Tibet Protest: जिनेवा में UN के बाहर तिब्बतियों का प्रदर्शन, चीन के नए कानून का विरोध

Published : Oct 01, 2026, 11:52 PM IST
Tibetans Hold Massive Protest Against Chinese Ethnic Unity Law At UN Geneva

सार

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर तिब्बती कार्यकर्ताओं ने चीन के नए 'जातीय एकता कानून' के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि यह कानून तिब्बती भाषा, संस्कृति और पहचान को खत्म कर देगा। उन्होंने दुनिया से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की है।

तिब्बती कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के बाहर चीन के नए कानून के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। चीन ने हाल ही में 'जातीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने वाला कानून' लागू किया है। प्रदर्शनकारियों को डर है कि इस कानून से तिब्बती भाषा, संस्कृति, धर्म और उनकी पहचान खतरे में पड़ जाएगी। यह प्रदर्शन UN मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान हुआ। यूरोप के कई देशों से आए तिब्बती समुदाय के लोगों और कार्यकर्ताओं ने इसमें हिस्सा लिया। उन्होंने दुनिया भर के देशों से तिब्बत के हालात पर ध्यान देने की मांग की।

जबरन स्कूल भेजने और जानकारी रोकने का आरोप

मध्य और पूर्वी यूरोप के लिए दलाई लामा की प्रतिनिधि थिनले चुक्की ने चीन पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 10 लाख से ज्यादा तिब्बती बच्चों को जबरन आवासीय स्कूलों (हॉस्टल) में भेजा जा रहा है। चुक्की ने दावा किया, "10 लाख से ज्यादा तिब्बती बच्चों को जबरन आवासीय स्कूलों में रखा जा रहा है।" उन्होंने बताया कि चीनी सरकार इन बच्चों को उनके माता-पिता से अलग कर रही है। बच्चों को उनके धर्म, भाषा और सांस्कृतिक गतिविधियों से दूर रखा जा रहा है। चुक्की ने यह भी कहा कि तिब्बती इलाकों से सही जानकारी बाहर नहीं आने दी जा रही है। उन्होंने नेपाल-तिब्बत सीमा पर हाल ही में आई बाढ़ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नेपाल की तरफ हुई तबाही की खबरें तो सबको मिलीं, लेकिन तिब्बत की तरफ के हालात की बहुत कम जानकारी बाहर आ पाई। उन्होंने UN से तिब्बतियों की आवाज उठाने और उनकी चिंताओं को दूर करने की अपील की।

अंतरराष्ट्रीय समर्थन और UN से अपील

तिब्बती कार्यकर्ता ताशी डेलेक ने बताया कि तिब्बती समुदाय के लोग चीनी कानून का विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए हैं। उन्होंने UN को अपनी याचिका और अपील पत्र भी सौंपे। फ्रांस तिब्बत एसोसिएशन की संस्थापक मार्सेल रॉक्स ने बताया कि फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड और अन्य देशों के समर्थक भी तिब्बत का साथ देने के लिए इस प्रदर्शन में शामिल हुए हैं।

क्या है चीन का नया जातीय एकता कानून?

चीन ने 12 मार्च 2026 को 'जातीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने वाला कानून' पास किया था। यह कानून 1 जुलाई से लागू हो गया है। बीजिंग का कहना है कि यह कानून चीन के सभी जातीय समूहों के बीच एकता, साझा विकास और भाईचारे को बढ़ाने का काम करेगा। चीनी अधिकारियों का दावा है कि यह कानून अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा के इस्तेमाल का अधिकार देता है। साथ ही, यह पूरे देश में मानक चीनी भाषा को भी बढ़ावा देता है।

UN और कार्यकर्ताओं की चिंताएं

UN के विशेष जानकारों ने इस कानून को लेकर गहरी चिंता जताई है। उनका मानना है कि यह कानून सभी जातीय समूहों को एक ही सांचे में ढालने की कोशिश है। इससे तिब्बतियों सहित अल्पसंख्यक समुदायों की भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक आजादी छिन सकती है। इस कानून में चीन के बाहर होने वाली उन गतिविधियों के खिलाफ भी नियम हैं, जिन्हें बीजिंग जातीय एकता तोड़ने वाला मानता है। हालांकि, चीनी अधिकारी इस कानून को अपनी संप्रभुता और कानूनी ढांचे के तहत बिल्कुल सही ठहराते हैं।

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