Ayodhya Ram Mandir: ट्रस्ट में होगा बड़ा फेरबदल? 2 दिसंबर को हो सकता है अहम फैसला

Bimla Kumari   | CMS
Published : Sep 04, 2026, 12:39 PM IST
Ayodhya Ram Mandir

सार

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट 2 दिसंबर को डीड में पहले संशोधन पर विचार करेगा। एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेन्द्र मिश्रा को 3 साल के लिए पहले CEO के तौर पर चुना गया। 17 अगस्त की SIT रिपोर्ट ने “गंभीर चूकें” बताईं और SBI की भूमिका पर सवाल उठाए।

Ram Mandir Trust: राम मंदिर के निर्माण के बाद अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का फोकस धीरे-धीरे निर्माण से नियमित संचालन की ओर बढ़ रहा है। इसी बदलाव के बीच ट्रस्ट अपने संस्थागत ढांचे में महत्वपूर्ण परिवर्तन की तैयारी कर रहा है। ट्रस्ट 2 दिसंबर को अपनी डीड में संशोधन के प्रस्ताव पर विचार करेगा। फरवरी 2020 में ट्रस्ट के गठन के बाद यह पहली बार होगा जब उसकी डीड में बदलाव पर चर्चा होगी।

ट्रस्ट के नवनियुक्त महासचिव गोविंद देव गिरी के मुताबिक, 2 सितंबर की बैठक में अन्य जरूरी मुद्दों के कारण डीड संशोधन का प्रस्ताव नहीं लिया जा सका था। अब अगली बैठक में इस पर विचार होने की संभावना है।

CEO पद की भूमिका और शक्तियां होंगी स्पष्ट

प्रस्तावित संशोधनों में सबसे अहम मुद्दा हाल ही में बनाए गए CEO पद का ढांचा होगा। इसमें CEO की भूमिका, अधिकार, जिम्मेदारियां और कार्यकाल को स्पष्ट किए जाने की संभावना है।

मंदिर का संचालन अब केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, धार्मिक गतिविधियों, वित्तीय प्रबंधन और रोजमर्रा के प्रशासन जैसे कई क्षेत्रों को व्यवस्थित तरीके से संभालना होगा।

ऐसे में ट्रस्ट के भीतर जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा और पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

एयर मार्शल जितेन्द्र मिश्रा बने पहले CEO

इसी सप्ताह ट्रस्ट ने एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेन्द्र मिश्रा को अपना पहला CEO नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति तीन साल के लिए की गई है।

जितेन्द्र मिश्रा बुधवार को अयोध्या पहुंचे और मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कामकाज को समझने के लिए कई बैठकें कीं। हालांकि, उन्होंने अभी औपचारिक रूप से कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। महासचिव गोविंद देव गिरी ने कहा है कि ट्रस्ट उनसे जल्द से जल्द जिम्मेदारी संभालने का अनुरोध करेगा।

CEO पद का गठन ट्रस्ट के कामकाज में पेशेवर प्रशासनिक निगरानी बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

ट्रस्ट में नए सदस्य और पदों में बदलाव

ट्रस्ट में हाल ही में तीन नए सदस्यों को शामिल किया गया है। गोविंद देव गिरी को महासचिव और कारोबारी महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष बनाया गया है।

इससे पहले जुलाई में ट्रस्ट के पूर्व सदस्य चम्पत राय और अनिल मिश्रा ने दान से जुड़े विवाद के बीच अपने पद छोड़ दिए थे। 6 जुलाई को ट्रस्ट ने दोनों के त्यागपत्र स्वीकार किए। इसी दौरान प्रशासक गोपाल राव को हटाया गया और नए CEO की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय पैनल बनाया गया था।

दान से जुड़ा विवाद और SIT जांच

राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ा दान अनियमितता का मामला जून में सामने आया था। समाजवादी पार्टी नेता तेज नारायण ‘पवन’ पाण्डेय ने मंदिर के चढ़ावे से ₹5 करोड़ से ₹7.5 करोड़ तक की राशि कथित तौर पर siphon किए जाने का आरोप लगाया था।

इसके बाद 13 जून को SIT का गठन किया गया। 25 जून को आठ नामजद आरोपियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। इसके बाद कई गिरफ्तारियां हुईं और आरोपियों के ठिकानों से करीब ₹80 लाख बरामद किए जाने की बात सामने आई।

पहली SIT ने अपनी जांच में राय के पूर्व सहयोगी-चालक टिन्नू को कथित मुख्य साजिशकर्ता बताया था। हालांकि, मामले में सामने आए आरोपों और जांच के निष्कर्षों को अंतिम न्यायिक फैसला नहीं माना जा सकता।

दूसरी SIT और SBI की भूमिका पर सवाल

जुलाई में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दूसरी SIT गठित की गई। 17 अगस्त को पहली SIT की अंतिम रिपोर्ट सामने आई, जिसमें ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में “गंभीर चूकें” होने की बात कही गई।

रिपोर्ट में भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए और पेशेवर वित्तीय प्रबंधन की कमी का उल्लेख किया गया। हालांकि, रिपोर्ट में ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी का प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिलने की बात भी सामने आई।

निर्माण से संचालन की ओर बढ़ रहा ट्रस्ट

राम मंदिर निर्माण के साथ ट्रस्ट की भूमिका अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है। मंदिर परिसर और आसपास बढ़ती श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, सुविधाओं, वित्त, प्रशासन और लॉजिस्टिक्स को लंबे समय तक व्यवस्थित तरीके से संचालित करना बड़ी जिम्मेदारी होगी।

इसी वजह से डीड में प्रस्तावित बदलाव को केवल प्रशासनिक संशोधन के तौर पर नहीं, बल्कि ट्रस्ट के निर्माण-केंद्रित मॉडल से संचालन-केंद्रित व्यवस्था की ओर बदलाव के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

2 दिसंबर की बैठक पर रहेगी नजर

अब सबकी नजर 2 दिसंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक पर है। इसमें डीड संशोधन के साथ CEO पद की औपचारिक भूमिका और अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण फैसले हो सकते हैं।

हालिया नियुक्तियों और संगठनात्मक बदलावों के बाद यह बैठक ट्रस्ट के भविष्य के प्रशासनिक ढांचे के लिए अहम मानी जा रही है। हालांकि, प्रस्तावित बदलावों का अंतिम स्वरूप बैठक में लिए जाने वाले फैसलों के बाद ही स्पष्ट होगा।

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