जूते-मोजों में भरकर ले जाते थे नोट! राम मंदिर चढ़ावा चोरी के CCTV ने उड़ाए होश

Published : Jul 07, 2026, 07:43 AM ISTUpdated : Jul 07, 2026, 11:15 AM IST
Ram Mandir Case

सार

Ram Mandir SIT Report: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की शुरुआती रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। जानिए जांच रिपोर्ट में क्या-क्या सामना आया है और बड़ी बातें

Ram Mandir Donation Theft Case: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में यूपी सरकार की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट सामने आ चुकी है। शुरुआती जांच रिपोर्ट ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एसआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन्हें देखकर जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। CCTV फुटेज में कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां जेब, कपड़ों और यहां तक कि जूते-मोजों में छिपाते हुए दिखाई दिए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच में करीब 70 संदिग्ध घटनाओं का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट आने के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी सिस्टम और जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

अयोध्या राम मंदिर चोरी में SIT रिपोर्ट में क्या पता चला है?

SIT की शुरुआती रिपोर्ट से पता चलता है कि चढ़ावे की गिनती की पूरी व्यवस्था में कई कमियां थीं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून के बीच की CCTV रिकॉर्डिंग खंगाली गई। इस दौरान करीब 70 ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन्हें संदिग्ध माना गया। फुटेज में कुछ कर्मचारी बार-बार नोटों की गड्डियां अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और मोजों में छिपाते हुए दिखाई दिए। जांच में यह भी सामने आया कि कई बार एंट्री और एग्जिट पॉइंट पर ठीक से तलाशी नहीं ली गई, जिससे कैश बाहर ले जाना आसान हो गया।

इशारों में दिया जाता था अलर्ट मैसेज

रिपोर्ट में बताया गया है कि यह कोई एक-दो बार हुई घटना नहीं थी। CCTV फुटेज में कुछ लोग एक-दूसरे को इशारे करके सतर्क करते भी दिखाई दिए। जांच टीम का मानना है कि यह गतिविधियां लगातार दोहराई जा रही थीं और इसमें एक से ज्यादा लोग शामिल हो सकते हैं।

SIT ने किन लोगों की भूमिका पर उठाए सवाल?

रिपोर्ट में वित्तीय व्यवस्था और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच टीम का कहना है कि पहले से तय सुरक्षा और तलाशी व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि निगरानी व्यवस्था में मौजूद कमियों को समय रहते दूर नहीं किया गया, जिसकी वजह से आरोपियों को मौका मिलता रहा।

बिना आदेश के चाबी रखता था टिन्नू

SIT रिपोर्ट में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पता चला कि मंदिर की हुंडियों और गिनती से जुड़ी कुछ चाबियां रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए कोई औपचारिक लिखित आदेश नहीं था। इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि उसकी सिफारिश पर मनीष यादव को चढ़ावे की गिनती के काम में लगाया गया था। बाद में उसका नाम भी आरोपियों की सूची में सामने आया।

6 लोगों के खिलाफ मिले शुरुआती सबूत

SIT की शुरुआती रिपोर्ट में छह लोगों को सीधे तौर पर संदिग्ध भूमिका में बताया गया है। जांच एजेंसियों को CCTV फुटेज, बरामद नकदी और बैंक खातों की जांच में ऐसे सबूत मिले हैं, जिनके आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव (ड्राइवर का भतीजा), करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ धोखाधड़ी, चोरी, साजिश रचने और सरकारी अमानत में खयानत जैसी कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर इन्हें जेल भेज दिया गया है। हालांकि, सोशल मीडिया पर चल रहे चांदी की ईंटें गायब होने के दावों का इस शुरुआती रिपोर्ट में कोई सबूत नहीं मिला है।

20 हजार की सैलरी, लेकिन खातों में लाखों

जांच का एक और हिस्सा काफी चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कर्मचारियों की मंथली सैलरी करीब 20 हजार रुपए थी, लेकिन उनके बैंक खातों में लाखों रुपये के लेन-देन, कैश जमा और अन्य वित्तीय गतिविधियां मिलीं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह पैसा कहां से आया और क्या इसका संबंध चोरी की रकम से है।

20 लाख से ज्यादा कैश, ज्वैलरी और कई कीमती समान बरामद

जांच में एक आरोपी अविनाश शुक्ला के पास से बड़ी मात्रा में नकदी और अन्य सामान मिलने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, उसके पास से 20.39 लाख कैश, 1स121 अमेरिकी डॉलर, सोने-चांदी के गहने और अन्य संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि हाल के वर्षों में खरीदी गई संपत्तियों और बैंक खातों का सोर्स क्या था।

राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में कौन-कौन सी कमियां मिलीं?

SIT रिपोर्ट के मुताबिक, कई बेसिक व्यवस्थाएं ठीक से लागू नहीं थीं। बायोमैट्रिक अटेंडेंस की व्यवस्था मजबूत नहीं थी। कर्मचारियों के लिए तय ड्रेस कोड पर सख्ती नहीं थी। पर्सनल सामान ले जाने पर साफ कंट्रोल नहीं था। चढ़ावे की गिनती और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया में कमियां थीं। नियमित निगरानी और रिपोर्टिंग पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। जांच टीम का मानना है कि इन कमियों का फायदा उठाकर चोरी को अंजाम दिया गया।

अयोध्या राम मंदिर चोरी की जांच अभी खत्म नहीं हुई

SIT ने साफ किया है कि यह सिर्फ शुरुआती रिपोर्ट है। अभी कई पहलुओं की जांच बाकी है। टीम यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस मामले में और लोग शामिल थे, निगरानी में कहां-कहां चूक हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं। फाइनल रिपोर्ट में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

राम मंदिर की जांच को लेकर अब तक के अपडेट्स

मार्च 2025- दान गिनने के काम में कुछ कर्मचारी रखे गए। जांच में इन्हीं नियुक्तियों और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे।

मई–जून 2026- रिपोर्ट के अनुसार, करीब 40 दिनों में दान चोरी की 70 घटनाएं हुईं। दान गिनने की प्रक्रिया में खामियों का फायदा उठाकर कैश का हेरफेर हुआ।

5 जून 2026- पुलिस ने कथित तौर पर छापेमारी और कैश जब्त किया।

जून 2026- उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए SIT बनाया।

25 जून 2026- SIT की रिपोर्ट के आधार पर FIR दर्ज हुई। 8 आरोपी गिरफ्तार।

जून के अंत तक- पुलिस ने आरोपियों से करीब ₹80 लाख कैश बरामद किया। बैंक खातों और संपत्तियों की जांच शुरू।

30 जून-2 जुलाई 2026- पुलिस ने 7 बैंकों से 5 साल के बैंक रिकॉर्ड मांगे। राज्य सरकार ने SIT को जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का एक्स्ट्रा टाइम दिया।

1 जुलाई 2026- जांच रिपोर्ट में आरोपी चोरी की रकम को पहले वॉशरूम में छिपाते थे और बाद में बाहर निकालते थे, ताकि शक न हो।

6-7 जुलाई 2026- SIT रिपोर्ट में उठे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल। फ्रिस्किंग और CCTV निगरानी में कमी के कारण चोरी हुई। रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी की लापरवाही पाई गई।

अभी क्या चल रहा है- जांच जारी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई चल रही है।

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