
भोपाल/नई दिल्ली: देश के सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा मौत मामले में सस्पेंस और कानूनी नाटक अपने चरम पर पहुंच गया है। शनिवार शाम ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) दिल्ली की एक उच्च-स्तरीय फोरेंसिक टीम आधुनिक उपकरणों के साथ भोपाल पहुंच चुकी है। डॉ. मिलो (चेयरमैन, AIIMS फोरेंसिक बोर्ड) के नेतृत्व में पांच सदस्यीय यह टीम आज रविवार को ट्विशा के शव का दूसरा पोस्टमॉर्टम करेगी। यह फैसला ट्विशा के परिवार द्वारा पहली रिपोर्ट पर संस्थागत पक्षपात और प्रक्रियागत कमियों के आरोप लगाने के बाद लिया गया है।
जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के सामने अब तक की सबसे बड़ी पहेली ट्विशा के शरीर पर मिले निशान हैं। लिगेचर रिपोर्ट के मुताबिक, फांसी लगाने के लिए एक 'जिमनास्टिक्स बेल्ट' का इस्तेमाल किया गया था, जो पहली नजर में आत्महत्या की थ्योरी को बल देता है। हालांकि, ट्विशा के शरीर पर मिले कई अन्य रहस्यमयी चोटों के निशानों ने इस थ्योरी को पूरी तरह संदिग्ध बना दिया है। AIIMS की यह नई वैज्ञानिक जांच ही अब यह साफ करेगी कि यह महज आत्महत्या है या फिर एक सोची-समझी क्रूर हत्या।
ट्विशा की मौत के बाद से ही 10 दिनों तक फरार रहे आरोपी पति समर्थ सिंह से SIT ने पूछताछ बेहद तेज कर दी है। जबलपुर में सरेंडर से ठीक पहले दबोचे गए समर्थ के चेहरे पर कोर्टरूम में कोई पछतावा या घबराहट नहीं दिखी, लेकिन SIT के दफ्तर में उसके पसीने छूट रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने समर्थ के सामने 19 तीखे सवालों की एक लंबी लिस्ट रखी है, जिसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने साफ कर दिया है कि समर्थ को पनाह देने वाले मददगारों को भी बख्शा नहीं जाएगा। इस बीच बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उसकी वकालत को निलंबित कर दिया है।
इस मामले की संवेदनशीलता और जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए देश की सर्वोच्च अदालत भी एक्शन में आ गई है। सोमवार, 25 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट इस मामले की विशेष सुनवाई करेगा। इस सुनवाई का मुख्य केंद्र बिंदु जांच में हुए संस्थागत पक्षपात और रसूखदार ससुराल वालों (रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह का परिवार) को बचाने की कोशिशों की जांच करना होगा। पूरा देश अब AIIMS की इस रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कल के रुख पर नजरें टिकाए बैठा है।
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