UP News: 10 साल का बच्चा और मां का शव-कोई साथ क्यों नहीं आया? एटा से रुला देने वाली कहानी

Published : Jan 16, 2026, 08:28 AM IST

HIV Stigma In India: क्या बीमारी से ज़्यादा खतरनाक समाज का डर है? यूपी के एटा में 10 साल का बच्चा HIV से मां की मौत के बाद अकेले शव को पोस्टमार्टम तक ले गया। न रिश्तेदार साथ आए, न पड़ोसी। क्या इंसानियत अब भी HIV से हार रही है?

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HIV Discrimination Case: उत्तर प्रदेश के एटा जिले से सामने आई यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं है, बल्कि हमारे समाज के चेहरे पर लगा वह दाग है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। एक 10 साल का बच्चा, उसकी मां का शव, और चारों तरफ सन्नाटा-न कोई रिश्तेदार, न पड़ोसी, न मदद। सवाल यह है कि क्या HIV आज भी लोगों को इतना डरा देता है कि इंसान इंसान से दूर हो जाए?

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मां की मौत के बाद बच्चा क्यों रह गया बिल्कुल अकेला?

एटा के जिला अस्पताल में टीबी और HIV का इलाज करा रही 52 साल की महिला की बुधवार रात मौत हो गई। गुरुवार सुबह जब पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू होनी थी, तो वहां सिर्फ अस्पताल का स्टाफ और उसका 10 साल का बेटा मौजूद था। ना कोई रिश्तेदार साथ आया, ना कोई पड़ोसी। बच्चा अपनी मां के शव के पास घंटों बैठा रहा, आंखें सूजी हुई थीं, लेकिन वह वहां से हटने को तैयार नहीं था।

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क्या HIV stigma ने इस परिवार को समाज से काट दिया?

बच्चे ने बताया कि उसके पिता की भी पिछले साल HIV से मौत हो चुकी है। उसके शब्द बेहद साधारण थे, लेकिन दर्द से भरे हुए-“जब पापा को एड्स हुआ, तो सबने हमसे बात करना बंद कर दिया था।” पिता के जिंदा रहते वह स्कूल जाता था, लेकिन उनकी मौत के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। उसने अपनी मां की देखभाल की, उन्हें एटा, कानपुर और फर्रुखाबाद के अस्पतालों में इलाज के लिए ले जाया। यहां तक कि उसके चाचा को भी मां की मौत की खबर समय पर नहीं मिली।

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पोस्टमार्टम हाउस में बच्चा किसका इंतजार कर रहा था?

अस्पताल कर्मचारियों के अनुसार, बच्चा अपनी मां के ढके हुए शव के पास बैठा रहा। वह रोता रहा, लेकिन अधिकारियों के आने तक वहां से जाने से मना करता रहा। कुछ समय बाद, खबर फैलने पर दूर के कुछ रिश्तेदार पहुंचे, जिनमें एक चाचा भी थे जो करीब 60 किलोमीटर दूर कासगंज से आए थे।

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एटा पुलिस ने कैसे दिखाई इंसानियत?

जब स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी कि एक बच्चा शव के साथ अकेला है, तो जैथरा थाना प्रभारी रितेश कुमार ने तुरंत कार्रवाई की। एक सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबल को मौके पर भेजा गया। पुलिस ने न सिर्फ पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में मदद की, बल्कि अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था भी करवाई।

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 एटा स्वास्थ्य विभाग क्या कहता है?

जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि महिला ने 2017 में टीबी का इलाज पूरा कर लिया था और उस समय सरकार की ओर से मिलने वाली सभी सुविधाएं दी गई थीं। एटा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि अब पूरे मामले की समीक्षा की जा रही है।

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