
Suvendu Adhikaris First Cabinet Meeting: पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय बाद सत्ता परिवर्तन हुआ है और नई सरकार बनते ही फैसलों की रफ्तार भी तेज दिखाई देने लगी है। मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने पहली कैबिनेट बैठक में कई ऐसे निर्णय लिए, जिनका सीधा असर राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य योजनाओं, सीमा सुरक्षा और सरकारी नौकरियों पर पड़ने वाला है।
खास बात यह रही कि नई सरकार ने उन योजनाओं और प्रक्रियाओं को भी दोबारा शुरू करने का संकेत दिया है, जो पिछले कुछ वर्षों से विवादों या राजनीतिक कारणों से ठप मानी जा रही थीं। राज्य सचिवालय में आयोजित इस अहम बैठक में कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक के बाद सरकार की ओर से छह बड़े फैसलों की जानकारी सामने आई, जिनकी चर्चा पूरे बंगाल की राजनीति में हो रही है।
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नई सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े मुद्दों पर बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट बैठक में फैसला लिया गया कि सीमा पर फेंसिंग के लिए बीएसएफ को जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी। सरकार ने इस काम को 45 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है। सीमा सुरक्षा को लेकर लंबे समय से यह मुद्दा उठता रहा था कि कई इलाकों में जमीन अधिग्रहण और प्रशासनिक अनुमति की वजह से फेंसिंग का काम अटका हुआ है। अब नई सरकार ने इसे प्राथमिकता देने का फैसला किया है।
शुभेंदु अधिकारी सरकार का दूसरा बड़ा फैसला स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा है। पश्चिम बंगाल में अब केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना लागू की जाएगी। इससे पहले ममता बनर्जी सरकार ने राज्य में आयुष्मान भारत लागू नहीं किया था और उसकी जगह ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना चलाई जा रही थी। नई सरकार का कहना है कि आयुष्मान भारत लागू होने से गरीब और मध्यम वर्ग के लाखों परिवारों को देशभर के अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिल सकेगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और विकल्प दोनों बढ़ेंगे।
कैबिनेट बैठक में केंद्र सरकार की विश्वकर्मा योजना और उज्ज्वला योजना को भी लागू करने का फैसला लिया गया। विश्वकर्मा योजना के जरिए पारंपरिक कारीगरों और छोटे कामगारों को आर्थिक सहायता और ट्रेनिंग मिलेगी, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन और रसोई सुविधा का लाभ दिया जाएगा। राजनीतिक जानकार इसे केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय की शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं।
नई सरकार ने सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को भी राहत देने का संकेत दिया है। कैबिनेट बैठक में फैसला लिया गया कि लंबे समय से रुकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं को दोबारा शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही सरकारी नौकरियों में उम्मीदवारों को पांच साल का रिलेक्सेशन देने का निर्णय भी लिया गया है। माना जा रहा है कि भर्ती विवाद और लंबी कानूनी प्रक्रियाओं की वजह से प्रभावित युवाओं को इसका फायदा मिल सकता है।
पश्चिम बंगाल में स्थगित की गई जनगणना प्रक्रिया को भी दोबारा लागू करने का फैसला लिया गया है। सरकार का कहना है कि विकास योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों के लिए सटीक जनसंख्या आंकड़े जरूरी हैं। इसलिए अब जनगणना से जुड़े आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
नई सरकार ने यह भी साफ किया कि पिछली सरकार की मौजूदा योजनाओं को अचानक बंद नहीं किया जाएगा। इससे उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो पहले से राज्य की विभिन्न योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। सरकार का कहना है कि जिन योजनाओं से जनता को सीधा फायदा मिल रहा है, उन्हें जारी रखा जाएगा और जरूरत के हिसाब से उनमें बदलाव किया जाएगा।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में हुई इस बैठक में दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निशीथ प्रमाणिक समेत कई नेता मौजूद रहे। हालांकि अभी तक विभागों का बंटवारा नहीं किया गया है। सरकार ने घोषणा की है कि अगले सोमवार को फिर से कैबिनेट बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें विभागों और आगे की नीतियों पर चर्चा हो सकती है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने इस बार बड़ी जीत दर्ज करते हुए 207 सीटों पर कब्जा किया। वहीं तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों तक सिमट गई। सबसे बड़ा राजनीतिक झटका तब लगा जब टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से चुनाव हार गईं। उन्हें शुभेंदु अधिकारी ने हराया। इसके अलावा कांग्रेस को एक सीट, हुमायूं कबीर की पार्टी को दो सीटें, सीपीआईएम को एक और आईएसएफ को एक सीट मिली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार के शुरुआती फैसले आने वाले समय में बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक दिशा दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।
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