
नई दिल्ली। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में सियासी संकट गहराता जा रहा है। पार्टी के 20 सांसदों ने टीएमसी छोड़ने का फैसला किया है। ये सांसद जल्द ही लोकसभा स्पीकर को अपने फैसले की जानकारी देंगे। लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं। इस बीच टीएमसी के बागी गुट ने 20 सांसदों के अपने साथ होने का दावा किया है। इन बागी सांसदों का कहना है कि लोकसभा में वे अपने नेता के रूप में अभिषेक बनर्जी को नहीं बल्कि काकोली घोष को चाहते हैं। इसको लेकर शताब्दी रॉय के घर सांसदों की बैठक हुई, जिसमें सीएम सुभेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे।
बैठक समाप्त होने के बाद शुभेंदु अधिकारी जब शताब्दी रॉय के घर से बाहर निकले तो उन्होंने मीडिया के सामने विक्ट्री साइन दिखाया। बताया जा रहा है कि शुभेंदु अधिकारी करीब 40 मिनट तक सांसदों के साथ मौजूद रहे। इस दौरान टीएमसी के वरिष्ठ सांसद और अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले पार्थ भौमिक भी वहां दिखाई दिए। पार्थ भौमिक पश्चिम बंगाल की बैरकपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं। शुभेंदु अधिकारी का विक्ट्री साइन दिखाना राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं का विषय बन गया है।
टीएमसी के बागी गुट का नेतृत्व कर रहीं सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उनके साथ 20 सांसद हैं और सभी ने लोकसभा स्पीकर से अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। काकोली घोष ने कहा कि उनका समूह पश्चिम बंगाल के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि वे राज्य में पिछले कुछ वर्षों से बढ़ रही अराजकता, कुशासन और बेरोजगारी के खिलाफ हैं। उनका मानना है कि बंगाल के विकास के लिए नई राजनीतिक दिशा की जरूरत है।
कुणाल घोष ने भावुक अंदाज में कहा कि उनके खून में गद्दारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वे टीएमसी और ममता बनर्जी के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग 'दीदी' यानी ममता बनर्जी के साथ रहेंगे, वे भी उनके साथ एक साथी और कार्यकर्ता की तरह खड़े रहेंगे। कुणाल घोष ने साफ किया कि वे किसी भी परिस्थिति में पार्टी का साथ नहीं छोड़ेंगे।
टीएमसी के भीतर बढ़ती बगावत, सांसदों की अलग बैठने की मांग और पार्टी नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को गरमा दिया है। यदि बड़ी संख्या में सांसद पार्टी छोड़ते हैं, तो इसका असर न केवल लोकसभा में टीएमसी की ताकत पर पड़ेगा बल्कि राज्य की राजनीति में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आने वाले दिनों में सभी की नजरें ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी रहेंगी।
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