10 साल पुराना वो खौफनाक पुलिस भर्ती केस...जिसके फैसले ने पूरे देश को चौंका दिया!

Published : Jun 09, 2026, 12:14 PM IST
supreme court premarital sex consensual relationship character moral turpitude government jobs india consent judgment

सार

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: क्या सहमति से बने रिश्ते अब “चरित्र दोष” का सबूत माने जाएंगे? क्या शादी न होने पर हर रिश्ता अपने आप “धोखा” बन जाता है? क्या टूटे संबंध नौकरी और नैतिकता तय कर सकते हैं? क्या बिना सबूत सिर्फ अनुमान से किसी को दोषी ठहराया जा सकता है? 

Supreme Court: देश की सर्वोच्च अदालत ने एक ऐसा क्रांतिकारी फैसला सुनाया है जो आने वाले समय में आपराधिक मामलों से लेकर सरकारी नौकरियों तक के हर नियम को पूरी तरह बदलकर रख देगा। सुप्रीम कोर्ट ने समाज की उन पुरानी, रूढ़िवादी और सख्त धारणाओं को सीधे चुनौती दी है जो किसी के असफल निजी रिश्ते के आधार पर उसके चरित्र का फैसला कर देती थीं। शादी से पहले के रिश्ते, आपसी सहमति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मिलन बिंदु पर खड़े एक बेहद संवेदनशील सवाल का जवाब देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि दो अविवाहित वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध किसी के चरित्र को आंकने का पैमाना नहीं हो सकते।

क्या टूटा हुआ रिश्ता अपने आप में एक 'धोखा' है? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल

जस्टिस मनमोहन और मनोज मिश्रा की बेंच ने एक ऐसे विवाद की गहराई में जाकर सुनवाई की, जो सामाजिक कलंक और कानूनी दांव-पेंच के बीच फंसा हुआ था। अदालत ने इस खतरनाक प्रवृत्ति के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी, जिसमें सिर्फ इसलिए किसी व्यक्ति को कसूरवार मान लिया जाता है क्योंकि उसका प्रेम संबंध आखिरकार शादी में नहीं बदल पाया। 'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने अपने फैसले में बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा: "आपसी सहमति से दो अविवाहित वयस्कों के बीच शारीरिक संबंध अपने आप में उस रिश्ते में शामिल व्यक्ति के चरित्र के बारे में कोई नकारात्मक राय बनाने का आधार नहीं हो सकते और न ही होने चाहिए। ऐसा कोई कानून नहीं है जो दो वयस्कों को अपनी पसंद का रिश्ता बनाने से रोकता हो। हर रिश्ता शादी में नहीं बदलता। इसलिए, सिर्फ इसलिए कि रिश्ता शादी में नहीं बदला, यह मानने का कोई आधार नहीं है कि एक पक्ष ने दूसरे को धोखा दिया है।"

दस साल पुराना वो पुलिस भर्ती विवाद, जिसने कानून को सोचने पर मजबूर किया

यह ऐतिहासिक टिप्पणी तब सामने आई जब सुप्रीम कोर्ट तेलंगाना के एक पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती उम्मीदवार, गजूला थिरुपति के भाग्य का फैसला कर रहा था। एक दशक से भी पहले, थिरुपति को 'स्टाइपेंडरी कैडेट ट्रेनी पुलिस कॉन्स्टेबल' के पद के लिए अस्थायी रूप से चुना गया था। उन्होंने अपने आवेदन में ईमानदारी से बताया था कि 2014 में उनके खिलाफ उनकी एक पड़ोसी महिला के साथ रिश्ते को लेकर आपराधिक मामला दर्ज हुआ था। हालांकि, 2015 में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया और लोक अदालत में मामला हमेशा के लिए सुलझ गया। इसके बावजूद, तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड ने इस पुराने मामले को 'नैतिक अधमता' (moral turpitude) माना और उनका चयन रद्द कर दिया। यह विवाद न्यायपालिका के कई स्तरों से गुजरा और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां कोर्ट ने साफ किया कि लोक अदालत के समझौते को अपराध की स्वीकारोक्ति नहीं माना जा सकता।

बदलते समय की नई हकीकत: संस्थानों को पुरानी सोच छोड़नी होगी

सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी प्रशासनिक और सरकारी संस्थानों को आईना दिखाते हुए कहा कि सामाजिक सच्चाइयां अब तेजी से बदल चुकी हैं। अधिकारियों को लोगों के आचरण का आकलन करते समय आज के बदलते समाज के प्रति संवेदनशील होना चाहिए, न कि पुरानी और सख्त धारणाओं पर निर्भर रहना चाहिए। अदालत ने दोहराया कि जब दो बालिग लोग सालों तक एक-दूसरे के साथ रिश्ते में रहते हैं, तो यह साफ तौर पर आपसी सहमति का मामला होता है। ऐसे मामलों में बाद में लगाए गए 'शादी के झूठे वादे' जैसे आरोपों के आधार पर किसी के करियर और चरित्र को तबाह नहीं किया जा सकता।

सहमति, निजी आजादी और आधुनिक भारत: अनुमानों पर नहीं चलेंगे नियम

इस फैसले का असली महत्व सिर्फ गजूला थिरुपति की नौकरी बहाल होने में नहीं है, बल्कि उस व्यापक संदेश में है जो देश के करोड़ों युवाओं की निजी आजादी की रक्षा करता है। सालों से टूटे हुए रिश्तों के सामाजिक और कानूनी दंश झेल रहे लोगों के लिए यह फैसला एक ढाल की तरह आया है। सुप्रीम कोर्ट ने नियोक्ताओं और पुलिस भर्ती बोर्ड जैसी संस्थाओं को सख्त लहजे में आगाह किया है कि वे सिर्फ अनुमानों और कयासों के आधार पर किसी उम्मीदवार के चरित्र के बारे में नकारात्मक राय नहीं बना सकते। आधुनिक भारत में रिश्तों के बदलते स्वरूप और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर दिया गया यह फैसला देश के कानूनी इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

PREV

Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

TMC: 'सिर कटेगा पर झुकूंगी नहीं', कौन है TMC की वो बागी सांसद जिसने ममता को सुनाई खरी-खरी
₹60,000 किराया देकर कैसी जिंदगी जी रहा है बेंगलुरु का यह कपल? सुविधाएं देख लोग बोले- पैसा वसूल है!