदूरों की जान ले ली। दो अन्य मजदूरों के अंदर फंसे होने की आशंका है। यह घटना औद्योगिक सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, हादसा सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे हुआ। उस समय फैक्ट्री के भीतर लगभग 25 मजदूर काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री में केमिकल के साथ पटाखों का निर्माण भी किया जाता था, जिससे आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया। फैक्ट्री मालिक का नाम राजेंद्र बताया जा रहा है। आग लगने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
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एडीएम सुमिता मिश्रा के अनुसार, पुलिस को गश्त के दौरान घटना की सूचना मिली। सूचना मिलते ही प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। खुशखेड़ा और भिवाड़ी रीको फायर स्टेशन से दमकल की गाड़ियां बुलवाई गईं। करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि तब तक नुकसान बहुत बड़ा हो चुका था।
हादसा इतना भयावह था कि कई शव बुरी तरह जल चुके थे। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, कुछ मामलों में केवल कंकाल जैसी स्थिति बची थी। रेस्क्यू टीम को फैक्ट्री परिसर में जले हुए बॉडी पार्ट्स के टुकड़े भी बिखरे मिले, जिन्हें प्लास्टिक बैग में इकट्ठा किया गया। शवों की पहचान और डीएनए परीक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है, ताकि मृतकों की शिनाख्त सुनिश्चित की जा सके।
प्रशासन के अनुसार, सात शव बाहर निकाले जा चुके हैं। हालांकि दो मजदूरों के अब भी अंदर फंसे होने की आशंका है। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और मलबा हटाकर तलाश की जा रही है। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि केमिकल फैक्ट्री में आग से 8-10 लोगों की मृत्यु हुई है और कई लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि जनता में आक्रोश है और सरकार व प्रशासन को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। उनका आरोप है कि ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं और औद्योगिक सुरक्षा के मुद्दे पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
भिवाड़ी और खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में रासायनिक इकाइयां संचालित होती हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि केमिकल और पटाखों जैसी ज्वलनशील सामग्री के साथ काम करने वाली इकाइयों में अग्नि सुरक्षा उपकरण, आपातकालीन निकास, नियमित निरीक्षण और कर्मचारियों का प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए। यदि जांच में लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार पक्षों पर सख्त कानूनी कार्रवाई संभव है।
फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आग लगने के कारण, सुरक्षा इंतजाम और लाइसेंस संबंधी पहलुओं की जांच की जा रही है। यह हादसा केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों के लिए जीवनभर का घाव है जिनके अपने इस आग में झुलस गए। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच क्या सामने लाती है और क्या इस त्रासदी के बाद औद्योगिक सुरक्षा को लेकर कोई ठोस बदलाव होगा।
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(यह रिपोर्ट प्रशासनिक अधिकारियों और प्रारंभिक बयानों पर आधारित है। जांच पूरी होने के बाद तथ्यों में बदलाव संभव है।)
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