दिल्ली मेट्रो बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: रविवार को स्पेशल सुनवाई, 3 बड़े अफसरों पर अवमानना की तलवार

Published : Oct 10, 2026, 08:44 PM IST
Supreme Court

सार

Delhi Metro Shutdown Update: दिल्ली मेट्रो बंद होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त है। अदालत इस मामले में रविवार को विशेष सुनवाई करेगा। इसमें वमानना याचिका पर भी सुनवाई होगी।

Supreme Court Special Hearing on Delhi Metro Closed: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों के बीच दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन ठप किए जाने का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। दिल्ली मेट्रो स्टेशनों को बंद और ट्रेनों को रद्द किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट रविवार, 11 अक्टूबर को विशेष सुनवाई (Special Sitting) करेगा। अदालत ये सुनवाई उस अवमानना याचिका (Contempt Petition) पर कर रहा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने 9 अक्टूबर के अदालती आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए मेट्रो और रेल सेवाओं पर मनमानी पाबंदियां जारी रखीं।

रविवार को सुप्रीम कोर्ट में किस मामलों की सुनवाई होगी?

रविवार की इस स्पेशल सुनवाई के लिए जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की दो सदस्यीय विशेष पीठ गठित की गई है। ये बेंच एक साथ दो अहम मामलों की सुनवाई करेगी। पहला मामला अवमानना याचिका से जुड़ा है। वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशन बंद रखने और ट्रेनें रद्द करने के फैसले सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के खिलाफ थे। दूसरा मामला प्रदर्शन के दौरान लोगों को हिरासत में लिए जाने से जुड़ा है। वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने इस संबंध में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की है।

3 अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की मांग

वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका में तीन सीनियर अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है। इनमें केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और DMRC की चेयरपर्सन डी थारा शामिल हैं। याचिका में आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने और ट्रेनों की सेवाओं को रद्द करने जैसी पाबंदियां जारी रहीं। याचिकाकर्ता का कहना है कि कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह रोकने के बजाय जरूरत के अनुसार नियंत्रित करने की बात कही थी।

दिल्ली मेट्रो और ट्रेनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था?

इस विवाद की शुरुआत 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई से जुड़ी है। मामला एमए बेबी बनाम भारत संघ के तहत आया था। इसमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सार्वजनिक परिवहन पर लगाई गई पाबंदियों का मुद्दा उठाया गया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी ऐसे निर्देशों का जिक्र आया, जिनमें 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने और नई दिल्ली तथा हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों पर रोक लगाने से जुड़ी पाबंदियां शामिल थीं। बाद में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने बंद किए जाने वाले स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इन पाबंदियों पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि मेट्रो और दूसरी रेल सेवाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सेवाओं को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन पाबंदियां जरूरत के हिसाब से और उचित होनी चाहिए।

मेट्रो-ट्रेन बंद होने से दिल्ली के आम लोगों को परेशानी

मेट्रो और ट्रेनें दिल्ली में रोजाना लाखों लोगों के सफर का सबसे अहम सोर्स है। ऐसे में कई स्टेशनों को बंद रखने या रेल सेवाओं पर पाबंदी लगाने से नौकरी पर जाने वाले लोगों, छात्रों, मरीजों और दूसरे यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। अवमानना याचिका में भी दावा किया गया है कि परिवहन सेवाओं पर जारी पाबंदियों से यात्रियों को परेशानी हुई और राजधानी में आम जनजीवन बाधित हुआ।

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