
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को उस समय असामान्य स्थिति पैदा हो गई, जब एक याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान अदालत की कार्यवाही बाधित कर दी। उसने खुद को "सॉवरेन" बताते हुए न्यायाधीशों को "ज्यूडिशियल सर्वेंट" कहा और कथित तौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के साथ कोर्ट रूम में कागज फेंक दिए। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर उसे अदालत से बाहर ले गए।
यह घटना शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता प्रभाल प्रताप स्वयं अदालत में पेश हुए और न्यायाधीशों से लखनऊ के एक एएसपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश देने की मांग की।
जब उन्होंने अदालत को आदेश देने की शैली में अपनी बात रखी, तो जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने आश्चर्य जताते हुए पूछा, "क्या आप हमें आदेश दे रहे हैं?" इसके बाद याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और कोर्ट रूम में कागज उछाल दिए, जिससे कुछ देर के लिए कार्यवाही प्रभावित हुई।
भारत के सुप्रीम कोर्ट के अंदर का नाटकीय दृश्य।
"न्यायिक अधिकारी महोदय, मैं आपको आदेश देता हूँ कि लखनऊ के ACP विकास नगर के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करें"pic.twitter.com/4dlXJppKRr— Rajat Kumar (@rajatrampur22) July 10, 2026
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घटना के तुरंत बाद अदालत की सुरक्षा टीम ने याचिकाकर्ता को कोर्ट रूम से बाहर ले जाकर कुछ समय के लिए परिसर स्थित सुरक्षा कार्यालय में रखा।
हालांकि, इस व्यवहार के बावजूद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अवमानना (Contempt) या किसी अन्य दंडात्मक कार्रवाई की शुरुआत नहीं की। आदेश सुनाते हुए जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि अदालत इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करना चाहती। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि संबंधित व्यक्ति "काफी परेशान" और "हताश" प्रतीत होता है तथा अदालत को उसके प्रति सहानुभूति है।
प्रभाल प्रताप ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। मामला लखनऊ की विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (कस्टम) अदालत के आदेश से जुड़ा था, जिसमें उनकी शिकायत को एफआईआर दर्ज कराने के बजाय निजी शिकायत (Private Complaint) के रूप में माना गया था।
हाई कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता के पास वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी। इस तरह कानूनी विवाद समाप्त हो गया, लेकिन कोर्ट रूम में हुई यह घटना पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रही।
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