6 साल बाद बड़ा फैसला: जयराज-बेनिक्स कस्टोडियल डेथ केस में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी

Published : Apr 06, 2026, 08:49 PM IST
Thoothukudi Custodial Death Case Madurai Court Awards Death Sentence to 9 Policemen in Jayaraj Benicks Case

सार

Thoothukudi Custodial Death Case: तमिलनाडु के तूतीकोरिन में हुए चर्चित जयराज और बेनिक्स कस्टोडियल डेथ केस में मदुरै कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा दी है। जानिए क्या था पूरा मामला, CBI जांच में क्या सामने आया और कोर्ट ने क्या कहा।

तमिलनाडु के तूतीकोरिन (Thoothukudi) जिले में साल 2020 में हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। लॉकडाउन के दौरान एक छोटी सी दुकान को लेकर गिरफ्तार किए गए पिता-पुत्र की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। अब लगभग छह साल बाद इस मामले में अदालत का बड़ा फैसला आया है।

मदुरै कोर्ट ने 9 पुलिसकर्मियों को सुनाई फांसी की सजा

Madurai District Court ने सोमवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई। यह सजा व्यापारी P Jayaraj और उनके बेटे J Benicks की हिरासत में हुई मौत के मामले में दी गई है।

जिन पुलिसकर्मियों को सजा सुनाई गई है, उनमें इंस्पेक्टर श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर बालकृष्णन और रघु गणेश के साथ पुलिसकर्मी मुरुगन, समदुरई, मुथुराजा, चेल्लदुरई, थॉमस फ्रांसिस और वेलुमुथु शामिल हैं। अदालत ने इस मामले को सत्ता के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण बताया। साथ ही यह भी कहा कि राज्य में कई ईमानदार पुलिस अधिकारी भी हैं और इस फैसले से पुलिस व्यवस्था में डर का माहौल पैदा नहीं होगा।

कोर्ट ने कहा – पढ़कर ही दिल कांप जाता है

फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि पिता और बेटे को कपड़े उतरवाकर बेरहमी से पीटा गया। इस घटना का विवरण पढ़कर ही दिल कांप जाता है। अदालत ने इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” यानी बेहद दुर्लभ और जघन्य अपराध की श्रेणी में माना। इसी आधार पर अधिकतम सजा देने का फैसला किया गया।

CBI ने कहा था – यह समाज की आत्मा को झकझोरने वाला अपराध

इस मामले की जांच Central Bureau of Investigation ने की थी। जांच एजेंसी ने अदालत से कहा था कि यह अपराध बेहद क्रूर था और इसमें मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ है। CBI के मुताबिक पीड़ितों को पुलिस स्टेशन में हथियारों और डंडों से बुरी तरह पीटा गया। तीन प्रत्यक्ष गवाहों की गवाही ने भी इस आरोप को मजबूत किया।

19 जून 2020 की रात से शुरू हुई थी पूरी कहानी

यह घटना 19 जून 2020 की है। उस समय देश में कोरोना लॉकडाउन चल रहा था।

पुलिस ने आरोप लगाया कि पिता-पुत्र ने लॉकडाउन नियमों के बावजूद अपनी मोबाइल की दुकान खुली रखी थी। इसी आरोप में उन्हें सथानकुलम पुलिस थाना ले जाया गया। बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, लेकिन कुछ ही दिनों में दोनों की मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस स्टेशन में रातभर उन्हें बेरहमी से पीटा गया। उनके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे और भारी रक्तस्राव की भी बात सामने आई थी।

महिला कांस्टेबल की गवाही बनी अहम सबूत

जांच के दौरान एक महिला कांस्टेबल की गवाही बेहद अहम साबित हुई। उसने बताया कि पिता-पुत्र को पूरी रात पीटा गया था और पुलिस स्टेशन की मेजों और लाठियों पर खून के निशान भी थे। जांच के दौरान एक और बड़ी समस्या सामने आई। पुलिस स्टेशन के CCTV फुटेज सुरक्षित नहीं थे। बताया गया कि रिकॉर्डिंग सिस्टम रोज अपने-आप डिलीट हो जाता था और उस दिन की फुटेज भी सुरक्षित नहीं रखी गई थी।

पांच साल तक चली लंबी सुनवाई

इस मामले की सुनवाई पांच साल से ज्यादा समय तक चली। ट्रायल के दौरान 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अंत में अदालत ने सबूतों और गवाहियों के आधार पर फैसला सुनाते हुए दोषी पुलिसकर्मियों को मौत की सजा दी।

देशभर में उठा था पुलिस हिरासत पर सवाल

2020 में जब यह घटना सामने आई थी, तब पूरे देश में गुस्सा फैल गया था। सोशल मीडिया से लेकर मानवाधिकार संगठनों तक हर जगह पुलिस हिरासत में होने वाली हिंसा पर सवाल उठे थे। अब अदालत के इस फैसले को कई लोग न्याय की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं, हालांकि कानूनी प्रक्रिया अभी आगे भी जारी रह सकती है।

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