
Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर! जहां एक तरफ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भव्य राम मंदिर सुर्ख़ियों में रहता है, वहीं दूसरी तरफ मंदिर के दान नेटवर्क के भीतर चल रहे एक कथित और खौफनाक खेल का पर्दाफाश हुआ है। राष्ट्रीय मीडिया चैनल TIMES NOW के एक विस्फोटक स्टिंग ऑपरेशन ने राम मंदिर डोनेशन सिस्टम की उन परतों को उघाड़ कर रख दिया है, जिन्होंने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। इस पूरी खोजी रिपोर्ट और जांच का विस्तृत ब्योरा नीचे दिया गया है:
अयोध्या में राम मंदिर दान चोरी का मामला तब और गरमा गया जब TIMES NOW की रिपोर्ट के अनुसार उनकी टीम ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय (जिन्हें इनर सर्कल में 'बाबूजी' कहा जाता है) के संदिग्ध कामकाज को कैमरे में कैद किया। कई दिनों से मीडिया के लिए बंद रहने वाले ट्रस्ट के गेस्ट हाउस के गेट तब अचानक खुल गए, जब अंडरकवर रिपोर्टर्स ने व्यापारी बनकर कहा कि वे 'चांदी डोनेट' करने आए हैं। कैमरे पर खुद को चंपत राय का करीबी बताने वाले प्रद्युम्न नाम के शख्स ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने कैमरों से बचने और दान को सीधे 'बाबूजी' तक सुरक्षित पहुंचाने का रास्ता बताया, जिससे यह साफ होता है कि जनता के सामने न आने वाले चंपत राय पर्दे के पीछे से अब भी पूरा नेटवर्क चला रहे हैं।
Operation 'Chanda Chori': TIMES NOW S.I.T Investigation
- Revealed: Champat Rai still in charge
- Trust employee claims 'media is lying'
- 'Champat Rai is still holding meetings'
Watch as @Madhavgk takes us through the report. pic.twitter.com/ET2z8xEZjQ— TIMES NOW (@TimesNow) July 2, 2026
स्टिंग में सामने आए वीडियो के मुताबिक, खुद को चंपत राय का करीबी बताने वाले व्यक्ति प्रद्युम्न ने कथित तौर पर कहा कि यदि दानदाता CCTV कैमरों से बचकर डोनेशन देना चाहता है तो उसमें भी मदद की जा सकती है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि सोना या चांदी दान करने के लिए मूल खरीद बिल की मांग नहीं की गई। इसके बजाय एक शपथपत्र (एफिडेविट) तैयार कराने की बात कही गई, जिसमें दानकर्ता यह घोषित करे कि दान की गई संपत्ति पर भविष्य में उसका कोई दावा नहीं रहेगा। यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह डोनेशन प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकते हैं। फिलहाल इन आरोपों की जांच चल रही है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
स्टिंग ऑपरेशन में जो सबसे खतरनाक बात सामने आई, वह थी दान लेने की प्रक्रिया। आमतौर पर सोने-चांदी के बड़े दान के लिए पक्के बिल और कानूनी कागजात जरूरी होते हैं। लेकिन, चंपत राय के सहयोगियों ने अंडरकवर टीम से किसी भी असली बिल की मांग नहीं की।
चौंकाने वाली शर्त: नेटवर्क ने डोनर्स के सामने एक अजीब शर्त रखी। उन्हें एक ऐसा एफिडेविट (हलफनामा) साइन करने को कहा गया, जिसमें लिखा हो कि दान देने के बाद डोनर का उस धातु पर कोई अधिकार नहीं रहेगा। यानी ट्रस्ट उस सोने या चांदी का इस्तेमाल अपनी मर्जी से किसी भी तरह करने के लिए पूरी तरह आजाद होगा। हद तो तब हो गई जब टीम दोबारा जानबूझकर नकली गहने लेकर पहुंची, तब भी बिना किसी वेरिफिकेशन या जांच के उन्हें स्वीकार करने पर जोर दिया गया।
Operation 'Chanda Chori': TIMES NOW S.I.T Investigation
- Revealed: Champat Rai still in charge
- Trust employee claims 'media is lying'
- 'Champat Rai is still holding meetings'
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इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच भी बेहद चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच चुकी है। पुलिस ने अब तक आरोपियों के पास से 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का कैश, सोने के गहने और अमेरिकी डॉलर बरामद किए हैं। लेकिन सबसे बड़ा विरोधाभास आरोपियों की आर्थिक पृष्ठभूमि को लेकर है।
| आरोपी का नाम | बरामद हुई अनुमानित रकम |
| अविनाश शुक्ला | ₹20.39 लाख + 1,121 अमेरिकी डॉलर + सोने के गहने |
| करुणेश पांडे | ₹18.07 लाख |
| अनुकल्प मिश्रा | ₹16.82 लाख |
| लवकुश मिश्रा | ₹14.25 लाख |
| रमाशंकर मिश्रा | ₹7.32 लाख |
हैरानी की बात यह है कि मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला महाकुंभ से पहले तक अपनी पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्चों के लिए संघर्ष कर रहा था। ऐसे में सवाल उठता है: क्या ये मामूली पृष्ठभूमि वाले लोग ही असली मास्टरमाइंड थे, या ये किसी बेहद शक्तिशाली चेहरे के लिए केवल 'कस्टोडियन' (कैश रखने वाले) का काम कर रहे थे?
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद 25 जून को FIR दर्ज कर मंदिर के दान काउंटिंग विभाग से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया। बुधवार को अयोध्या पुलिस ने आरोपी लवकुश मिश्रा के घर पर सूखे चारे के ढेर तक की छानबीन की और उसके पिता बच्चू लाल मिश्रा को हिरासत में लिया। मौके से QR कोड वाला एक संदिग्ध दान-पात्र भी बरामद हुआ है।
इस पूरे महाघोटाले की आंच जब चंपत राय तक पहुंची, तो उन्होंने कथित तौर पर "नैतिक जिम्मेदारी" लेते हुए पहले इस्तीफे की पेशकश की थी। हालांकि, वे अनिल मिश्रा के साथ मिलकर फिर से सक्रिय हैं। पुलिस ने जिला जेल में बंद अविनाश शुक्ला को 24 घंटे की रिमांड पर लेकर पूछताछ की है और खुद चंपत राय का आधिकारिक बयान भी दर्ज किया है। इस मामले में एक योग प्रशिक्षक का नाम भी सामने आ रहा है, जिसकी भूमिका की जांच की जा रही है। जैसे-जैसे कड़ियां जुड़ रही हैं, यह साफ होता जा रहा है कि आस्था के नाम पर चल रहा यह खेल बहुत गहरा है और आने वाले दिनों में कई बड़े चेहरों बेनकाब हो सकते हैं!
Operation 'Chanda Chori': TIMES NOW S.I.T. Investigation
During the investigation, a Trust employee while speaking to @priyanktripathi, revealed that Champat Rai was inside the guest house at that very moment, holding meetings.
He said, "Hum turant milwa dete... Jhooth bhi… pic.twitter.com/ftjfudwmb3— TIMES NOW (@TimesNow) July 2, 2026
स्टिंग ऑपरेशन के दावे और पुलिस जांच के अब तक के निष्कर्षों ने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है। सबसे अहम सवाल यही है कि क्या कथित वित्तीय अनियमितताएं कुछ व्यक्तियों तक सीमित थीं या डोनेशन प्रक्रिया में किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका थी? इसका जवाब अब SIT की विस्तृत जांच, डिजिटल साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
नोट: इस रिपोर्ट में वर्णित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े दावे संबंधित मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है। अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच एजेंसियों और न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
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