
नई दिल्ली: देश के सबसे चर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले 'मेघालय हनीमून मर्डर केस' में एक ऐसा हैरान करने वाला मोड़ सामने आया है, जिसने देश की सर्वोच्च अदालत से लेकर कानून के जानकारों तक को हैरत में डाल दिया है। अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। यह फैसला तब आया है जब पुलिस की एक बेहद गंभीर और अजीबोगरीब लापरवाही के कारण 10 महीने जेल में काटने के बाद आरोपी सलाखों से बाहर आ चुकी है। इस सनसनीखेज हत्याकांड, पुलिस के उस 'ब्लंडर' (बड़ी गलती) और अदालती कार्यवाही की पूरी डिटेल स्टोरी यहां पढ़ें।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि चूंकि सोनम रघुवंशी पहले ही जेल से रिहा हो चुकी हैं, इसलिए फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की जरूरत नहीं है। अदालत ने सोनम को नोटिस जारी करते हुए मेघालय सरकार की अपील पर जवाब मांगा और संकेत दिया कि आगे की सुनवाई में ट्रायल की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। यानी अदालत ने ज़मानत को अंतिम राहत नहीं माना, बल्कि मामले को आगे विस्तृत सुनवाई के लिए खुला रखा है।
सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि सोनम पर बेहद गंभीर आरोप हैं और केवल तकनीकी त्रुटियों के आधार पर उन्हें राहत नहीं दी जा सकती। उन्होंने अदालत के सामने पुणे के चर्चित 'फोर्ट मर्डर केस' का भी उल्लेख किया और कहा कि गंभीर आपराधिक मामलों में अदालतों को व्यापक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
🚨 Supreme Court Questions Bail in Meghalaya Honeymoon Murder Case
A shocking courtroom hearing has put the spotlight back on one of India's most sensational murder cases.
The prosecution alleged that the murder was meticulously planned, claiming the wife travelled to… pic.twitter.com/uodub1gpes— LawChakra (@LawChakra) July 3, 2026
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज बने। शिलांग की ट्रायल कोर्ट ने पाया था कि जांच एजेंसी ने गिरफ्तारी मेमो, केस डायरी, चेकलिस्ट और अन्य रिकॉर्ड में हत्या से संबंधित सही कानूनी धारा 403(1) का उल्लेख नहीं किया। दस्तावेजों में बार-बार भारतीय न्याय संहिता की गलत धारा लिखी गई थी। अदालत ने माना कि यह केवल टाइपिंग या क्लेरिकल मिस्टेक नहीं कही जा सकती, क्योंकि किसी भी दस्तावेज में आरोपी को स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया था कि उसे हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया जा रहा है। इसी आधार पर अप्रैल में ट्रायल कोर्ट ने सोनम को ज़मानत दे दी थी।
मेघालय सरकार ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी और कहा कि यह केवल टाइपिंग की गलती थी, जिससे आरोपी को कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ। लेकिन हाई कोर्ट ने सरकार की दलील स्वीकार नहीं की। अदालत ने सवाल उठाया कि एक जैसी गलती कई आधिकारिक दस्तावेजों में कैसे दोहराई गई। हाई कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कुछ दस्तावेज मानो किसी पुराने टेम्पलेट से कॉपी किए गए थे। यहां तक कि रिकॉर्ड में एक ऐसा उल्लेख भी मिला, जिसमें आरोपी को सशस्त्र बलों से भगोड़ा (डेज़र्टर) बताया गया था, जबकि उसका इस मामले से कोई संबंध नहीं था। अदालत ने इसे जांच एजेंसी की गंभीर लापरवाही माना।
इंदौर निवासी राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी की शादी पिछले साल 11 मई को हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद दोनों 20 मई को मेघालय के सोहरा हनीमून मनाने पहुंचे। तीन दिन बाद दोनों रहस्यमय ढंग से लापता हो गए। 2 जून को राजा रघुवंशी का शव बरामद हुआ। इसके बाद 9 जून को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से सोनम को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान उसके कथित प्रेमी राज सिंह कुशवाहा को भी गिरफ्तार किया गया। यह मामला शुरुआत से ही देशभर में चर्चा का विषय बना रहा।
#WATCH | Delhi | On the Supreme Court refusing to stay bail granted to Sonam Raghuvanshi, key accused in the Raja Raghuvanshi murder case, Advocate Abhay Singh, counsel representing Sonam Raghuvanshi, says, “The state of Meghalaya has challenged the order of the High Court today.… pic.twitter.com/pbegFV5FeG
— ANI (@ANI) July 3, 2026
ट्रायल कोर्ट के इस फैसले से बौखलाई मेघालय सरकार फौरन हाई कोर्ट पहुंची। सरकार की ओर से दलील दी गई कि यह सिर्फ एक मानवीय भूल थी और इससे आरोपी को कोई कानूनी नुकसान नहीं पहुंचा। लेकिन हाई कोर्ट के जस्टिस डब्ल्यू डिएंगडोह की सिंगल बेंच ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।
| अदालत का स्तर | सरकार की दलील और कोर्ट का कड़ा रुख |
| मेघालय हाई कोर्ट | कोर्ट ने सवाल उठाया कि एक ही गलती बार-बार हर सरकारी दस्तावेज में कैसे आई? |
| कॉपी-पेस्ट का खेल | जांच रिकॉर्ड के कुछ हिस्से स्टैंडर्ड टेम्प्लेट से सीधे कॉपी किए गए थे, जिसमें बिना सोचे-समझे सोनम को 'सशस्त्र बलों से भागा हुआ भगोड़ा (डेजर्टर)' तक लिख दिया गया था। |
| अदालत की टिप्पणी | यह साफ है कि कागजी कार्रवाई बिना दिमाग लगाए की गई है, जो जांच एजेंसी की गैर-जिम्मेदारी को दिखाता है। |
हाई कोर्ट से झटका लगने के बाद मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करने के लिए पुणे के चर्चित 'लोहगढ़ किला मर्डर केस' (केतन अग्रवाल हत्याकांड) का हवाला दिया। उन्होंने कोर्ट से कहा कि सोनम पर अपने ही पति की हत्या का बेहद संगीन आरोप है, इसलिए उसे महज तकनीकी और क्लर्कल गलतियों के आधार पर खुला नहीं छोड़ा जा सकता। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मेघालय पुलिस की लापरवाही और हाई कोर्ट के आदेश पर गहरी चिंता तो जताई, लेकिन सोनम रघुवंशी की जमानत पर तुरंत रोक लगाने से मना कर दिया क्योंकि वह पहले ही रिहा हो चुकी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वे इस मामले में दखल देने से पहले ट्रायल की प्रगति और जमीनी हकीकत को देखना चाहेंगे।
फिलहाल सोनम रघुवंशी को मिली ज़मानत बरकरार है, लेकिन यह मामला अभी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से साफ है कि अदालत तकनीकी खामियों, जांच प्रक्रिया और ट्रायल-तीनों पहलुओं की गहराई से समीक्षा करना चाहती है। ऐसे में इस हाई-प्रोफाइल केस में आने वाले दिनों की सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है।
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