
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों का उद्देश्य प्रदेश में पारदर्शिता बढ़ाना, निवेश को बढ़ावा देना, औद्योगिक विकास तेज करना और सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाना है। बैठक में संपत्ति रजिस्ट्री के नियमों में बदलाव, डिफॉल्टरों के लिए ओटीएस योजना, मेरठ में औद्योगिक क्लस्टर, कानपुर में गंगा पर नया पुल और सरकारी कर्मचारियों के निवेश नियमों में संशोधन जैसे कई बड़े निर्णय लिए गए।
कैबिनेट ने संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए अहम प्रस्ताव को मंजूरी दी है। अब रजिस्ट्री से पहले खतौनी और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की जांच अनिवार्य की जाएगी। इससे फर्जी या विवादित जमीन की रजिस्ट्री को रोकने में मदद मिलेगी।
स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने बताया कि वर्तमान में कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि वास्तविक मालिक के अलावा कोई अन्य व्यक्ति संपत्ति बेच देता है। इसके अलावा प्रतिबंधित जमीन, कुर्क संपत्ति या सरकारी भूमि की भी रजिस्ट्री कराई जाती है, जिससे बाद में विवाद और मुकदमेबाजी की स्थिति बनती है।
अभी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 के तहत उप-निबंधक के पास संदिग्ध मामलों में रजिस्ट्री रोकने के बहुत सीमित अधिकार हैं। इस वजह से कई बार विवादित संपत्तियों की भी रजिस्ट्री हो जाती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने अधिनियम में संशोधन का निर्णय लिया है। इसके तहत धारा 22 और 35 के बाद नई धारा 22-A, 22-B और 35-A जोड़ी जाएंगी।
इस व्यवस्था से फर्जी रजिस्ट्री पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा और लोगों को अनावश्यक मुकदमों से राहत मिलेगी।
कैबिनेट ने वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना 2026 लागू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। यह योजना विकास प्राधिकरणों, आवास एवं विकास परिषद और विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों की संपत्तियों के डिफॉल्टरों के लिए लागू होगी। सरकार के अनुसार इन संस्थाओं में कुल 18,982 डिफॉल्टर मामले हैं, जिनमें लगभग 11,848.21 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके अलावा मानचित्र स्वीकृति से जुड़े 545 मामलों में करीब 1,482.10 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। इस योजना का उद्देश्य बकाया वसूली करना और डिफॉल्टर आवंटियों को राहत देना है।
इस योजना के अंतर्गत सभी प्रकार की संपत्तियों- आवासीय, व्यावसायिक और अन्य आवंटित संपत्तियों — को शामिल किया गया है। इसमें नीलामी या आवंटन से दी गई संपत्तियां भी शामिल होंगी। योजना के तहत:
इस योजना से विकास प्राधिकरणों को बड़ी राशि वापस मिलने की संभावना है।
कैबिनेट ने अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत मेरठ में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) के विकास को मंजूरी दी है। इस परियोजना पर लगभग ₹213.81 करोड़ खर्च किए जाएंगे। प्रदेश में यूपीईडा द्वारा विकसित एक्सप्रेसवे के किनारे 29 स्थानों पर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं।
मेरठ नोड में निम्न सुविधाएं विकसित की जाएंगी:
इन सभी कार्यों को EPC (Engineering, Procurement and Construction) मोड पर कराया जाएगा। इस परियोजना से मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
कैबिनेट ने कानपुर में ट्रांसगंगा सिटी को शहर से जोड़ने के लिए गंगा नदी पर नया पुल बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। यह परियोजना भी अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत लागू होगी। इस योजना में गंगा नदी पर चार लेन का उच्च स्तरीय पुल और उससे जुड़े पहुंच मार्ग का निर्माण किया जाएगा।
ट्रांसगंगा सिटी विकसित होने के बाद भारी और हल्के वाहनों की आवाजाही काफी बढ़ेगी। इससे मौजूदा गंगा बैराज मार्ग पर ट्रैफिक दबाव बढ़ सकता है। इसी कारण एक चार लेन पुल के बजाय दो-दो लेन के दो अलग पुल बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि यातायात सुचारु बना रहे। इस परियोजना की कुल लागत लगभग ₹753.13 करोड़ है। इसमें से ₹460 करोड़ अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन से दिए जाएंगे।
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली 1956 के नियम 21 और 24 में संशोधन को भी मंजूरी दी है। नए नियमों के तहत:
पहले यह सीमा एक महीने के वेतन के बराबर थी।
पहले सरकारी कर्मचारियों को अपनी अचल संपत्ति की जानकारी हर पांच साल में देनी होती थी। अब यह जानकारी हर वर्ष देना अनिवार्य होगा। इससे कर्मचारियों की वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ेगी।
कैबिनेट ने उत्तराखंड में यमुना नदी पर बन रही लखवार मल्टीपरपज परियोजना में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी के रूप में ₹356.07 करोड़ खर्च करने को मंजूरी दी है। इस परियोजना की कुल लागत ₹5747.17 करोड़ है। परियोजना के तहत 204 मीटर ऊंचा बांध, 300 मेगावाट बिजलीघर, संतुलन जलाशय का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना से लगभग 33,780 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलेगी।
कैबिनेट ने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में बन रही रेणुकाजी डैम परियोजना में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी के रूप में ₹361.04 करोड़ खर्च करने को मंजूरी दी है। इस परियोजना की कुल लागत ₹6946.99 करोड़ है। इसके तहत 148 मीटर ऊंचा बांध, 498 एमसीएम जल संग्रह क्षमता, 40 मेगावाट बिजली उत्पादन का प्रावधान है।
इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश को कुल 3.721 बीसीएम अतिरिक्त जल मिलेगा। इस पानी का उपयोग पूर्वी यमुना नहर और आगरा नहर प्रणाली के माध्यम से सिंचाई में किया जाएगा। इसके साथ ही यमुना नदी में जल प्रवाह बढ़ेगा और नदी के पर्यावरणीय संतुलन में भी सुधार होगा।
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