
Iqra Hasan: सहारनपुर में एक हत्या के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रंग ले लिया है। समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन और पुलिस प्रशासन के बीच मंगलवार को उस समय तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जब वह मोनू कश्यप हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर डीआईजी कार्यालय पहुंचीं। मामला इतना बढ़ गया कि सांसद ने खुद को हिरासत में लेने और लोकतंत्र की हत्या करने जैसे गंभीर आरोप लगा दिए, जबकि पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। घटना के बाद से जिले की राजनीति गरमा गई है और सोशल मीडिया पर भी इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, शामली के जसाला गांव निवासी मोनू कश्यप की मौत को लेकर परिजन लगातार हत्या का आरोप लगा रहे हैं। परिवार का कहना है कि पुलिस मामले में गंभीरता से कार्रवाई नहीं कर रही। इसी मुद्दे को लेकर सपा सांसद इकरा हसन मंगलवार दोपहर पीड़ित परिवार के साथ सहारनपुर स्थित डीआईजी कार्यालय पहुंचीं। इकरा हसन का आरोप है कि वह सिर्फ पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए अधिकारियों से मिलने गई थीं, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। सांसद का कहना है कि उन्हें महिला थाने में बैठाकर दबाव बनाने की कोशिश की गई।
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डीआईजी कार्यालय के बाहर उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब सांसद के काफिले को हटाने को लेकर पुलिस और समर्थकों के बीच बहस शुरू हो गई। पुलिस का कहना है कि काफिले की गाड़ियों की वजह से रास्ता बाधित हो रहा था और लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही थी। इसी कारण वाहनों को हटवाया गया। हालांकि इकरा हसन ने इस दावे को गलत बताया। उन्होंने कहा कि उनकी सभी गाड़ियां निर्धारित पार्किंग में खड़ी थीं और वहां किसी प्रकार का जाम नहीं लगा था। सांसद ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जानबूझकर उन्हें परेशान करने की कोशिश की।
घटनाक्रम के दौरान महिला थाने में भी माहौल गर्म हो गया। आरोप है कि वहां मौजूद एसएचओ ने सांसद का हाथ पकड़ने की कोशिश की, जिस पर इकरा हसन भड़क उठीं। उन्होंने पुलिस अधिकारी को सख्त लहजे में कहा, “हाथ मत लगाइए, दूर रहिए।” इस दौरान जब पुलिसकर्मियों ने उन्हें पानी देने की कोशिश की तो सांसद ने नाराजगी जताते हुए पानी लेने से भी इनकार कर दिया। करीब सात मिनट तक महिला थाने में रुकने के बाद वह वहां से बाहर निकल गईं।
मामला तब और ज्यादा बढ़ गया जब सपा समर्थकों की गिरफ्तारी की खबर सामने आई। इससे नाराज इकरा हसन सीधे सदर थाने पहुंच गईं और वहीं धरने की मुद्रा में बैठ गईं। उन्होंने साफ कहा कि जब तक गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को छोड़ा नहीं जाएगा, वह वहां से नहीं हटेंगी। थाने में मौजूद पुलिस अधिकारियों और सांसद के बीच भी तीखी बातचीत हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता थाने पहुंच गए, जिससे इलाके में राजनीतिक हलचल और बढ़ गई।
वहीं सहारनपुर पुलिस ने सांसद के सभी आरोपों को निराधार बताया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी को हिरासत में नहीं लिया गया था और पूरी कार्रवाई केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई। पुलिस के मुताबिक, सड़क पर भीड़ और वाहनों की वजह से यातायात प्रभावित हो रहा था, इसलिए व्यवस्था संभालने के लिए कदम उठाए गए।
इस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बता रहा है, जबकि प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और ज्यादा राजनीतिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि सपा कार्यकर्ता इस मुद्दे को लेकर आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। फिलहाल, मोनू कश्यप मौत मामले की जांच और सांसद-पुलिस विवाद दोनों पर लोगों की नजर बनी हुई है।
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