
Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भक्तों की आस्था के चढ़ावे पर डाका डालने वाले गिरोह को लेकर हर दिन ऐसे सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं, जो किसी के भी होश उड़ा दें। सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे चुके चंपत राय ने आखिरकार इस महाघोटाले के मुख्य सूत्रधार का नाम उजागर कर दिया है। चंपत राय ने अपने बेहद करीबी लोगों के सामने दर्द बयां करते हुए माना है कि इस पूरी साजिश के पीछे कोई और नहीं, बल्कि उनका सबसे भरोसेमंद साथी और ड्राइवर रामाशंकर यादव उर्फ 'टिन्नू यादव' था। चंपत राय ने भावुक होकर अपने करीबियों से कहा, "टिन्नू यादव ने धोखाधड़ी की इस खौफनाक साजिश को अंजाम देने के लिए मेरे अटूट भरोसे का फायदा उठाया।" लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं है; जब टिन्नू को लगा कि वह कानून के शिकंजे में फंसने वाला है, तो उसने खुद को बचाने के लिए एक राजनीतिक दांव खेला और पूरे मामले की जानकारी एक समाजवादी नेता को लीक कर दी।
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मंदिर के भीतर चल रहे इस काले खेल की परतें खुलती जा रही हैं। टिन्नू यादव को राम मंदिर के कलेक्शन बॉक्स (दानपात्र) से भक्तों द्वारा चढ़ाए गए कीमती सामान और नकदी को गिनती के लिए बेसमेंट के सुरक्षित कमरे तक ले जाने की जिम्मेदारी मिली हुई थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस गुप्त रूम की एक चाबी टिन्नू यादव के पास ही रहती थी, जबकि दूसरी चाबी बैंक कर्मचारियों के पास सुरक्षित थी। टिन्नू ने अकेले इस कांड को अंजाम नहीं दिया, बल्कि उसने बैंक के कर्मचारियों के साथ मिलकर एक गहरी मिलीभगत तैयार की। नोटों की गिनती के दौरान बड़ी चालाकी से रकम को गायब कर दिया जाता था और बाद में चोरी के इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा टिन्नू और बैंक कर्मचारियों के बीच आपस में बांट लिया जाता था। तीन दिन पहले जब अयोध्या पुलिस ने टिन्नू के घर पर छापा मारा, तो वहां से भारी मात्रा में कैश बरामद हुआ।
VIDEO | Ayodhya: Bar Association holds protest, files a fresh FIR against Champat Rai and other members of Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra Trust in Ram Mandir donation theft case. #AyodhyaNews #RamTempleDonationTheft
(Full video available on PTI Videos -… pic.twitter.com/rhrzFpXm3z— Press Trust of India (@PTI_News) July 2, 2026
इस मामले में पुलिस ने अब तक टिन्नू यादव समेत कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बरामदगी आरोपी अविनाश शुक्ला के ठिकानों से हुई है। पुलिस ने अविनाश की निशानदेही पर रिकॉर्ड 89 लाख रुपये का कैश बरामद किया है। जब जांच टीम अविनाश के दूसरे भाई अभिषेक से जुड़े एक स्थानीय योग केंद्र पर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गई। योग केंद्र चलाने वाली महिला सीमा तिवारी ने बताया कि 5 जून को जब पुलिस ने वहां छापा मारा, तो वहां अभिषेक के चार संदिग्ध बक्से रखे थे। जब उन बक्सों को खोला गया, तो कंबलों के अंदर नोटों की गड्डियां ठूंस-ठूंस कर छिपाई गई थीं। चौंकाने वाली बात यह थी कि इनमें से एक बक्से पर बाकायदा 'राम राज्य कोष' लिखा हुआ था।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में सस्पेंस तब और बढ़ गया जब सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल होने लगी। इस तस्वीर में मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला का भाई अमित शुक्ला अपने दोनों हाथों में नोटों के भारी-भरकम बंडल पकड़े हुए मुस्कुराता दिख रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह तस्वीर पिछले साल अगस्त की है। अयोध्या पुलिस अब इस वायरल तस्वीर की टाइमलाइन और सच्चाई की वैज्ञानिक जांच कर रही है और जल्द ही अमित शुक्ला को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुला सकती है। इस पूरे मामले में एक नया मोड़ तब आया जब योग केंद्र संचालक ने बताया कि छापे के बाद जब उन्होंने अभिषेक से इतने सारे कैश के बारे में पूछा, तो उसने अपने ही सगे भाई अविनाश शुक्ला पर कीचड़ उछालते हुए दावा किया कि अविनाश 'ड्रग्स के धंधे' (मादक पदार्थों की तस्करी) में शामिल था।
#WATCH | Ayodhya, UP | The members of the Faizabad Bar Association arrive at Ram Janmabhoomi police station to lodge an FIR concerning the alleged theft of donations at Ram Mandir.
The complaint names Champat Rai, Anil Mishra and Gopal Rao. pic.twitter.com/bEtHgYJkDs— ANI (@ANI) July 2, 2026
इस घोटाले की आंच कितनी तीव्र थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चोरी का मामला सार्वजनिक होते ही 27 जून को चंपत राय ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से और उनके साथ ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से तत्काल इस्तीफा दे दिया था। हाल ही में यूपी पुलिस ने चंपत राय का गोपनीय बयान भी दर्ज किया है। हालांकि, प्रशासन ने इस बात को पूरी तरह गुप्त रखा है कि उनसे कब, कहां और कितनी देर तक पूछताछ की गई। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने चंपत राय से चढ़ावे के मिलान, कथित हेराफेरी के समय के दस्तावेज़ और ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है। अब देखना यह है कि कानून के हाथ इस पवित्र स्थान को कलंकित करने वाले और कितने सफेदपोशों के गिरेबान तक पहुंचते हैं।
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