Twisha Sharma Case: सीक्रेट केस डायरी लीक? आरोपी तक कैसे पहुंचा पुलिस का गोपनीय दस्तावेज!

Published : Jun 07, 2026, 10:30 AM IST
twisha sharma death case ligature evidence cbi probe custody questions court documents bhopal

सार

क्या त्विशा शर्मा केस का सबसे अहम सबूत ‘लिगेचर’ बिना स्पष्ट पहचान के जब्त किया गया? ज़ब्ती मेमो में फंदे की पहचान करने वाले व्यक्ति का नाम क्यों नहीं दर्ज है? क्या सबूत को जांच अधिकारी की गाड़ी में रखने से उसकी कस्टडी पर सवाल खड़े हो गए हैं? केस डायरी का दस्तावेज़ आरोपी पक्ष तक कैसे पहुंचा, और क्या यही जांच का सबसे बड़ा रहस्य है?

भोपाल: देश को झकझोर देने वाले हाई-प्रोफाइल त्विशा शर्मा मौत मामले में एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है जिसने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की तफ्तीश के बीच कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट में पेश किए गए ताजा दस्तावेजों के अनुसार, त्विशा की मौत में इस्तेमाल किए गए सबसे मुख्य सबूत यानी 'लिगेचर' (फंदे) को जब्त करने और उसे संभालने के तरीके पर गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। शिकायतकर्ता पक्ष के इन दावों ने मध्य प्रदेश प्रशासनिक और पुलिस हलके में खलबली मचा दी है।

मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल:आखिर किसने की थी उस फंदे की पहचान?

इस पूरे मामले में सबसे पहला और बड़ा सस्पेंस फंदे की पहचान को लेकर खड़ा हुआ है। अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, 13 मई को सुबह 9:42 बजे सब-इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा ने घटनास्थल से वह रस्सी या लिगेचर जब्त किया था जिससे कथित तौर पर फांसी लगाई गई थी। हैरानी की बात यह है कि पुलिस द्वारा तैयार किए गए 'ज़ब्ती मेमो' में उस व्यक्ति के नाम का कोई जिक्र ही नहीं है जिसने उस रस्सी को अपराध से जुड़ा हुआ सबूत बताया था। शिकायतकर्ता पक्ष का साफ तर्क है कि ज़ब्ती के वक्त न तो त्विशा की सास (रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह) और न ही उनके पति समर्थ सिंह ने इसकी पहचान की थी। ऐसे में बिना किसी गवाह या पहचानकर्ता के उस फंदे को मुख्य सबूत कैसे मान लिया गया, यह प्रक्रिया पूरी जांच को संदेह के घेरे में लाती है।

गाड़ी में घूमता रहा मुख्य सबूत: कस्टडी के नियमों की उड़ीं धज्जियां?

सस्पेंस सिर्फ पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि सबूत को सुरक्षित रखने के तरीके पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। कोर्ट के दस्तावेजों में किए गए दावों के अनुसार, ज़ब्त किए जाने के बाद वह फंदा किसी सुरक्षित मालखाने में रखने के बजाय लंबे समय तक जांच अधिकारी की निजी गाड़ी में ही रखा रहा। उसे एम्स (AIIMS) भोपाल भेजने से पहले जिस तरह से संभाला गया, उससे सबूत के साथ छेड़छाड़ (Tampering) की आशंकाओं को बल मिलता है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने क्या बताया?

पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, त्विशा शर्मा घर की छत पर जिम्नास्टिक रिंग की रस्सी से लटकी हुई मिली थीं। डॉक्टरों ने गर्दन पर दोहरे लाल निशानों का उल्लेख करते हुए निष्कर्ष निकाला कि मौत फांसी लगने के कारण हुई। हालांकि रिपोर्ट में शरीर के विभिन्न हिस्सों पर खरोंच और चोटों जैसे कई साधारण चोटों का भी जिक्र किया गया है। इसी वजह से मामले के हर सबूत की विश्वसनीयता अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। यह लापरवाही इसलिए भी बेहद संवेदनशील है क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि त्विशा की मौत "लिगेचर से फांसी लगाने (एंटीमॉर्टम हैंगिंग)" के कारण हुई थी।

सीक्रेट केस डायरी का लीक होना: क्या आरोपियों को मिल रही थी अंदर की खबर?

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि जो ज़ब्ती मेमो कानूनन गोपनीय 'केस डायरी' का हिस्सा होना चाहिए था, वह अग्रिम जमानत की अर्जी के दौरान आरोपी पक्ष के पास मौजूद था। 27 मई को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष गिरिबाला सिंह द्वारा दायर जवाब के साथ यह गोपनीय दस्तावेज संलग्न पाया गया था। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि जांच सामग्री का इस तरह आरोपी तक पहुंचना यह दर्शाता है कि सिस्टम में कोई ऐसा है जो पर्दे के पीछे से आरोपियों की मदद कर रहा है। हालांकि, इन दावों पर अभी किसी अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।

डमी रीक्रिएशन और न्यायिक हिरासत: आगे क्या होगा?

इन बढ़ती विसंगतियों के बीच, सीबीआई ने अपनी जांच की रफ्तार तेज कर दी है। 1 जून को सीबीआई की टीम ने भोपाल के कटारा हिल्स स्थित उसी आवास पर पहुंचकर पूरे क्राइम सीन का पुनर्निर्माण (Recreation) किया। टीम ने त्विशा के वजन के बराबर एक डमी को जिम्नास्टिक रिंग की उसी रस्सी से लटकाकर देखा कि क्या वाकई खुदकुशी मुमकिन थी। इसके अगले ही दिन भोपाल की एक अदालत ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।  

CBI कर रही है हर मिनट की पड़ताल

इन विवादों के बीच CBI ने मामले की गहन जांच तेज कर दी है। एजेंसी ने घटनास्थल पर पहुंचकर डमी की मदद से घटनाक्रम का पुनर्निर्माण किया और 12 मई की रात की मिनट-दर-मिनट टाइमलाइन तैयार करने की कोशिश की। जांच एजेंसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों की फोरेंसिक रिपोर्ट, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों का इंतजार कर रही है। फिलहाल अदालत ने समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

रहस्य अभी बाकी है...

त्विशा शर्मा की मौत आत्महत्या थी, दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई और कहानी छिपी है-इसका अंतिम जवाब अभी सामने नहीं आया है। लेकिन कथित फंदे की पहचान, उसकी कस्टडी और दस्तावेजी प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने जांच को और जटिल बना दिया है। अब सभी की नजर CBI की अंतिम रिपोर्ट और फोरेंसिक निष्कर्षों पर टिकी है, जो इस हाई-प्रोफाइल मामले के सबसे बड़े रहस्य से पर्दा उठा सकते हैं।

 

 

 

 

PREV

Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

SHOCKING: सैलरी ₹6,000 और साम्राज्य करोड़ों का! ओडिशा विजिलेंस को कहां मिला ये खजाना?
सिने जगत में मातम: दिग्गज अभिनेता ने दुनिया को कहा अलविदा, आधी रात आई बेहद दुखद खबर!