
प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। रामचरितमानस जैसे महान ग्रंथ के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास के जीवन से जुड़ी घटनाओं और उनकी सटीक तिथियों को पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर समझने के लिए डॉ. प्रकाश द्विवेदी को विश्व स्तर पर सराहा गया है। उन्हें 'Zenith Book of World Records' की ओर से वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र दिया गया है। इस उपलब्धि की खबर मिलते ही उनके चाहने वालों और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
डॉ. प्रकाश द्विवेदी के इस कार्य का प्रमाणपत्र में दर्ज शीर्षक है-‘Astrological Reconstruction and Panchang-Based Chronology of the Life of Goswami Tulsidas Ji’। सरल शब्दों में इसका उद्देश्य गोस्वामी तुलसीदास के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं के समय और उनके कालक्रम को भारतीय पंचांग तथा ज्योतिषीय गणना के आधार पर समझना और पुनर्गठित करना है। इस अध्ययन में तुलसीदास जी के जीवन से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं की तिथियों और उनके बीच के समय-क्रम को समझने की कोशिश की गई है।
भारतीय परंपरा में पंचांग का इस्तेमाल समय से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां निर्धारित करने के लिए होता रहा है। इसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और अन्य काल संबंधी गणनाएं शामिल होती हैं। डॉ. द्विवेदी के अध्ययन में इसी पारंपरिक गणना पद्धति को आधार बनाकर गोस्वामी तुलसीदास के जीवन की घटनाओं के कालक्रम को समझने का प्रयास किया गया है। प्रमाणपत्र में भी इस कार्य को Astrological Reconstruction और Panchang-Based Chronology से जुड़ी उपलब्धि के तौर पर दर्ज किया गया है।
गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य और भक्ति परंपरा के सबसे प्रमुख संत-कवियों में गिने जाते हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस है। तुलसीदास के जीवन से जुड़ी कई तिथियों और घटनाओं को लेकर लंबे समय से अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं। इसी वजह से उनके जीवन-काल और प्रमुख घटनाओं के क्रम को लेकर अध्ययन और शोध की रुचि बनी रही है। इसी संदर्भ में पंचांग और ज्योतिषीय गणना के आधार पर तुलसीदास के जीवन की कालगणना का यह अध्ययन चर्चा में आया है।
Zenith Book of World Records की ओर से प्रमाणपत्र जारी होने के बाद डॉ. प्रकाश द्विवेदी के समर्थकों और शुभचिंतकों ने इसे प्रयागराज के लिए भी उपलब्धि बताया। रेलवे स्टेशन पर उनके स्वागत के लिए समर्थक पहुंचे। उन्होंने डॉ. द्विवेदी को माला पहनाई और इस उपलब्धि पर बधाई दी। डॉ. द्विवेदी इस दौरान अपने साथ मिले प्रमाणपत्र को लेकर वहां पहुंचे थे।
तुलसीदास के जीवन से जुड़ी तिथियों को लेकर अलग-अलग मान्यताओं के बीच किसी घटना के समय-क्रम को समझना एक महत्वपूर्ण विषय रहा है। पंचांग आधारित गणना भारतीय समय-निर्धारण की पारंपरिक पद्धति का हिस्सा रही है। डॉ. द्विवेदी के काम में इसी पद्धति के जरिए तुलसीदास जी के जीवन की घटनाओं को क्रमबद्ध करने का प्रयास किया गया है। प्रमाणपत्र में इसी काम को ज्योतिषीय पुनर्निर्माण और पंचांग आधारित कालक्रम के रूप में दर्ज किया गया है। यह अध्ययन अब प्रयागराज में भी चर्चा का विषय बन गया है और समर्थकों ने इसे शहर से जुड़ी एक उल्लेखनीय उपलब्धि के तौर पर देखा है।
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