
कॉमेडियन समय रैना एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान उन पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत का कहना है कि समय रैना ने कोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया और अनुपालन को लेकर अदालत को गुमराह करने की कोशिश की। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दो सप्ताह के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड के आधार पर ऐसा मानने की पर्याप्त वजह है कि समय रैना ने अदालत के आदेशों का जानबूझकर उल्लंघन किया। अदालत ने यह भी कहा कि अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का दावा किया गया, जबकि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई हलफनामा मौजूद नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस आचरण को गंभीर मानते हुए 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और दो सप्ताह के भीतर राशि जमा करने का आदेश दिया। साथ ही 15 दिन के भीतर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का भी समय दिया गया है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कहा कि अदालत के निर्देशों के बावजूद समय रैना ने न तो SMA फाउंडेशन और न ही इस बीमारी से पीड़ित लोगों से संपर्क किया। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति को यूथ आइकॉन मानना चिंता का विषय है। वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि समय रैना ने हाल ही में नया शो शुरू किया है। उन्होंने कहा कि शो में किसी का नाम नहीं लिया गया, लेकिन अदालत के निर्देशों के पालन को लेकर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के समक्ष दिए गए आश्वासनों का पालन करना प्रत्येक पक्ष की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने कहा कि यदि निर्धारित समय के भीतर अनुपालन हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, तो आगे सख्त कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। फिलहाल समय रैना को दो सप्ताह के भीतर 3 लाख रुपये का जुर्माना जमा करना होगा। इसके साथ ही अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए अनुपालन हलफनामा भी दाखिल करना होगा। इस मामले पर अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है।
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