
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन सिस्टम को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठा रही है। इसके तहत प्रदेश में आधार बेस्ड प्रमाणीकरण व्यवस्था लागू की जा रही है। इस नई व्यवस्था से फर्जी रजिस्ट्रियों और छद्म व्यक्तियों के जरिए होने वाले भूमि घोटालों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
प्रदेश के स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने बताया कि विभाग द्वारा दस्तावेजों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में संपत्ति पंजीकरण प्रणाली में आधार प्रमाणीकरण व्यवस्था लागू की जा रही है, जिससे पंजीकरण प्रक्रिया सुरक्षित और भरोसेमंद बनेगी।
रवींद्र जायसवाल ने जानकारी दी कि 28 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया था। बैठक में छद्म व्यक्तियों द्वारा की जा रही फर्जी रजिस्ट्रियों पर रोक लगाने के लिए आधार प्रमाणीकरण लागू करने के निर्देश दिए गए थे। इन्हीं निर्देशों के तहत अब आवश्यक अधिसूचनाएं जारी कर दी गई हैं।
उन्होंने बताया कि 02 अगस्त 2024 की अधिसूचना के माध्यम से रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 69 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2024 लागू की गई है। इसके तहत आधार संख्या धारकों की पहचान ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और ई-हस्ताक्षर के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप में की जाएगी। अब 1 फरवरी 2026 से प्रदेश के सभी उप निबंधक कार्यालयों में विलेख पंजीकरण के दौरान निष्पादकों, पक्षकारों और गवाहों की पहचान के लिए आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य होगा। इस संबंध में सभी उप निबंधक कार्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से छद्म व्यक्तियों द्वारा संपत्ति पंजीकरण पर प्रभावी रोक लगेगी। इससे पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही, भूमि और अचल संपत्ति से जुड़े फर्जीवाड़े, कूटरचित दस्तावेजों और विवादों में उल्लेखनीय कमी आएगी।
नई व्यवस्था से डिजिटल पंजीकरण प्रणाली मजबूत होगी, विधिक विवादों और न्यायालयीन मामलों में कमी आएगी और नागरिकों के संपत्ति अधिकारों का बेहतर संरक्षण सुनिश्चित होगा। यह पहल उत्तर प्रदेश सरकार के डिजिटल गवर्नेंस लक्ष्यों के अनुरूप है और राज्य में पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
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