थाईलैंड में 9:05 बजे क्या हुआ? ट्रेन, आग और 22 लाशों की डरावनी कहानी, देखिए तस्वीरों और वीडियों में

Published : Jan 14, 2026, 10:54 AM IST

Thailand Train Disaster: क्या यह सिर्फ हादसा था या बड़ी लापरवाही? थाईलैंड में हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट की क्रेन चलती ट्रेन पर गिर गई। ट्रेन पटरी से उतरी, आग लगी और कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई। जांच जारी है।

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Thailand Train Derailment: थाईलैंड से आई एक बेहद डरावनी खबर ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। बुधवार सुबह एक चलती यात्री ट्रेन पर अचानक क्रेन गिर गई, जिससे ट्रेन पटरी से उतर गई और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए। इस हादसे में कम से कम 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 से ज्यादा यात्री घायल बताए जा रहे हैं। यह हादसा थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक से करीब 230 किलोमीटर उत्तर-पूर्व, नाखोन रत्चासिमा प्रांत के सिखियो जिले में हुआ। ट्रेन उबोन रत्चाथानी प्रांत की ओर जा रही थी, तभी यह भयावह दुर्घटना सामने आई।

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High Speed Rail Project बना हादसे की वजह?

स्थानीय पुलिस और रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस जगह यह ट्रेन गुजर रही थी, वहां हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट का काम चल रहा था। इसी प्रोजेक्ट के तहत पुल निर्माण के लिए एक बड़ी क्रेन लगाई गई थी। अचानक तकनीकी खराबी या लापरवाही के चलते क्रेन संतुलन खो बैठी और सीधे चलती ट्रेन पर गिर गई। टक्कर इतनी तेज़ थी कि ट्रेन पटरी से उतर गई और कुछ डिब्बों में आग भी लग गई।

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ट्रेन में आग कैसे लगी और हालात कितने खराब थे?

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, क्रेन गिरते ही तेज धमाका हुआ और कुछ ही सेकंड में ट्रेन के कई डिब्बों में धुआं भर गया। यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोग डिब्बों में फंस गए और बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला। थाईलैंड सरकार के जनसंपर्क विभाग ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन शुरुआती कुछ मिनट बेहद खतरनाक थे। कई यात्रियों को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया।

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मौतों की संख्या पर क्यों है भ्रम?

शुरुआती रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या 12 बताई जा रही थी, लेकिन बाद में AFP न्यूज़ एजेंसी ने स्थानीय पुलिस प्रमुख थचपोन चिन्नवोंग के हवाले से पुष्टि की कि कम से कम 22 लोगों की मौत हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ घायलों की हालत गंभीर है, इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता।

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Rescue Operation: बचाव कार्य में क्या चुनौतियां आईं?

हादसे के तुरंत बाद कई रेस्क्यू टीमें, फायर ब्रिगेड और मेडिकल यूनिट्स मौके पर पहुंचीं। सबसे बड़ी चुनौती थी-ट्रेन के उन डिब्बों तक पहुंचना जो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके थे। कई यात्रियों को काट-छांट कर बाहर निकाला गया। अधिकारियों ने बताया कि बचाव कार्य कई घंटों तक चला।

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क्या यह हादसा टाला जा सकता था?

यह ट्रेन हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि निर्माण सुरक्षा, प्रशासनिक लापरवाही और मानव जीवन की कीमत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। हाई-स्पीड रेल जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अगर सुरक्षा के बिना आगे बढ़ेंगे, तो ऐसे हादसे दोहराए जा सकते हैं। जांच जारी है, लेकिन 22 जिंदगियां हमेशा के लिए चली गईं और यही इस खबर की सबसे डरावनी सच्चाई है।

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